मौसम अपडेट: हरियाणा में बारिश और ओलों के बाद अब जमा पाला, बर्फीली हवाओं से कांप उठा प्रदेश

Haryana Weather Forecast
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हरियाणा में बारिश और पाले का नजारा। 
12 जिलों में भारी बारिश और ओलावृष्टि के बाद अब कड़ाके की ठंड शुरू हो गई है। शनिवार सुबह हिसार, सिरसा और नारनौल में खेतों में पाला जमा नजर आया।

हरियाणा में मौसम के बदले मिजाज ने सामान्य जनजीवन की लय पूरी तरह बिगाड़ दी है। पिछले दो दिनों से जारी कुदरत के इस कड़े तेवर ने प्रशासन से लेकर आम जनता तक को परेशानी में डाल दिया है। शुक्रवार को हुई मूसलाधार बारिश और कुछ क्षेत्रों में हुई ओलावृष्टि के बाद शनिवार को समूचा प्रदेश कड़ाके की ठंड की चपेट में है। वर्तमान स्थिति यह है कि राज्य के कई जिलों में न्यूनतम तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे खेतों में ओस की बूंदें बर्फ के रूप में जमी हुई दिखाई दे रही हैं। यह पाला कृषि और आम जनजीवन दोनों के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है।

हिसार में रिकॉर्ड तोड़ सर्दी

प्रदेश के मौसम आंकड़ों पर नजर डालें तो हिसार इस समय सबसे ठंडे स्थान के रूप में उभरा है। यहां न्यूनतम तापमान गिरकर 1.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जो सामान्य से काफी कम है। पिछले 24 घंटों के दौरान यहां के पारे में लगभग 10.7 डिग्री की भारी गिरावट देखी गई है। इस भीषण ठंड ने केवल हिसार ही नहीं, बल्कि सिरसा और नारनौल जैसे पड़ोसी जिलों को भी अपनी चपेट में ले लिया है। सिरसा में भी तापमान तीन डिग्री से नीचे बना हुआ है, जिसके चलते सुबह के समय ग्रामीण अंचलों में पाले का असर स्पष्ट रूप से देखा गया। ठंडी बर्फीली हवाओं ने ठिठुरन को इस कदर बढ़ा दिया है कि लोग घरों में कैद होने को मजबूर हो गए हैं।

बारिश और ओले पड़ने से जनजीवन प्रभावित

ठंड बढ़ने का मुख्य कारण शुक्रवार को प्रदेश के बारह से अधिक जिलों में हुई भारी बरसात को माना जा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार अंबाला जिला बारिश का मुख्य केंद्र रहा, जहां लगभग 56 मिलीमीटर तक पानी बरसा। इसके अलावा यमुनानगर के हथनीकुंड बैराज और करनाल में भी झमाझम बारिश ने सर्दी के तेवर तीखे कर दिए। फरीदाबाद और सिरसा के कुछ इलाकों में बारिश के साथ गिरे ओलों ने किसानों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। इस बेमौसम बरसात ने न केवल तापमान गिराया है, बल्कि शहरों के बुनियादी ढांचे की कमियों को भी उजागर कर दिया है।

भारी नुकसान के साथ बिजली गुल

तेज हवाओं और बरसात के कारण प्रदेश के कई हिस्सों से जान-माल के नुकसान की खबरें भी मिली हैं। यमुनानगर में एक प्लाईवुड फैक्ट्री की एक सौ दस फुट ऊंची लोहे की चिमनी गिर गई, जो एक बड़ा हादसा हो सकता था। जिस समय यह चिमनी गिरी, वहां कई कर्मचारी काम कर रहे थे, लेकिन सौभाग्य से किसी की जान नहीं गई। पंचकूला में भी तेज हवाओं ने बिजली की लाइनों को भारी नुकसान पहुंचाया है। बिजली के तारों पर पेड़ गिरने से शहर के कई सेक्टरों में करीब नौ घंटे तक बिजली गुल रही। वहीं कुरुक्षेत्र के लाड़वा में एक चलती कार पर बरगद का पेड़ गिरने से कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। झज्जर में जलभराव के बीच एक बिजली के खंभे में करंट आने से एक नंदी की मौत की दुखद घटना भी सामने आई है।

शहरी इलाकों में जलभराव और ट्रैफिक का संकट

बारिश ने गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे औद्योगिक शहरों की रफ्तार पर भी ब्रेक लगा दिया है। गुरुग्राम में जलभराव के कारण नेशनल हाईवे और मुख्य सड़कों पर कई किलोमीटर लंबा जाम लगा रहा, जिससे दफ्तर जाने वाले लोगों और स्कूली बच्चों को भारी किल्लत झेलनी पड़ी। पानीपत और अंबाला की कई कॉलोनियों में पानी भर जाने से लोगों का पैदल निकलना भी दूभर हो गया है। ड्रेनेज सिस्टम फेल होने के कारण सड़कों पर जमा पानी अब ठंड के साथ मिलकर राहगीरों के लिए और भी बड़ी मुसीबत बन रहा है।

14 जिलों में छा सकता है घना कोहरा

भारत मौसम विज्ञान विभाग ने फिलहाल राहत के कोई संकेत नहीं दिए हैं। मौसम विभाग ने राज्य के चौदह जिलों में घने कोहरे को लेकर येलो अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में हिसार, भिवानी, झज्जर, गुरुग्राम और फरीदाबाद शामिल हैं। कोहरे के कारण सड़कों पर दृश्यता काफी कम रहने की संभावना है, जिससे रेल और सड़क यातायात प्रभावित हो सकता है। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 26 जनवरी की शाम से एक और नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा, जिसके कारण सत्ताईस जनवरी को प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में एक बार फिर से मध्यम बारिश हो सकती है। इसके बाद जनवरी के आखिरी दिनों में ठंड का एक और नया दौर शुरू होने की प्रबल संभावना है।

खेती और पशुधन पर मंडराता खतरा

खेतों में जमी बर्फ की सफेद चादर यानी पाला फसलों के लिए जहर के समान माना जाता है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर आने वाले दिनों में तापमान इसी तरह कम बना रहा और पाला गिरता रहा, तो सरसों और सब्जी की फसलों को भारी नुकसान हो सकता है। किसान इस समय अपनी फसलों को बचाने के लिए खेतों के किनारों पर धुआं करने और हल्का पानी देने जैसे पारंपरिक उपाय अपना रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, अचानक बढ़ी इस ठंड ने पशुधन के लिए भी मुश्किलें पैदा कर दी हैं, जिससे दुग्ध उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

एडवाइजरी जारी

बदलते मौसम को देखते हुए प्रशासन ने भी एडवाइजरी जारी की है। कोहरे के दौरान वाहन चालकों को फॉग लाइट का इस्तेमाल करने और गति सीमा नियंत्रित रखने के निर्देश दिए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने भी बुजुर्गों और बच्चों को इस भीषण शीत लहर से बचने की सलाह दी है। जनवरी के इस आखिरी पखवाड़े में मौसम का यह दोहरा प्रहार हरियाणा के लिए एक कठिन परीक्षा जैसा साबित हो रहा है। आने वाले सप्ताह में बारिश और ठंड का संगम प्रदेश की मुश्किलों को और बढ़ा सकता है, जिसके लिए सभी को मानसिक और शारीरिक रूप से तैयार रहने की आवश्यकता है।

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