अर्थ आवर दुनियाभर के लोगों को जलवायु परिवर्तन और स्थिरता के बारे में जागरूकता कर रही है। अर्थ आवर के इस वैश्विक अभियान को 20 साल पूरे हो रहे हैं। अर्थ आवर के इस वैश्विक अभियान के तहत दुनियाभर में ऐतिहासिक, सरकारी संस्थानों और स्मारकों की अनावश्यक बत्तियों को एक घंटे के लिए बंद रखी जाएंगी। भारत में भी इस अभियान के तहत रात 8:30 बजे से लेकर 9:30 बजे तक इन इमारतों की लाइटों को बंद कर दिया जाएगा।
यह पहल ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए है। आम लोगों से अपील की जा रही है कि 8:30 से 9:30 बजे के बीच अपने घरों की भी लाइटों को बंद रखें। भारत मंडपम और इंडिया गेट समेत सभी सरकारी और ऐतिहासिक इमारतों और स्मारकों की लाइट बंद कर दी जाएंगी। यही नहीं, ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण के इस वैश्विक अभियान में मेट्रो और बिजली कंपनियां जैसी संस्थाएं भी हिस्सा ले रही हैं।
हर साल मनाय जाता है अर्थ आवर डे
अर्थ आवर डे हर साल मार्च के आखिरी शनिवार को मनाया जाता है। यह वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फंड द्वारा आयोजित किया जाता है। इस अभियान की शुरुआत 2007 में सिडनी से हुई थी। वहां सभी ने एकजुट होकर लाइट बंद करके पूरी दुनिया को संदेश दिया था कि ऊर्जा संरक्षण कितना आवश्यक है। यह अभियान सिडनी से शुरू होकर 190 से ज्यादा देशों में फैल चुका है। इस साल अर्थ आवर की थीम गिव एन आवर फॉर अर्थ रखी है। इसका अर्थ यह है कि हर व्यक्ति को पृथ्वी के लिए एक घंटा अवश्य देना चाहिए जो कि अहम साबित हो सकता है।
दिल्ली जैसे शहरों के लिए यह अभियान बेहद जरूरी
देश की राजधानी दिल्ली वायु प्रदूषण की वजह से परेशान है, लेकिन देश के अन्य महानगर भी इस समस्या से अछूते नहीं हैं। वहीं दुनिया की बात करें तो बिजली की अधिक खपत और कार्बन उत्सर्जन का बढ़ना सभी के लिए चुनौती बन चुका है। ऐसे में अर्थ आवर का उद्देश्य है कि अगर हर व्यक्ति एक घंटे के लिए प्रकृति संरक्षण की दिशा में कदम उठाए तो उसका व्यापक असर दिखाई देगा।
कुछ लोग सोचेंगे कि एक घंटे लाइट बंद की तो क्या होगा, लेकिन अगर दिल्ली के करोड़ों लोग इस अभियान में एकजुट होकर शामिल हो जाएं तो लाखों यूनिट बिजली की बचत हो सकती है। चूंकि इससे कार्बन उत्सर्जन कम होगा, लिहाजा पर्यावरण को भी लाभ मिलेगा। पिछले साल भी इंडिया गेट और लाल किला समेत कई ऐतिहासक इमारतों की लाइटों को बंद रखा गया था। इस बार भी इन इमारतों की लाइटें बंद रहेंगी ताकि लोगों को इस वैश्विक अभियान को लेकर मजबूत संदेश दिया जा सके।