Supreme Court Order: 'दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण बढ़ाने वाले वाहन हटाना अनिवार्य', SC ने मांगी कार्य योजना

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सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली एनसीआर में वायु प्रदूषण से जुड़ी याचिका पर की सुनवाई।

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ दिल्ली एनसीआर में बिगड़ती वायु गुणवत्ता से संबंधित जनहित याचिका की सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान शीर्ष न्यायालय को आयोग के 15 दीर्घकालीक उपायों के बारे में जानकारी दी गई।

सुप्रीम कोर्ट ने आज बुधवार को दिल्ली वायु प्रदूषण से जुड़े मामले की सुनवाई करते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग की दीर्घकालीक सिफारिशों पर ठोस कार्य योजना प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। माननीय शीर्ष न्यायालय ने यह आदेश दिल्ली सरकार, नगर निकायों और एनसीआर की राज्य सरकारों को दिया गया है। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि सीएक्यूएम की सिफारिशों पर आने वाली आपत्तियों पर विचार नहीं किया जाएगा।

इससे पूर्व सीएक्यूएम की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) ऐश्वर्या भाटी ने सर्वोच्च न्यायालय को बताया कि वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग की विशेष समिति ने वायु प्रदूषण में योगदान देने वाले क्षेत्रों की पहचान कर 15 दीर्घकालीक उपायों का प्रस्ताव दिया है। उन्होंने बताया कि दिल्ली एनसीआर में अत्याधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को स्क्रैप या स्थानांतरण करके चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा। उन्नत प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था का कड़ाई से पालन, मेट्रो और रेल परिवहन का विस्तार, इलेक्ट्रॉनिक वाहन नीति का संशोधन जैसे उपाय शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि इन 15 दीर्घकालीक उपायों को लागू करने के लिए एजेंसियों की भी पहचान हो चुकी है। साथ ही, सुचारू क्रियान्वयन के लिए पर्यावरण मुआवजा शुल्क निधि के उपयोग का भी सुझाव दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने दिया ये आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने तमाम दलीलों को सुनने के बाद आदेश दिया कि सीएक्यूएम की सिफारिशों पर आई आपत्तियों पर विचार नहीं किया जाएगा। शीर्ष न्यायालय ने कहा कि वायु प्रदूषण से निपटने के लिए इन दीर्घकालीक उपायों को बिना किसी देरी के लागू करना आवश्यक है। हम इन उपायों के संबंध में किसी भी आपत्ति को सुनने के इच्छुक नहीं हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार, नगर निकायों और एनसीआर की राज्य सरकारों को एक्यूएमआई की सिफारिशों पर कार्य योजना प्रस्तुत करने का आदेश दिया। माननीय कोर्ट अब मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद करेगी।

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