Saket Court: दिल्ली साकेत कोर्ट ने मेधा पाटकर को दी बड़ी राहत, मानहानि के मामले में किया बरी

Delhi Saket Court: दिल्ली के साकेत कोर्ट ने 24 जनवरी 2026 को फैसला सुनाते हुए सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर को आपराधिक मानहानि (धारा 500 आईपीसी) के मामले में बरी कर दिया। यह केस करीब 20 साल पुराना था, जो 2006 का है। दिल्ली के उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना ने ही यह शिकायत दर्ज कराई थी। कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता (वी.के. सक्सेना) आरोपों को साबित करने में नाकाम रहे। अभियोजन पक्ष के पास पर्याप्त और कानूनी रूप से मान्य सबूत नहीं थे, जिससे यह साबित हो सके कि मेधा पाटकर ने मानहानि करने वाला बयान दिया था।
यह पूरा विवाद 2006 में एक टीवी कार्यक्रम के दौरान दिए गए बयान से जुड़ा था। वी.के. सक्सेना ने दावा किया था कि मेधा पाटकर ने उनके खिलाफ मानहानिकारक टिप्पणी की, जिससे उनकी छवि खराब हुई। लेकिन कोर्ट ने पाया कि सबूतों में कमी थी और अभियोजन पक्ष आवश्यक स्तर पर केस साबित नहीं कर सका। नतीजतन, मेधा पाटकर को इस आरोप से मुक्त कर दिया गया। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि आरोपी को बरी किया जाता है क्योंकि आरोप साबित नहीं हुए।
यह फैसला मेधा पाटकर के लिए बड़ी राहत है, क्योंकि लंबे समय से चल रहा यह कानूनी केस अब खत्म हो गया। मेधा पाटकर नर्मदा बचाओ आंदोलन की प्रमुख नेता हैं और पर्यावरण, विस्थापितों के अधिकारों के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रही हैं। कई लोग इस फैसले को न्याय की जीत मान रहे हैं, क्योंकि 20 साल बाद आखिरकार कोर्ट ने सबूतों की कमी को आधार बनाकर उन्हें क्लीन चिट दी। यह फैसला दिखाता है कि कानूनी प्रक्रिया में सबूत कितने महत्वपूर्ण होते हैं। बिना ठोस प्रमाण के कोई भी व्यक्ति दोषी नहीं ठहराया जा सकता। मेधा पाटकर अब इस मामले से पूरी तरह मुक्त हैं और अपना सामाजिक कार्य जारी रख सकेंगी।
