JNU Slogan Controversy: पीएम मोदी-अमित शाह के खिलाफ विवादित नारेबाजी...यूनिवर्सिटी प्रशासन ने FIR के लिए पुलिस को भेजा लेटर

Delhi News Hindi
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विवादित नारेबाजी को लेकर यूनिवर्सिटी प्रशासन ने पुलिस को लिखा लेटर। 

JNU Slogan Controversy: JNU में विवादित नारेबाजी को लेकर यूनिवर्सिटी प्रशासन ने लेटर के माध्यम से आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज करने की मांग की है।

JNU Slogan Controversy: जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में अमित शाह और प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ लगे विवादित नारेबाजी को लेकर माहौल गर्माता जा रहा है। अब इस मामले में जेएनयू प्रशासन ने सख्त फैसला लिया है। बताया जा रहा है कि प्रशासन ने ‘भड़काऊ’ नारे लगाने लगाने वालों के खिलाफ FIR दर्ज करने का अनुरोध किया है। जेएनयू प्रशासन द्वारा लिखे गए लेटर में कहा गया है कि कुछ छात्रों ने अत्यंत आपत्तिजनक, उकसाने और भड़काने वाले नारे लगाए हैं, यहां तक कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की सीधे तौर पर अवमानना की है।

जेएनयू एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा वसंत कुंज के थाना प्रभारी को लेटर भेजा गया है। लेटर में कहा गया है कि जेएनयू छात्र संघ से जुड़े स्टूडेंट्स ने बीती देर रात करीब 10 बजे ‘ए नाइट ऑफ रेजिस्टेंस विद गुरिल्ला ढाबा’ नाम से एक कार्यक्रम का आयोजन किया था। शुरूआत में लगा कि यह कार्यक्रम 5 जनवरी, 2020 की घटना की याद में आयोजित किया था, इस सभा में करीब 30 से 35 स्टूडेंट्स शामिल हुए थे।

सुप्रीम कोर्ट की अवमानना-प्रशासन का दावा

लेटर में कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका रद्द करने फैसले के बाद, कुछ छात्रों ने कथित तौर पर ऐसे नारे लगाए जिन्हें विश्वविद्यालय ने भड़काऊ और आपत्तिजनक बताया। इस पूरी घटना का एक वीडियो भी सामने आया है। प्रशासन का दावा है कि इस तरह के नारे सुप्रीम कोर्ट की अवमानना करते हैं, वहीं JUN की आचार संहिता का भी उल्लंघन हैं।

यूनिवर्सिटी प्रशासन ने जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष अदिति मिश्रा समेत कई स्टूडेंट्स के नाम का उल्लेख करते हुए कहा गया कि कार्यक्रम के दौरान उनकी पहचान की गई। विवादित नारे जानबूझकर, बार-बार लगाए गए, जिससे सार्वजनिक व्यवस्था, परिसर में सौहार्द और सुरक्षा को नुकसान पहुंच सकता था।

लेटर में कहा गया कि मौके पर सुरक्षा अधिकारी मौजूद थे, जिन्होंने हालातों पर नजर रखी हुई थी। लेटर में प्रशासन ने भारतीय न्याय संहिता के संबंधित प्रावधानों के तहत केस दर्ज करने का अनुरोध किया है। इसके अलावा, सीनियर अधिकारियों ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि JNU प्रशासन ने मंगलवार को एक बैठक की और वह दोषी पाए जाने वाले छात्रों के खिलाफ कार्रवाई करेगा।



5 जनवरी 2020 को क्या हुआ था ?

स्टूडेंट्स का कहना है कि 5 जनवरी 2020 को परिसर में हुई हिंसा के खिलाफ हर साल विरोध प्रदर्शन किया जाता है। 5 जनवरी को उस दौरान हिंसा भड़क गई थी जब नकाबपोश लोगों की एक भीड़ ने परिसर में घुसकर 3 हॉस्टल में छात्रों को निशाना बनाया था। लाठियों, पत्थरों और लोहे की छड़ों से छात्रों पर हमला किया गया, इसके अलावा खिड़कियां, फर्नीचर और निजी सामान तोड़ दिया गया था। करीब 2 घंटे तक परिसर में हमला होता रहा, जिसमें जेएनयू छात्र संघ की तत्कालीन अध्यक्ष आइशी घोष समेत करीब 28 लोग घायल हो गए थे।

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