दिल्ली विश्वविद्यालय में शुक्रवार को यूजीसी समर्थक प्रदर्शन के दौरान महिला पत्रकार रुचि तिवारी पर हमला हुआ था। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। आईसा और एबीवीपी ने इस मामले को लेकर एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहराया है। आईसा ने तो यहां तक कह दिया है कि महिला पत्रकार रुचि ने आईसा डीयू सेक्रेटरी और स्टूडेंट अंजलि पर हमला किया था। हालांकि आईसा ने उनका उपनाम तिवारी की जगह शांडिल्य लिखा था। लेकिन एएनआई की मानें तो उनका नाम रुचि तिवारी हैं, जिन्होंने इस घटना के बाद पहली बार मीडिया को बयान दिया है।
न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में रुचि तिवारी ने बताया कि वीडियो हर जगह है, लोग खुद अंदाजा लगा सकते हैं कि किसने किसे उकसाया। मैं एक पत्रकार हूं, जो प्रदर्शन को कवर करने के लिए वहां मौजूद थी। एक मीडियाकर्मी ने मेरा ध्यान खींचने के लिए मेरा नाम लिया। मैं उनके पास गई, तो उन्होंने मेरा पूरा नाम और जाति पूछी। उन्होंने कुछ लोगों को इशारा किया और पूरी भीड़ मेरी तरफ आई और मुझ पर हमला कर दिया, यह वीडियो में साफ दिख रहा है। करीब 500 लोगों ने मुझ पर हमला किया। उनके पास सिर्फ झूठे बयान और झूठे आरोप हैं। मेरे आसपास की लड़कियों ने मेरे कान में बलात्कार की धमकी फुसफुसाई, सिर्फ इसलिए कि मैं ब्राह्मण हूं। उन्होंने कहा, "आज तू चल, तेरा नंगा परेड निकलेगा।" मेरे आसपास के पुरुष कह रहे थे कि वे मुझे सबक सिखाएंगे। लड़कियों ने मुझे बांहों और गर्दन से पकड़ रखा था।
रुचि तिवारी ने आगे कहा कि यह हत्या का प्रयास था। मैं बेहोश हो गई थी, लेकिन पुलिस ने कुछ नहीं किया। वहां मौजूद एक लड़का दूसरों को मुझे ले जाने का इशारा कर रहा था। क्या वे मेरा अपहरण करना चाहते थे? मेरे कपड़े फाड़े जा रहे थे... मुझे गलत तरीके से छुआ जा रहा था। वे यूजीसी के गुंडे थे, वे छात्र नहीं हो सकते...मुझ पर मेरी जाति के कारण हमला किया गया। किसी ने मेरा साथ नहीं दिया, केवल कुछ विधि संकाय के छात्रों ने मानवता दिखाई और मैं उनकी और कुछ महिला पुलिसकर्मियों की मदद से बच निकली। उन्होंने कहा कि मेरी शिकायत पर एफआईआर दर्ज हो चुकी है, मुझे कानून पर भरोसा है। उन्होंने कहा कि यह घटना लगभग आधे घंटे तक चली। वहां भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या की जा रही थी, मैं किसी तरह बच निकली, यह मेरे लिए बहुत बड़ी बात है।
आईसा और एबीवीपी आमने-सामने
इस घटना को लेकर आईसा और एबीवीपी आमने सामने आ चुके हैं। आईसा का आरोप है कि रुचि ने उनकी सेक्रेटरी और स्टूडेंट पर हमला किया और जब हम शिकायत करने पुलिस थाने गए तो वहां भी एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने हंगामा किया और खिड़कियों के शीशे तक तोड़ दिया। आईसा ने आरोप लगाया कि पुलिस भी मुकदर्शक बनी रही। इस वजह से एबीवीपी का हौंसला बढ़ रहा है। उधर, एबीवीपी की तरफ से दिल्ली स्टेट सेक्रेटरी सार्थक शर्मा ने पलटवार करते हुए कहा था कि एक महिला पत्रकार पर इस तरह से हमला कर आईसा, एसएफआई और अन्य वामपंथी दलों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करता है। वे केवल झूठे आरोप लगाकर सुर्खियों में रहना चाहते हैं, लेकिन स्टूडेंट्स इंटलिजेंट हैं। यहां पढ़िये विस्तृत खबर
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