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हरियाणा के जींद में सुंदरपुरा गांव के लोगों ने लोकसभा चुनावों का बहिष्कार कर दिया। पूरा दिन पोलिंग बूथ पर अधिकारी बैठे रहे, लेकिन कोई मतदान डालने नहीं पहुंचा। डीसी व एसपी भी ग्रामीणों को मनाने पहुंचे, लेकिन ग्रामीण नहीं माने। पोलिंग अधिकारियों को निराश होकर लौटना पड़ा।

उचाना/जींद: सुंदरपुरा गांव को उचाना तहसील से नरवाना तहसील में करने, गांव की खेवट को अलग-अलग करने, धर्मगढ़ माइनर की जमीन का इंतकाल करने की मांग को लेकर सुंदरपुरा गांव के ग्रामीणों ने लोकसभा चुनाव का बहिष्कार कर दिया। गांव के एक भी व्यक्ति ने मतदान नहीं किया। गांव में लोगों को मत डालने से रोकने की जानकारी मिलने पर डीसी जींद मोहम्मद इमरान रजा, पुलिस अधीक्षक सुमित कुमार भारी सुरक्षा बल के साथ गांव में पहुंचे। यहां पर ग्रामीणों से चुनाव में मतदान करने की अपील की, लेकिन ग्रामीणों ने उनकी बात नहीं सुनी। दो दिन पहले भी नरवाना, उचाना एसडीएम गांव में ग्रामीणों को मतदान करने के लिए मनाने पहुंचे थे लेकिन ग्रामीणों ने मांगों को पूरा नहीं होने तक मतदान नहीं करने के फैसले की जानकारी अधिकारियों को दी थी।

गांव के 2 बूथों पर हैं 1630 मतदाता

सुंदपुरा गांव सिरसा लोकसभा के नरवाना हलके में आता है। यहां पर बूथ नंबर 200 व 201 है जिनमें 1630 मतदाता है। गांव के लोग मतदान केंद्र के आस-पास बैठे जानकारी लेते रहे, ताकि कोई मतदाता गांव के फैसले के बाद मतदान करने मतदान केंद्र तक नहीं आए। गांव की मेन गली में चुनाव के बहिष्कार का बैनर भी ग्रामीणों द्वारा लगाया गया था। प्रशासन द्वारा चुनाव को लेकर सभी तैयारी की हुई थी। पोलिंग पार्टी भी दोनों बूथों पर तैनात थी लेकिन पूरे दिन मतदाता के आने का इंतजार करते रहे, कोई मतदाता वोट डालने के लिए नहीं पहुंचा।

जमीन के इंतकाल की मांग काफी समय से कर रहे ग्रामीण

सरपंच प्रतिनिधि लखविंद्र श्योकंद ने कहा कि करीब सात साल पहले उनके गांव को उचाना तहसील में जोड़ दिया गया। गांव के लोगों को नरवाना में आना-जाना पड़ता है, ऐसे में उन्हें परेशानी हो रही है। गांव की खेवट एक होने से कृषि कार्ड सहित अन्य कार्य करवाने के लिए ग्रामीणों को फर्द निकलवाते समय 4 हजार से अधिक की राशि खर्च करनी पड़ती है क्योंकि पूरे गांव की खेवट एक ही है। ऐसे ही जमीन के खाते अलग करवाते है तो धर्मगढ़ माइनर की जमीन का इंतकाल मांगते है जो अब तक नहीं होने से परेशानी होती है। धर्मगढ़ माइनर की जमीन के इंतकाल की मांग भी ग्रामीण कई सालों से करते आ रहे है।

पूरे गांव ने सर्वसम्मति से लिया था बहिष्कार का फैसला

ग्रामीणों ने कहा कि मतदान नहीं करने का फैसला पूरे गांव का सर्वसम्मति से किया गया फैसला है। गांव के लोगों ने किसी को भी मतदान करने से नहीं रोका। गांव का फैसला होने के चलते किसी ने मतदान नहीं किया। जब तक उनकी मांगों को नहीं किया जाता, तब तक वो चुनाव में मतदान नहीं करेंगे। अब तो प्रशासन गांव में आकर उनकी मांग को मानने का आश्वासन दे रहा है जबकि सात सालों से वो निरंतर शासन, प्रशासन के चक्कर लगा रहे है। अबकी बार ग्रामीणों ने एकत्रित होकर फैसला कर लिया कि वो तब तक मतदान नहीं करेंगे, जब तक उनकी तीन मांगे पूरी नहीं हो जाती। डोमिसाइल सहित अन्य तहसील संबंधित कामों को लेकर बुजुर्गों, युवाओं को परेशान होना पड़ता है। सुंदरपुरा के लोगों का आवागमन नरवाना में अधिकांश है। ऐसे में उचाना आने-जाने में परेशानी होती है।

गांव के 2 बूथों पर ग्रामीणों को मतदान के लिए मनाने का प्रयास

डीसी मोहम्मद इमरान रजा ने कहा कि सुंदरपुरा बूथ नरवाना हलके का 200 व 201 नंबर है। यहां गांव के लोगों की इनफार्मेशन आई थी, किसी रीजन के चलते यहां पर बॉयकाट कर रहे हैं। दो रीजन बताए थे, प्रशासन को इन्होंने पिछले तीन दिन से लगातार पंचायत को भी हमने एड्रेस किया और आज भी लोगों के समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि मत का प्रयोग करें। उनकी जो भी प्रशासनिक स्तर की समस्या है, उसको टेक अप करेंगे और उसको रिजॉल्व करेंगे।

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