सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला अब होगा डिजिटल: साल भर ऑनलाइन बिकेंगे उत्पाद, मेले का समय दोगुना करने की तैयारी

Surajkund Mela
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सूरजकुंड मेले की चौपाल पर सांस्कृतिक प्रस्तुति देते लोक कलाकार। 

अंतरराष्ट्रीय शिल्प मेला इस बार डिजिटल क्रांति का गवाह बनेगा। शिल्पकारों को वैश्विक बाजार देने के लिए एक विशेष ऑनलाइन प्लेटफॉर्म तैयार किया जा रहा है। इसके जरिए देश भर के कारीगर अपने उत्पादों को मेले के बाद भी पूरे साल दुनिया भर में बेच सकेंगे।

हरियाणा की शान और विश्व प्रसिद्ध 'सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय हस्तशिल्प मेला' इस बार आधुनिकता के रंग में रंगा नजर आएगा। भारत सरकार का पर्यटन मंत्रालय शिल्पकारों की कला को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए इसे एक डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने जा रहा है। इस ऐतिहासिक पहल के बाद फरीदाबाद में लगने वाले मेले में आने वाले कारीगरों के उत्पाद केवल 15 दिनों के लिए नहीं, बल्कि पूरे साल ऑनलाइन उपलब्ध रहेंगे। इस कदम का मुख्य उद्देश्य भारतीय ग्रामीण कला को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सीधा प्रवेश दिलाना है।


कारीगरों के लिए खुलेगा वैश्विक बाजार का द्वार

पर्यटन मंत्रालय के सचिव डॉ. श्रीवत्स कृष्ण ने इस योजना की जानकारी देते हुए बताया कि सूरजकुंड मेला पारंपरिक हस्तशिल्पियों के लिए एक वैश्विक 'लॉन्चपैड' की तरह काम करेगा। अब तक कारीगर मेले की अवधि खत्म होने के बाद वापस लौट जाते थे, लेकिन नया ऑनलाइन पोर्टल उन्हें 365 दिन ग्राहकों से जोड़े रखेगा। उन्होंने पर्यटकों से अपील की कि वे 'वोकल फॉर लोकल' अभियान का हिस्सा बनें और इन मेहनती कलाकारों के उत्पादों को खरीदकर उनके हुनर को प्रोत्साहित करें।

मेले की अवधि चार सप्ताह करने का प्रस्ताव

शिल्पकारों की बढ़ती संख्या और पर्यटकों के भारी उत्साह को देखते हुए प्रशासन एक बड़े बदलाव पर विचार कर रहा है। वर्तमान में यह मेला दो सप्ताह तक चलता है, जिसे बढ़ाकर चार सप्ताह (एक महीना) करने की योजना बनाई जा रही है। इसके साथ ही, केंद्रीय पर्यटन मंत्री के विजन के अनुरूप इस बार राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता शिल्पकारों को विशेष तवज्जो दी जा रही है। उन्हें मेले में प्राथमिकता के आधार पर स्थान दिया गया है ताकि दुनिया उनकी श्रेष्ठ कलाकृति से रूबरू हो सके।

पक्का बुनियादी ढांचा और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित अग्रवाल ने बताया कि इस वर्ष मेले के स्वरूप को और अधिक व्यवस्थित बनाया गया है। पर्यटकों की सुविधा के लिए कच्ची झोपड़ियों (हट्स) को पक्का किया गया है, ताकि खराब मौसम में भी काम प्रभावित न हो। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पूरे मेला परिसर को सीसीटीवी की निगरानी में रखा गया है। इसके अलावा, बुनियादी ढांचे में सुधार करते हुए रास्तों और जनसुविधाओं को भी आधुनिक बनाया गया है।

डिजिटल सुविधाओं के विस्तार से टिकट बुकिंग आसान बनी

मेले में आने वाले दर्शकों को लंबी लाइनों से बचाने के लिए डिजिटल सुविधाओं का विस्तार किया गया है। अब पर्यटक प्रवेश टिकट काउंटर के अलावा ऑनलाइन भी बुक कर सकते हैं। दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने भी ऑनलाइन टिकटों की बिक्री शुरू कर दी है। खरीदारी के अनुभव को सुगम बनाने के लिए मेले के भीतर कैश के साथ-साथ यूपीआई (UPI) और अन्य ऑनलाइन पेमेंट विकल्पों की पूरी व्यवस्था की गई है, जिससे पर्यटकों और विक्रेताओं के बीच लेनदेन में कोई असुविधा न हो। इस डिजिटल और आधुनिक बदलाव के साथ सूरजकुंड मेला न केवल मनोरंजन का केंद्र बनेगा, बल्कि भारतीय शिल्पकारों की आर्थिक उन्नति का एक बड़ा जरिया भी साबित होगा।

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