Yuvraj Mehta Death: बिल्डर ने खोदा 70 फीट गहरा अवैध गड्ढा...इंजीनियर युवराज मेहता डेथ केस में बड़ा खुलासा

Delhi News Hindi
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इंजीनियर युवराज मेहता डेथ मामले में SIT रिपोर्ट में खुलासा। 

Yuvraj Mehta Death Case: इंजीनियर युवराज मेहता मौत मामले को लेकर SIT की रिपोर्ट में बिल्डर की लापरवाही सामने आई है, जिसने तय नियमों के बावजूद 6 गुना से ज्यादा 70 फीट गहरा अवैध गड्ढा खोदा था।

Yuvraj Mehta Death Case: नोएडा के सेक्टर-150 में इंजीनियर युवराज मेहता मौत के मामले में SIT की जांच में बड़ा खुलासा हुआ। जांच में सामने आया है कि बिल्डर ने तय मानकों के बावजूद 6 गुना से ज्यादा करीब 70 फीट गहरा अवैध गड्ढा खोद दिया था। नियमों के खिलाफ जाकर बिल्डर ने यह गड्ढा खोदा था। इसी गड्ढे में युवराज मेहता की 16 जनवरी की दे रात गिरकर मौत हो गई थी। SIT की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि इस भूखंड पर एक बेसमेंट बनाने के लिए प्राधिकरण से नक्शा पास करवाया गया था, जिसकी 6 गुना से ज्यादा खुदाई कर दी गई थी।

प्राधिकरण की ओर से SIT को दी गई जानकारी में पता लगा है कि, जिस भूखंड पर हादसा हुआ था, उसे उपविभाजन होने बाद विजटाउन बिल्डर को मिला था। प्राधिकरण ने स्पोर्ट्स सिटी के इस भूखंड को नंबर-2 लोटस ग्रीन बिल्डर को दिया गया था। प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि विजटाउन बिल्डर ने केवल एक बेसमेंट का नक्शा नोएडा से पास करवाया था।

3 मीटर और 5 मीटर खुदाई की ली NOC

जिसके बाद बिल्डर ने खनन विभाग से पहले 3 मीटर और फिर 5 मीटर खुदाई की NOC भी ली थी। खनन विभाग से इस तरह 8 मीटर की परमिशन ली गई थी। इस हिसाब से करीब 2 बेसमेंट बन सकते हैं, लेकिन बिल्डर ने मौके पर नक्शा मंजूर करके 6 गुना से ज्यादा खुदाई कर दी, जिसकी गहराई 60-70 फिट बताई जा रही है। ऐसा भी कहा जा रहा है कि भूखंड से जुड़े संशोधित नक्शे को बाद में प्राधिकरण ने मंजूरी देने से मना कर दिया था, लेकिन तब तक यहां गहरा गड्ढा खुद चुका था।

बेसमेंट और पार्किंग बनाने की योजना

अधिकारियों का कहना है कि यह भूखंड करीब 27185 वर्ग मीटर का है, जिस पर साल 2017 में 12 मंजिल की इमारत बनाने का नक्शा पास किया गया था। जिसमें एक बेसमेंट बनाने की परमिशन दी गई थी, वहीं नक्शे के हिसाब से 644 वाहनों की पार्किंग को बनाया जाना था। इस भूखंड और स्पोर्ट्स सिटी से जुड़े मामले अलग-अलग कोर्ट में पेंडिंग पड़े हैं। इस भूखंड से जुड़ा मामला दिल्ली की व्यावसायिक न्यायालय और पूरी स्पोर्ट्स सिटी का मामला उच्चतम न्यायालय में है। इस भूखंड से जुड़े मामले में न्यायालय में होने की वजह से प्राधिकरण आवंटन को निरस्त नहीं कर रहा है।

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