LG VK Saxena: दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना को साकेत कोर्ट से मिला बड़ी राहत, मानहानि केस में हुए बरी

दिल्ली साकेत कोर्ट ने मानहानि केस में एलजी वीके सक्सेना को बरी कर दिया है
LG VK Saxena: दिल्ली के साकेत कोर्ट ने उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने उन्हें सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर द्वारा दायर एक 25 साल पुराने मानहानि के केस में बरी कर दिया। यह फैसला 29 जनवरी 2026 को ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास राघव शर्मा ने सुनाया। इससे सक्सेना पर दशकों से चला आ रहा कानूनी मुकदमा खत्म हो गया।
कोर्ट का फैसला
अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता मेधा पाटकर अपने द्वारा लगाए गए आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं कर पाईं। सक्सेना के खिलाफ कोई मजबूत और पुख्ता सबूत पेश नहीं हुए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भारतीय कानून में किसी को दोषी ठहराने के लिए आरोपों का स्पष्ट प्रमाण जरूरी है। सबूतों की कमी के कारण सक्सेना को दोषमुक्त घोषित किया गया। उपराज्यपाल वीके सक्सेना वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनवाई में शामिल हुए थे।
विवाद की जड़
यह मामला साल 2000 का है। उस समय वी.के. सक्सेना नेशनल काउंसिल फॉर सिविल लिबर्टीज (NCCL) नामक एनजीओ के अध्यक्ष थे। मेधा पाटकर नर्मदा बचाओ आंदोलन (NBA) की प्रमुख थीं, जो सरदार सरोवर बांध और विस्थापितों के मुद्दे पर लड़ रही थीं। दोनों के बीच वैचारिक टकराव था। मेधा पाटकर ने आरोप लगाया कि नवंबर 2000 में एक राष्ट्रीय अखबार में NCCL द्वारा छपा विज्ञापन और कुछ बयान उनकी छवि खराब करने वाले थे। विज्ञापन का शीर्षक था "ट्रू फेस ऑफ मिस मेधा पाटकर एंड हर नर्मदा बचाओ आंदोलन"। इसे अपमानजनक बताकर उन्होंने मानहानि का मुकदमा दायर किया।
क्रॉस-केस
यह क्रॉस-केस था। सक्सेना ने भी 2006 में मेधा पाटकर के खिलाफ मानहानि का केस किया था, जिसमें 24 जनवरी 2026 को साकेत कोर्ट ने मेधा पाटकर को बरी कर दिया था, क्योंकि सक्सेना भी जरूरी सबूत (जैसे मूल इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्डिंग) नहीं दे पाए थे। अब दोनों तरफ के मुकदमे खत्म हो गए हैं। यह फैसला दिल्ली के उपराज्यपाल के लिए बड़ी कानूनी और नैतिक जीत है।
