हरियाणा एंटी करप्शन ब्यूरो की एक रिपोर्ट में खुलासा किया गया है। अवैध कॉलोनियों का मकड़जाल बड़ी तेज़ी से फैलता जा रहा है।

औद्योगिक नगरी फरीदाबाद में अवैध कॉलोनियों का मकड़जाल किस कदर फैल चुका है, इसका खुलासा हाल ही में हरियाणा एंटी करप्शन ब्यूरो की एक रिपोर्ट में हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 10 वर्षों में फरीदाबाद में 1017 अवैध कॉलोनियां विकसित हो चुकी हैं। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के निर्देशों के बाद तैयार की गई यह रिपोर्ट फरीदाबाद प्रशासन और संबंधित विभागों के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।

रिपोर्ट की प्रमुख बातें

  • हाई कोर्ट के आदेश पर जांच: गुरुग्राम निवासी अशोक मुंजाल द्वारा दायर की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने प्रदेश में तेजी से पनप रही अवैध कॉलोनियों का विस्तृत डाटा मांगा था। इसी कड़ी में एसीबी ने फरीदाबाद समेत प्रदेश के अन्य जिलों का डेटा तैयार किया है।
  • सबसे प्रभावित इलाके: जांच में सामने आया है कि ग्रेटर फरीदाबाद सबसे अधिक प्रभावित है, जहाँ अकेले लगभग 500 अवैध कॉलोनियां बसी हैं। इसके अलावा पृथला, आईएमटी, बसंतपुर, पल्ला, सेहतपुर, अगवानपुर, ददसिया, टिकावली और वजीरपुर क्षेत्रों में 300 से अधिक अवैध कॉलोनियां चिन्हित की गई हैं।

अधिकारियों की जवाबदेही पर चुप्पी
हाई कोर्ट ने एसीबी से उन जिम्मेदार अधिकारियों के नामों की सूची भी मांगी है जिनके कार्यकाल में ये कॉलोनियां विकसित हुईं। एसीबी के एसपी अनिल यादव के अनुसार, संबंधित विभागों को इस बाबत दो बार रिमाइंडर भेजे जा चुके हैं, लेकिन अभी तक अधिकारियों की सूची उपलब्ध नहीं कराई गई है। यह देरी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है।

इन विभागों पर है रोकथाम की जिम्मेदारी
अवैध निर्माण को रोकना निम्नलिखित विभागों के अधिकार क्षेत्र में आता है, लेकिन स्पष्ट रूप से इनकी ढिलाई के कारण ही ये कॉलोनियां लगातार विकसित होती रहीं।कॉलोनियों के नियोजन और अवैध निर्माण पर लगाम लगाने का मुख्य दायित्व।निगम के तोड़फोड़ विभाग के एसडीओ को अवैध कॉलोनियां काटने वालों के खिलाफ मामला दर्ज करने और ध्वस्तीकरण के अधिकार प्राप्त हैं। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध गतिविधियों पर नजर रखना।

रिपोर्ट को हाई कोर्ट में प्रस्तुत करेगी एसीबी
एसीबी जल्द ही यह रिपोर्ट हाई कोर्ट में प्रस्तुत करेगी। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि हाई कोर्ट इन अवैध कॉलोनियों को बसने देने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई करता है और इन कॉलोनियों के भविष्य को लेकर क्या निर्णय लिया जाता है।

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