भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का आगाज: जींद से सोनीपत का सफर अब 60 मिनट में, जानें किराया और खासियतें

Hydrogen Train
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भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन जींद और सोनीपत के बीच चलेगी। 

'मेक इन इंडिया' के तहत बनी यह ट्रेन पूरी तरह प्रदूषण मुक्त है, जिससे कार्बन उत्सर्जन शून्य होगा। इसमें मेट्रो की तर्ज पर 8 एसी कोच लगाए गए हैं, जिनके दरवाजे बंद होने पर ही ट्रेन चलेगी।

भारतीय रेलवे के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। हरियाणा के जींद से सोनीपत के बीच देश की पहली हाइड्रोजन संचालित ट्रेन पटरी पर उतरने के लिए पूरी तरह तैयार है। अगले दो सप्ताह के भीतर इस आधुनिक ट्रेन का कमर्शियल संचालन शुरू होने की उम्मीद है। रेलवे प्रशासन ने यात्रियों की सुविधा को देखते हुए इसके किराए की दरों को बेहद किफायती रखा है, जिससे आम जनता को कम खर्च में विश्वस्तरीय तकनीक का अनुभव मिलेगा।

महज 25 रुपये में सोनीपत तक का सफर

रेलवे द्वारा तय की गई दरों के अनुसार, जींद से सोनीपत तक का एकतरफा किराया सिर्फ 25 रुपये होगा। दिलचस्प बात यह है कि शुरुआती दो स्टेशनों तक की यात्रा के लिए यात्रियों को महज 5 रुपये खर्च करने होंगे। यह ट्रेन न केवल सस्ती है, बल्कि समय की भी भारी बचत करेगी। वर्तमान में जींद से सोनीपत के बीच रेल यात्रा में 2 घंटे से अधिक का समय लगता है, लेकिन हाइड्रोजन ट्रेन इस फासले को सिर्फ एक घंटे में तय कर लेगी। अपने पूरे सफर के दौरान यह ट्रेन मुख्य रूप से 6 स्टेशनों पर रुकेगी।

गणतंत्र दिवस से पहले शुरू हो सकता है संचालन

रेलवे सूत्रों के मुताबिक, इस महत्वाकांक्षी परियोजना को 26 जनवरी से पहले शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। संभावना जताई जा रही है कि 20 या 21 जनवरी के आसपास इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाई जा सकती है, हालांकि आधिकारिक तारीख की घोषणा जल्द ही की जाएगी। वर्तमान में जींद रेलवे स्टेशन पर ट्रेन के तकनीकी परीक्षण और ट्रायल की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। यात्रियों में इस इको-फ्रेंडली ट्रेन को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है।

'मेक इन इंडिया' की ताकत से बनी दुनिया की सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेन

यह ट्रेन चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) में निर्मित हुई है, जो भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता को दर्शाती है। इसकी कुछ प्रमुख विशेषताएं इसे वैश्विक स्तर पर खास बनाती हैं:

• विशाल क्षमता : 8 कोच वाली यह ट्रेन एक साथ लगभग 2500 यात्रियों को सफर कराने में सक्षम है।

• अतुलनीय शक्ति : इसमें 2400 किलोवाट की क्षमता है, जो इसे दुनिया की सबसे ताकतवर हाइड्रोजन ट्रेनों में से एक बनाती है।

• तेज रफ्तार : यह ट्रेन 140 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम गति से दौड़ने की काबिलियत रखती है।

• ईंधन की बचत : यह ट्रेन 360 किलो हाइड्रोजन के साथ 180 किलोमीटर की दूरी तय करेगी। जहां डीजल इंजन 1 किलोमीटर के लिए साढ़े चार लीटर ईंधन पीता है, वहीं यह तकनीक महज 2 किलो हाइड्रोजन में उतनी ही दूरी तय कर लेती है।

पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम

हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक पर आधारित होने के कारण यह ट्रेन पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त है। इससे कार्बन उत्सर्जन शून्य होगा, जो पर्यावरण के लिए एक वरदान साबित होगा। भारत अब जर्मनी और जापान जैसे विकसित देशों की सूची में शामिल हो गया है और हाइड्रोजन ट्रेन संचालित करने वाला दुनिया का आठवां देश बन गया है।

मेट्रो जैसी सुविधाएं और उन्नत सुरक्षा

जींद रेलवे स्टेशन के अधीक्षक धीरज बुटानी के अनुसार, इस ट्रेन की सभी आठ बोगियां वातानुकूलित (AC) होंगी और इनका डिजाइन मेट्रो ट्रेन की तरह आधुनिक रखा गया है। सुरक्षा के लिहाज से इसमें 'ऑटोमैटिक डोर क्लोजिंग' सिस्टम लगाया गया है, यानी जब तक सभी दरवाजे बंद नहीं होंगे, ट्रेन आगे नहीं बढ़ेगी। जल्द ही रिसर्च डिज़ाइन एंड स्टैंडर्ड आर्गेनाइजेशन (RDSO) और ग्रीन एच कंपनी के अधिकारी फाइनल रिपोर्ट तैयार करेंगे, जिसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से हरी झंडी मिलते ही इसे जनता के लिए समर्पित कर दिया जाएगा।

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