दिल्ली विधानसभा में विपक्ष की नेता और पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी को सिख गुरुओं के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी मामले में बड़ी अपडेट सामने आ रही है। पंजाब सरकार के गृह विभाग में उप सचिव ने दिल्ली विधानसभा को पत्र लिखा है। उन्होंने 27 फरवरी को दिल्ली विधानसभा सचिवालय में पेश होने पर अपना पक्ष रखा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पंजाब सरकार के गृह विभाग में उप सचिव ने पत्र में लिखा कि दिल्ली विधानसभा सचिवालय के सचिव ने 21 फरवरी को नोटिस जारी किया था। इस दिन मुझे विशेषाधिकार समिति, दिल्ली विधानसभा, पुराना सचिवालय के समक्ष 27 फरवरी को दोपहर 3 बजे व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने को कहा गया है। साथ ही, लिखित जवाब भी प्रस्तुत करने को कहा गया है।
उन्होंने आगे लिखा कि विशेषाधिकार समिति अध्यक्ष के निर्देशानुसार इस मामले पर अपनी राय 20 फरवरी या उससे पहले प्रस्तुत करनी थी, लेकिन यह निर्धारित समय तक सचिवालय को प्राप्त नहीं हो पाई है। ऐसे में मुझे लिखित टिप्पणियों के साथ ही व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने को कहा गया है। उन्होंने लिखा कि उनकी तरफ से निर्धारित समय के भीतर जवाब भेज दिया था, लेकिन जवाब के दिल्ली विधानसभा सचिवालय तक न पहुंचने की वजह लगती है कि राज्य सरकार ने उनका जवाब समय पर नहीं भेजा।
उपसचिव ने अनुरोध किया कि उन्होंने जो उत्तर प्रस्तुत किया, उसे तत्काल दिल्ली विधानसभा सचिवालय को तत्काल भेजा जाए। साथ ही, दिल्ली विधानसभा सचिवालय को उपयुक्त सूचना भी जारी की जाए कि अपेक्षित उत्तर समय पर प्रस्तुत कर दिया गया है और 27 फरवरी को होने वाली व्यक्तिगत पेशी से छूट का अनुरोध किया जाए। उन्होंने लिखा कि यह पत्र तत्काल विचार के लिए जारी किया जा रहा है क्योंकि यह संवैधानिक निकाय के समक्ष वैधानिक कार्यवाही से जुड़ा मामला है।
आतिशी के बयान से जुड़ा विवाद
बता दें कि दिल्ली विधानसभा में विपक्ष की नेता आतिशी ने 6 जनवरी 2026 को दिल्ली विधानसभा में वक्तव्य दिया था। बीजेपी विधायकों ने आरोप लगाया था कि इस वक्तव्य के दौरान आतिशी ने सिखों के गुरुओं के प्रति अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया। इसे लेकर सदन में भारी हंगामा हुआ था। स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने आतिशी से स्पष्टीकरण मांगा था। स्पष्टीकरण न मिलने पर 8 जनवरी को यह मामला विशेषाधिकार समिति को भेज दिया गया था।