Supreme Court: 'मुद्दा न्यायसंगत नहीं...,' अजमेर शरीफ दरगाह में PM मोदी को चादर चढ़ाने से रोकने वाली याचिका SC में खारिज
अजमेर शरीफ दरगाह में पीएम की तरफ से चादर चढ़ाने वाली याचिका खारिज।
Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने आज 5 जनवरी सोमवार को उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री को अजमेर शरीफ दरगाह पर सालाना उर्स के दौरान सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की मजार पर रस्मी चादर चढ़ाने से रोकने की मांग की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को यह कहकर खारिज कर दिया कि मुद्दा 'न्यायसंगत नहीं है' मामले को लेकर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि,' हमारी राय में, इस अर्जी में उठाए गए मुद्दे न्यायसंगत नहीं हैं, इसलिए अर्जी को खारिज कर दिया जाता है। इस मामले पर थोड़ी देर सुनवाई की गई, जिसके बाद इसे खत्म कर दिया गया।
याचिका में क्या कहा गया ?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह याचिका विश्व वैदिक सनातन संघ के प्रेसिडेंट जितेंद्र सिंह ने एडवोकेट बरुण कुमार सिन्हा के माध्यम से पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन के तौर पर दायर की थी। याचिका में प्रधानमंत्री समेत केंद्र सरकार को अजमेर शरीफ दरगाह पर चादर चढ़ाने जैसी श्रद्धांजलि देने से रोकने के लिए निर्देश देने की मांग उठाई थी, जिसमें कहा गया था कि ऐसे काम लोगों की इच्छा, देश की संप्रभुता और संविधान के मूल्यों के खिलाफ हैं।
सुनवाई के दौरान वकील बरुण सिन्हा ने कहा कि याचिका में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती को दिए गए सरकारी सम्मान, ऑफिशियल सुरक्षा और सिंबॉलिक पहचान पर सवाल उठाया गया है। उन्होंने तर्क दिया कि 'अजमेर दरगाह संविधान के आर्टिकल 26 के तहत सुरक्षित धार्मिक पंथ के तौर पर क्वालिफाई नहीं करती, उन्होंने दरगाह कमेटी, अजमेर और अन्य बनाम सैयद हुसैन अली और अन्य में 1961 के संविधान बेंच के फैसले पर भरोसा किया।'
पहले से एक मुकदमा पेंडिंग-कोर्ट
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि अजमेर शरीफ दरगाह को हिंदू मंदिर बताने वाला एक मुकदमा अजमेर की सिविल अदालत में पेंडिंग पड़ा हुआ है। जजों ने स्पष्ट करते हुए कहा है कि इस आदेश का प्रभाव मुकदमें पर नहीं पड़ेगा, चीफ जस्टिस ने कहा, 'मुकदमा लंबित है, उसे आगे बढ़ाइए, इस आदेश का उस पर कोई असर नहीं पड़ेगा।'
बता दें कि अजमेर दरगाह पर प्रधानमंत्री की तरफ से चादर पेश करने की परंपरा काफी लंबे वक्त से चली आ रही है। मौजूदा सरकार भी इसका पालन कर रही है, याचिकाकर्ताओं का कहना था कि अजमेर शरीफ दरगाह एक ध्वस्त शिव मंदिर की जगह पर बनी है, जिसका मुकदमा निचली अदालत में लंबित पड़ा है। याचिका में यह भी कहा गया था कि ऐसे में इस तरह की 'विवादित ढांचे' पर सरकार की तरफ से चादर भेजना निष्पक्ष सुनवाई पर असर डाल सकता है।'
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