पूर्व वित्त मंत्री का रोहतक स्थित आवास को फूंकने के मामले में सीबीआई कोर्ट का बड़ा फैसला, विशेष अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में सभी को बरी कर दिया।

हरियाणा के बहुचर्चित जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हुई हिंसा से जुड़े महत्वपूर्ण मामले में शुक्रवार को पंचकूला स्थित विशेष सीबीआई अदालत ने अपना फैसला सुना दिया है। अदालत ने पूर्व वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु के रोहतक स्थित आवास (कोठी) को आग के हवाले करने के मामले में नामजद सभी 56 आरोपियों को बरी कर दिया है। 
करीब 9 साल तक चली लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद आए इस फैसले ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा है। बरी होने वाले आरोपियों में मुख्य रूप से रोहतक और झज्जर जिले के निवासी शामिल हैं।

2016 में जाट आरक्षण का आंदोलन हो गया था उग्र 
यह मामला साल 2016 का है, जब हरियाणा में जाट आरक्षण को लेकर आंदोलन उग्र हो गया था। केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) की ओर से दाखिल चार्जशीट के अनुसार हिंसा के दौरान अनियंत्रित भीड़ लाठी-डंडों, तलवारों और पेट्रोल बमों से लैस होकर दिल्ली बाईपास की ओर से कैप्टन अभिमन्यु के आवास पर पहुंची थी।  
पूर्व मंत्री के भतीजे रोहित के बयान के आधार पर दर्ज की गई एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि प्रदर्शनकारियों ने जबरन घर की सीमा में प्रवेश किया। न केवल वहां खड़े वाहनों को फूंक दिया गया, बल्कि कोठी के भीतर जमकर लूटपाट भी की गई। आरोप यह भी था कि घर में मौजूद सदस्यों पर जानलेवा हमला करने की नीयत से पेट्रोल बम फेंके गए थे, जिससे कोठी को भारी नुकसान पहुंचा था।

पुलिस से CBI तक पहुंचा मामला 
शुरुआत में इस घटना की जांच हरियाणा पुलिस द्वारा की गई थी, लेकिन मामले की गंभीरता और करोड़ों रुपये की संपत्ति के नुकसान को देखते हुए राज्य सरकार ने इसकी जांच सीबीआई को सौंपने की सिफारिश की थी। सीबीआई ने अपनी तफ्तीश के बाद कुल 60 लोगों को इस कांड में आरोपी बनाया था।
जांच एजेंसी ने कोर्ट में अशोक बल्हारा, राहुल दादू, मनोज दूहन, धर्मेंद्र हुड्डा और जगपाल जैसे प्रमुख चेहरों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था। हालांकि, सुनवाई के दौरान ही 3 आरोपियों की मृत्यु हो गई, जबकि एक आरोपी घोषित अपराधी (PO) बनकर देश छोड़कर फरार हो चुका है। शेष 56 आरोपियों पर आज फैसला सुनाया गया।

हाईकोर्ट की सख्ती और लंबी गवाही 
इस केस की संवेदनशीलता को देखते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने भी अपनी पैनी नजर रखी थी। हाईकोर्ट ने सुनवाई में तेजी लाने के निर्देश देते हुए साप्ताहिक आधार पर कार्यवाही करने को कहा था। पहले इस केस को दिसंबर 2025 तक निपटाने की समयसीमा तय की गई थी, जिसे बाद में बढ़ा दिया गया था। 
मामले की सुनवाई के दौरान कुल 127 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। इनमें कोई आम व्यक्ति ही नहीं, बल्कि उस समय के उच्च अधिकारी भी शामिल थे। गवाही देने वालों में 4 जज (जिन्होंने धारा 164 के तहत बयान दर्ज किए थे)। रोहतक के तत्कालीन उपायुक्त (DC) डीके बेहरा। तत्कालीन रोहतक एसपी और सीबीआई के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।

न्यायालय का निर्णय और आरोपियों की सूची
शुक्रवार को जैसे ही अदालत ने सभी को बरी करने का आदेश सुनाया, कचहरी परिसर में मौजूद आरोपियों और उनके परिजनों के चेहरे खिल उठे। बचाव पक्ष के वकीलों ने इसे न्याय की जीत बताया है। 
सीबीआई ने जिन लोगों को आरोपी बनाया था उनमें मोहित, विजेंद्र सिंह, राजेश कुमार, सुदीप कलकल, कुलबीर फौगाट, योगेश राठी, अरविंद गिल, गौरव हुड्डा और सत्यवान कादियान सहित कई अन्य नाम शामिल थे। अदालत ने सबूतों के अभाव और अन्य कानूनी पहलुओं को देख इन सभी को दोषमुक्त करार दिया है।

हिंसा ने हरियाणा को दिए थे गहरे जख्म 
2016 की उस हिंसा ने हरियाणा को गहरे जख्म दिए थे, जिसमें कैप्टन अभिमन्यु की कोठी जलाना सबसे चर्चित घटनाओं में से एक थी। आज के फैसले के बाद इस कानूनी लड़ाई का एक बड़ा अध्याय समाप्त हो गया है। हालांकि, सीबीआई इस फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील करती है या नहीं, यह देखना अभी बाकी है। 

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