Saket Court: साकेत के कर्मचारियों ने खत्म की हड़ताल, साथी के सुसाइड के बाद शुरू किया था प्रदर्शन

The strike at Delhi Saket Court has ended
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दिल्ली साकेत कोर्ट में खत्म हुई हड़ताल

9 जनवरी को दिल्ली के साकेत कोर्ट के एक कर्मचारी ने काम के दबाव की वजह से बिल्डिंग से कूदकर आत्महत्या कर ली थी। इस मामले में कर्मचारियों ने हड़ताल शुरू की थी, जो अब खत्म हो चुकी है।

Delhi Saket Court: दिल्ली के साकेत जिला अदालत के कर्मचारियों ने एक सहकर्मी की कथित अत्यधिक कार्य दबाव के कारण हुई आत्महत्या के विरोध में घोषित हड़ताल को वापस ले लिया है। यह फैसला शनिवार को दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय के साथ बैठक के बाद लिया गया।

आत्महत्या की घटना

शुक्रवार को साकेत कोर्ट परिसर में एक 43 वर्षीय कर्मचारी हरीश सिंह महर (अहलमद) ने कार्यालय भवन से कूदकर आत्महत्या कर ली। पुलिस के अनुसार, उनके पास से एक सुसाइड नोट बरामद हुआ है, जिसमें उन्होंने अत्यधिक कार्य दबाव को अपनी मौत का कारण बताया है। हरीश 60 प्रतिशत दिव्यांग थे और NI Act डिजिटल कोर्ट में तैनात थे। इस घटना के बाद कोर्ट कर्मचारियों में भारी आक्रोश फैल गया।

कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि एक व्यक्ति को चार लोगों के कार्यभार का दबाव दिया जा रहा है, जिससे मानसिक तनाव बढ़ता है। विरोध में उन्होंने राष्ट्रीय लोक अदालत (शनिवार को निर्धारित) का बहिष्कार करने की घोषणा की थी, जिससे दिल्ली की सभी निचली अदालतों में कामकाज प्रभावित होने की आशंका थी। कर्मचारी और वकील साकेत कोर्ट परिसर में जमा हुए और 'जस्टिस फॉर हरीश' के नारे लगाते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय तक मार्च किया।

मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात के बाद हड़ताल समाप्त

प्रदर्शनकारियों ने दिवंगत कर्मचारी के परिवार को आर्थिक सहायता, कार्य दबाव कम करने और लंबे समय से सेवा में लगे कर्मचारियों के लिए पदोन्नति जैसी मांगें रखीं। लगभग दो घंटे की बैठक के बाद मुख्य न्यायाधीश ने कर्मचारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने और उचित कदम उठाने का आश्वासन दिया। इस भरोसे के बाद कर्मचारियों ने प्रस्तावित हड़ताल और लोक अदालत बहिष्कार को वापस ले लिया।

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