Yuvraj Mehta Case: 'डूबने से पहले कार की छत पर 90 मिनट...,' सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता केस में खुलासा
नोएडा सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता केस।
Noida Yuvraj Mehta Case: ग्रेटर नोएडा में डूबकर जान गंवाने वाले 27 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता के मामले में नया खुलासा हुआ है। बताया जा रहा है कि युवराज ने हादसे के वक्त खुद को बचाने की काफी कोशिश की, इतना ही नहीं उन्होंने पानी से लबालब 50 मीटर गहरे गड्ढे में गिरने के बाद काफी संघर्ष किया और कार की छत पर चढ़ने में कामयाब रहे। जिसके बाद उन्होंने फोन करके मामले की सूचना अपने पिता को भी दी।
युवराज 90 मिनट कार की छत पर खड़े होकर जान बचाने के लिए गुहार लगाते रहे, लेकिन 3 विभागों के 80 कर्मचारी उनकी जान नहीं बचा सके। युवराज की जब हादसे में मौत हो गई, बचाव दल का जब अभियान असफल रहा, तो इसकी कई वजहें भी सामने आई। ऐसा कहा गया कि उस समय कोहरा बहुत घना था, अंधेरा था और रस्सियों-सीढ़ियों की लंबाई इंजीनियर तक पहुंचाने के लिए पर्याप्त नहीं थी। बता दें कि युवराज मेहता गुरुग्राम की एक कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर काम करते थे।
काम के बाद घर जा रहे थे युवराज
हादसे के दिन युवराज मारुति सुजुकी ग्रैंड विटारा कार में सवार होकर नोएडा सेक्टर 150 में टाटा यूरेका पार्क स्थित अपने घर जा रहे थे। घना कोहरा होने के कारण उन्होंने कार गलत दिशा में मोड़ दी, जिसकी वजह से कार नाले को पार करते हुए एक गड्ढे में जा गिरी जो 50 मीटर गहरा है, उसमें बारिश का पानी भी भरा हुआ था।
युवराज ने पापा को किया था फोन
पुलिस का कहना है कि गड्ढे के बाहर कोई बैरिकेड या रिफ्लेक्टिव चेतावनी भी नहीं थी। जब युवराज कार की छत पर चढ़ने में कामयाब रहे तो उन्होंने पिता को फोन करके सहायता मांगी थी। पिता राज कुमार मेहता ने एचटी को बताया, 'मेरे बेटे ने मुझे फोन किया। उसने कहा- पापा मैं फंस गया हूं। कार नाली में गिर गई है।'
मामले के बारे में पता लगने पर पुलिस, फायर ब्रिगेड, स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (SDRF) और नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF) की टीम मौके पर पहुंच गई। ऐसा भी कहा जा रहा है कि घना कोहरा होने के कारण टीम को घटनास्थल पर पहुंचने में काफी वक्त लग गया।
पुलिस अधिकारी का कहना है कि युवराज को बचाने के लिए रस्सियां फेंकी गईं लेकिन छोटी पड़ गईं। इसके अलावा एक क्रेन और सीढ़ियों से भी बचाने की कोशिश की गई लेकिन इनकी मदद से भी युवराज तक नहीं पहुंचा जा सका। बाद में टीम ने युवराज के शव को नाव की मदद से बाहर निकाला गया।
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