हरियाणा के पंचकूला स्थित लघु सचिवालय में सोमवार को महिला आयोग की जनसुनवाई के दौरान एक बेहद चौंकाने वाला और गंभीर मामला सामने आया। सोनीपत की प्रतिष्ठित अशोका यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाली रोहतक की एक छात्रा के लापता होने के प्रकरण ने हड़कंप मचा दिया है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए महिला आयोग की अध्यक्ष रेनू भाटिया ने केंद्र सरकार की एजेंसी NIA (नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी) से जांच कराने की सिफारिश करने का निर्णय लिया है।
यूनिवर्सिटी कैंपस से पुलिस को चकमा देकर छात्रा लापता
पीड़ित माता-पिता ने आयोग के समक्ष अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया कि उनकी बेटी अशोका यूनिवर्सिटी में शिक्षा ग्रहण कर रही थी। घर आने के बाद वह अचानक गायब हो गई। परिजनों की शिकायत पर जब पुलिस ने जांच शुरू की और मोबाइल लोकेशन ट्रैक की तो छात्रा की मौजूदगी वापस यूनिवर्सिटी कैंपस में ही मिली। हालांकि, जब पुलिस की टीम वहां तफ्तीश के लिए पहुंची, तो युवती वहां से भी गायब हो गई। इस घटनाक्रम ने पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
प्रोफेसर्स पर 'माइंड वॉश' और जेंडर चेंज के गंभीर आरोप
छात्रा के परिवार ने यूनिवर्सिटी की तीन महिला प्रोफेसरों पर बेहद संगीन आरोप लगाए हैं। परिजनों का दावा है कि ये प्रोफेसर छात्राओं का 'माइंड वॉश' (मानसिक रूप से प्रभावित) कर उन्हें ट्रांसजेंडर बनने के लिए उकसाती हैं। उन्हें पूरा अंदेशा है कि उनकी बेटी को भी इसी साजिश के तहत फंसाया गया है। सोमवार की सुनवाई में यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार को भी तलब किया गया था, लेकिन आयोग की अध्यक्ष द्वारा पूछे गए कड़े सवालों पर वे कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए और खामोश रहे।
विदेशी फंडिंग और जेंडर परिवर्तन का खेल
महिला आयोग की चेयरमैन रेनू भाटिया ने इस मामले को केवल एक गुमशुदगी तक सीमित नहीं माना है। उन्होंने संदेह जताया कि इस तरह की गतिविधियों के पीछे विदेशों से भारी भरकम फंडिंग हो सकती है। भाटिया ने कहा कि यूनिवर्सिटी के भीतर छात्राओं को ट्रांसजेंडर बनाने या उनके मानसिक बदलाव के पीछे छिपे बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करना जरूरी है, इसीलिए इस मामले की फाइल NIA को भेजने की तैयारी की जा रही है।
कनाडा में बैठे आरोपियों और लुकआउट नोटिस पर कड़ा रुख
सुनवाई के दौरान एक अन्य मामले में भी आयोग ने सख्त रुख अपनाया। पंचकूला की एक युवती के केस में रेनू भाटिया ने पुलिस को फटकार लगाते हुए कहा कि केवल 'लुकआउट नोटिस' जारी करना काफी नहीं है। आरोपी लड़का पिछले 2 साल से कनाडा में है और उसका परिवार यहां जमानत पर घूम रहा है। उन्होंने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि आरोपी के परिवार पर दबाव बनाया जाए ताकि वह भारत लौटने को मजबूर हो।
अधिकारियों को सख्त हिदायत
सोमवार को कुल 36 मामलों की सूची तैयार की गई थी। सुनवाई की शुरुआत में ही तीन मामलों में पीड़ितों के न पहुंचने पर रेनू भाटिया ने नाराजगी जाहिर की। उन्होंने मौके पर मौजूद CTM जागृत्ति और ACP अजित सिंह सहित अन्य पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे सुनिश्चित करें कि अगली सुनवाई में दोनों पक्ष अनिवार्य रूप से उपस्थित रहें। उन्होंने स्पष्ट किया कि न्याय प्रक्रिया में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।










