किसानों की राष्ट्रव्यापी हुंकार: कन्याकुमारी से कश्मीर तक निकलेगी किसान यात्रा, 19 मार्च को दिल्ली में महासंग्राम

हिसार में बैठक करने के लिए पहुंचे किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल व अन्य लोग।
भारतीय किसान आंदोलन अब एक नए और व्यापक चरण में प्रवेश करने जा रहा है। अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाने के उद्देश्य से किसान संगठनों ने देश के उत्तरी छोर से दक्षिणी छोर तक विशाल पदयात्रा का बिगुल फूंक दिया है। हिसार की जाट धर्मशाला में प्रेस वार्ता के दौरान किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल और अभिमन्यु कोहाड़ ने इस मेगा प्लान का खुलासा किया।
7 फरवरी से शुरू होगा 'कन्याकुमारी से कश्मीर' अभियान
किसान नेताओं के अनुसार यह राष्ट्रव्यापी यात्रा 7 फरवरी को कन्याकुमारी से शुरू होगी। देश के विभिन्न राज्यों से गुजरते हुए यह यात्रा किसानों को एकजुट करेगी और उनकी समस्याओं को राष्ट्रीय पटल पर लाएगी। इस यात्रा का भव्य समापन 19 मार्च को दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में होगा, जहां लाखों किसानों की उपस्थिति में विशाल महापंचायत होगी।
आंदोलन की धुरी तीन मुख्य मांगों पर टिकी
1. एमएसपी गारंटी कानून : फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को कानूनी जामा पहनाना।
2. स्वामीनाथन रिपोर्ट : डॉ. स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसारC2+50% फॉर्मूले पर आधारित दाम दिलाना।
3. कर्ज माफी : देश के अन्नदाताओं को कर्ज के जाल से पूरी तरह मुक्त करना।
जगजीत सिंह डल्लेवाल ने स्पष्ट किया कि किसान आज जिस कर्ज के बोझ तले दबा है, वह उसकी किसी गलती का नहीं, बल्कि उसकी फसल की "लूट" का परिणाम है। उन्होंने तर्क दिया कि यदि किसानों को उनकी उपज का सही दाम (MSP) मिलता, तो उन्हें कभी ऋण लेने की आवश्यकता ही नहीं पड़ती।
'अन्नदाता की आत्महत्या' एक गंभीर राष्ट्रीय चिंता
प्रेस वार्ता के दौरान डल्लेवाल ने बेहद मार्मिक आंकड़े प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि सरकारी कमेटियां अब तक लगभग 4 लाख किसानों की आत्महत्या की बात स्वीकार कर चुकी हैं। हालांकि, यदि अनौपचारिक और जमीनी आंकड़ों को देखें तो यह संख्या 7 लाख के पार जा चुकी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भविष्य में इन आत्महत्याओं को रोकने का एकमात्र स्थायी समाधान एमएसपी गारंटी कानून ही है।
गांव-गांव से जुटेगा समर्थन
इस अभियान को केवल नेताओं का आंदोलन न मानकर जन आंदोलन बनाने की तैयारी है। यात्रा के दौरान विभिन्न राज्यों में बड़ी किसान महापंचायतें और रैलियां होंगी। हजारों की संख्या में ट्रैक्टर मार्च और पैदल यात्राएं निकाली जाएंगी। देश के हर गांव में प्रस्ताव (रेजोल्यूशन) पारित किए जाएंगे। ये सभी प्रस्ताव 19 मार्च को प्रधानमंत्री को सौंपे जाएंगे। इसका उद्देश्य सरकार को यह दिखाना है कि एमएसपी और कर्ज माफी की मांग किसी व्यक्ति विशेष की नहीं, बल्कि देश के हर गांव और हर किसान की सामूहिक आवाज है।
19 मार्च की दिल्ली महापंचायत सरकार के लिए बड़ी चुनौती
हिसार से शुरू हुई यह सुगबुगाहट अब एक बड़े तूफान का रूप लेने को तैयार है, 19 मार्च की दिल्ली महापंचायत सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकती है। अब देखना यह होगा कि इस राष्ट्रव्यापी यात्रा के बाद केंद्र सरकार किसानों की इन मांगों पर क्या रुख अपनाती है।
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