चलती ट्रेन में गूंजी किलकारी: फरीदाबाद में महिलाओं ने चादर का पर्दा बना कराई MP निवासी महिला की डिलीवरी

train Baby birth
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डिलीवरी के बाद बच्ची और मां दोनों सुरक्षित हैं। 

सूचना मिलते ही ओल्ड फरीदाबाद स्टेशन पर मेडिकल टीम तैनात की गई। ट्रेन को 26 मिनट तक रोका गया और जच्चा-बच्चा को तुरंत बीके अस्पताल पहुंचाया गया। अब मां और बेटी दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं।

भारतीय रेलवे के सफर के दौरान अक्सर कई रोमांचक खबरें सामने आती हैं, लेकिन हरियाणा के फरीदाबाद से मानवता और सूझबूझ की एक बेहद भावुक कर देने वाली तस्वीर सामने आई है। श्री माता वैष्णो देवी कटरा-जबलपुर एक्सप्रेस में एक गर्भवती महिला ने चलती ट्रेन में एक नन्हीं परी को जन्म दिया। संकट की इस घड़ी में ट्रेन में मौजूद अन्य महिला यात्रियों ने जिस तरह का साहस और साथ दिखाया, उसने एक बड़ी अनहोनी को टाल दिया।

8 महीने का गर्भ और अचानक शुरू हुई प्रसव पीड़ा

मध्यप्रदेश के पन्ना जिले के सिटौली गांव का रहने वाला दंपती जम्मू-कश्मीर में रहकर मजदूरी करता था। अभिलाषा नाम की महिला 8 माह की गर्भवती थी। समय नजदीक आता देख उसका पति जवाहर लाल उसे लेकर अपने गांव जा रहा था, ताकि वहां सुरक्षित डिलीवरी हो सके। शुक्रवार दोपहर जब ट्रेन दिल्ली के करीब पहुंची, तो अभिलाषा को हल्का दर्द महसूस हुआ। दंपती को अंदाजा नहीं था कि सफर के बीच ही कुदरत का करिश्मा होने वाला है।

सहयात्रियों ने पेश की मिसाल

ट्रेन जैसे ही तुगलकाबाद स्टेशन से आगे बढ़ी अभिलाषा की प्रसव पीड़ा (लेबर पेन) असहनीय हो गई। कोच संख्या S-5 में अफरा-तफरी मच गई। संकट की स्थिति को देखते हुए कोच में सवार अन्य महिलाएं तुरंत मदद के लिए आगे आईं। अस्पताल या डॉक्टर की अनुपलब्धता के बावजूद महिलाओं ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने अपने पास मौजूद चादरों, शॉल और कंबलों को इकट्ठा किया और सीटों के चारों ओर एक अस्थायी पर्दा बना दिया। अनुभवी महिलाओं के मार्गदर्शन में चलती ट्रेन के भीतर ही सुरक्षित प्रसव कराया गया और अभिलाषा ने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया।

स्टेशन पर इमरजेंसी अलर्ट जारी किया गया

इस बीच ट्रेन में मौजूद किसी यात्री ने रेलवे के हेल्पलाइन नंबर 139 पर संपर्क कर कंट्रोल रूम को पूरी स्थिति से अवगत कराया। सूचना मिलते ही ओल्ड फरीदाबाद रेलवे स्टेशन पर इमरजेंसी अलर्ट जारी कर दिया गया। जैसे ही ट्रेन स्टेशन पर रुकी, रेलवे का मेडिकल स्टाफ और महिला कर्मी कोच में दाखिल हुए। डॉक्टरों ने सबसे पहले मां और नवजात बच्ची की गर्भनाल काटकर उन्हें प्राथमिक उपचार दिया।

अस्पताल में भर्ती मां-बेटी सुरक्षित

जबलपुर एक्सप्रेस को ओल्ड फरीदाबाद स्टेशन पर करीब 26 मिनट तक रोका गया, ताकि जच्चा-बच्चा को सुरक्षित ट्रेन से उतारा जा सके। जीआरपी और आरपीएफ की महिला कांस्टेबलों की मदद से एम्बुलेंस के जरिए दोनों को बीके अस्पताल पहुंचाया गया। डॉक्टरों के अनुसार प्री-मैच्योर डिलीवरी होने के बावजूद मां और बेटी दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं। एक रात अस्पताल की निगरानी में रहने के बाद शनिवार सुबह जरूरी मेडिकल औपचारिकताएं पूरी कर अभिलाषा को छुट्टी दे दी गई, जिसके बाद वह अपने पति के साथ गंतव्य की ओर रवाना हो गई।

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