JNUSU: जेएनयू में लाइब्रेरी विवाद को लेकर छात्र संघ पदाधिकारियों- पूर्व अध्यक्ष पर FIR, पुलिस ने भेजा जांच नोटिस

जेएनयू लाइब्रेरी विवाद।
JNUSU: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के बीआर अंबेडकर केंद्रीय पुस्तकालय के मुद्दे को लेकर छात्र संघ और जेएनयू प्रशासन के बीच विवाद बढ़ गया है। JNU प्रशासन द्वारा केस दर्ज कराने के बाद दिल्ली पुलिस ने छात्र संघ के पदाधिकारियों और पूर्व अध्यक्ष को नोटिस जारी करके थाने आने के लिए कहा है। दूसरी तरफ छात्र संघ ने यूनिवर्सिटी प्रशासन पर छात्र प्रतिनिधियों को निशाना बनाने का आरोप लगाया है।
बता दें कि दिल्ली पुलिस ने यूनिवर्सिटी के सेंट्रल लाइब्रेरी में निगरानी उपायों का विरोध करने को लेकर मौजूदा और पूर्व संघ पदाधिकारियों को नोटिस जारी किया है। पुलिस ने नोटिस JNUSU अध्यक्ष अदिति मिश्रा, उपाध्यक्ष गोपिका, महासचिव सुनील, संयुक्त सचिव दानिश और पूर्व जेएनयूएसयू अध्यक्ष नीतीश कुमार के खिलाफ FIR के बाद जारी किए गए हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक छात्र संघ के वर्तमान अध्यक्ष अदिति मिश्रा का कहना है कि JNUSU के पदाधिकारियों और जेएनएसयू के पूर्व अध्यक्ष को पूछताछ के लिए थाने बुलाया गया है।
छात्र संघ ने अपने बयान में बताया कि बी आर अंबेडकर केंद्रीय पुस्तकालय में चेहरे की पहचान करने वाले कैमरे और मैग्नेटिक इंट्रेंस द्वार लगाने का विरोध करने के लिए पुलिस ने जांच नोटिस जारी किए हैं। आरोप है कि यह फैसला छात्रों की आवाज को दबाने और कार्यकर्ताओं को डराने के उद्देश्य से लिया गया है।
स्टूडेंट्स पुस्तकालय की स्थिति से परेशान
छात्र संघ का कहना है कि स्टूडेंट्स लंबे वक्त से केंद्रीय पुस्तकालय खराब स्थिति को लेकर चिंता जता रहे हैं। पिछले कई सालों से छात्र ज्यादा पुस्तकों, बैठने की क्षमता और पुस्तकालय का समय बढ़ाने की मांग करने में लगे हुए हैं। इसके अलावा छात्र संघ का यह भी कहना है कि प्रशासन सीमित संसाधनों को निगरानी तंत्र में इनवेस्ट कर रहा है, स्टूडेंट्स ने कहा कि इससे आवागमन में समस्या होती है और प्राइवेसी की उल्लंघन होता है। छात्र संघ ने आगे कहा कि
मैग्नेटिक इंट्रेंस द्वार पिछले साल अगस्त में बिना किसी सलाह के लगा दिए गए थे। तत्कालीन जेएनयूएसयू अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महासचिव और संयुक्त सचिव के नेतृत्व में हुए प्रोटेस्ट में प्रशासन को द्वार हटाने के लिए कहा गया था। पुस्तकालय अधिकारियों ने बाद में छात्रों को आश्वासन दिया था कि भविष्य में कोई भी फैसला छात्रों के प्रतिनिधित्व वाली एक स्वतंत्र समिति द्वारा लिया जाएगा।
छात्र संघ की तरफ से दावा करते हुए कहा गया कि प्रशासन ने नवंबर 2025 में JNUSU चुनावों के दौरान गेटों को फिर से लगाकर आश्वासन का उल्लंघन किया है, छात्र ने इसका विरोध करते हुए आरोप लगाया कि प्रशासन ने प्रॉक्टोरियल नोटिस जारी किए और पुलिस में शिकायतें दर्ज करवा दी हैं। JNUSU द्वारा इसकी कड़ी आलोचना की गई और छात्र नेताओं के खिलाफ सभी मामलों को वापस लेने की मांग उठाई है।
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