हिसार में टोल के खिलाफ फूटा ग्रामीणों का गुस्सा: 16 गांवों के लोगों ने बास टोल कराया फ्री, पुलिस ने संभाला मोर्चा

Toll Protest
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नारनौंद में टोल प्लाजा पर प्रदर्शन करते ग्रामीण। 

टोल शुल्क कटौती को लेकर चल रहे विवाद के बीच लोग सुबह 11:30 बजे टोल पर जमा हुए और बैरियर हटाकर टोल पूरी तरह फ्री करा दिया। सरपंच प्रतिनिधियों का कहना है कि 1 जनवरी से नई कंपनी के आने के बाद से यह समस्या बढ़ी है।

हरियाणा के नारनौंद क्षेत्र में स्थित बास टोल प्लाजा गुरुवार को एक बार फिर जंग के मैदान में तब्दील हो गया। टोल शुल्क को लेकर चल रहा पुराना विवाद अचानक इतना बढ़ गया कि 16 गांवों के सैकड़ों ग्रामीणों ने टोल पर धावा बोल दिया और सभी बैरियर हटवाकर टोल को पूरी तरह से निःशुल्क करा दिया। सुबह 11:30 बजे से शुरू हुए इस हंगामे के चलते मौके पर भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा और काफी समय तक माहौल तनावपूर्ण बना रहा।

22 जनवरी को भी इस मुद्दे पर विवाद हुआ था

इस विवाद की जड़ें उस नियम से जुड़ी हैं, जिसके तहत बास और आसपास के 16 गांवों के निवासियों को टोल से पूरी तरह छूट मिली हुई है। ग्रामीणों का आरोप है कि नियमों को ताक पर रखकर टोल कर्मचारी उनके वाहनों से जबरन वसूली कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि 22 जनवरी को भी इसी मुद्दे पर विवाद हुआ था, लेकिन समाधान न होने पर गुरुवार को ग्रामीणों का सब्र जवाब दे गया।

फ्री लाइन के बावजूद कट रहा पैसा

बास बादशाहपुर के सरपंच प्रतिनिधि विनोद ने मामले की गंभीरता को स्पष्ट करते हुए कहा कि यह समस्या पिछले एक महीने से बनी हुई है। उन्होंने बताया कि जब इस टोल प्लाजा की शुरुआत हुई थी, तब प्रशासन और ग्रामीणों के बीच यह समझौता हुआ था कि स्थानीय 16 गांवों के वाहनों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। इसके लिए टोल पर एक विशेष 'फ्री लेन' भी आवंटित की गई थी।

नई कंपनी के प्रबंधन पर उठे सवाल

ग्रामीणों के अनुसार असली समस्या इस साल 1 जनवरी से शुरू हुई है। टोल प्लाजा के प्रबंधन का जिम्मा जब से नई कंपनी ने संभाला है, तब से स्थानीय लोगों को परेशान किया जा रहा है। कई ग्रामीणों ने सबूत के तौर पर अपने मोबाइल संदेश दिखाए, जिसमें स्पष्ट था कि गाड़ी 'फ्री लेन' से निकली थी, फिर भी उनके फास्टैग (FASTag) से पैसे काट लिए गए। इस तकनीकी धांधली और प्रबंधन की मनमानी ने ग्रामीणों के गुस्से में घी डालने का काम किया है।

पुलिस छावनी में तब्दील हुआ टोल प्लाजा

हंगामे की सूचना मिलते ही बास थाना प्रभारी सब-इंस्पेक्टर बलवान सिंह और नारनौंद डीएसपी देवेंद्र नैन भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस अधिकारियों ने उग्र ग्रामीणों को शांत करने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारी इस बात पर अड़ गए कि जब तक लिखित में स्थायी समाधान नहीं मिलता, वे पीछे नहीं हटेंगे। डीएसपी देवेंद्र नैन ने दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता करने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीण अपनी मांगों पर डटे रहे।

ठोस समाधान नहीं होने पर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठेंगे

फिलहाल, बास टोल प्लाजा पर स्थिति नियंत्रण में जरूर है, लेकिन ग्रामीणों के दबाव के कारण वाहनों को बिना पर्ची काटे ही निकाला जा रहा है। थाना प्रभारी बलवान सिंह ने बताया कि प्रशासन की मौजूदगी में धरना कमेटी और टोल कंपनी के प्रतिनिधियों के बीच एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई गई है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि इस बार भी कोई ठोस समाधान नहीं निकला, तो वे अनिश्चितकालीन धरने पर बैठने को मजबूर होंगे।

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