Delhi High Court: MCD ने 20 साल बाद भी वेबसाइट अपडेट नहीं की? दिल्ली हाईकोर्ट ने लगाई फटकार

दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली नगर को RTI का पालन करने के दिए निर्देश
Delhi High Court: दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को दिल्ली नगर निगम (MCD) को आरटीआई एक्ट के उल्लंघन पर जमकर फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि कानून लागू होने के 20 साल बाद भी MCD ने अपनी वेबसाइट पर जरूरी विधायी दस्तावेज, सदन की कार्यवाही और प्रस्ताव अपलोड नहीं किए हैं। यह गैर-जिम्मेदाराना रवैया है और अब इसके लिए जवाबदेही तय की जाएगी। यह मामला एक जनहित याचिका (PIL) की सुनवाई के दौरान सामने आया, जिसमें MCD की पारदर्शिता पर सवाल उठाए गए थे।
यह PIL गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) सेंटर फॉर यूथ, कल्चर, लॉ एंड एनवायरनमेंट ने दाखिल की थी। याचिका में मांग की गई कि MCD अपनी वेबसाइट पर विधायी रिकॉर्ड्स, सदन की कार्यवाही, स्टैंडिंग कमेटी के प्रस्ताव और अन्य सार्वजनिक जानकारी को समयबद्ध तरीके से अपलोड करे। याचिकाकर्ता ने कहा कि यह मुद्दा दिल्ली में रहने वाले लाखों लोगों से जुड़ा है, क्योंकि MCD के फैसलों का असर आम जनता पर पड़ता है।
याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि एक आरटीआई आवेदन के जवाब में MCD ने खुद माना है कि वेबसाइट पर ऐसे रिकॉर्ड्स अभी तक अपडेट नहीं किए गए हैं। वजह बताई गई कि तीन पूर्व नगर निगमों (उत्तर, दक्षिण और पूर्वी दिल्ली) के विलय के बाद वेबसाइट को अपडेट करने का काम चल रहा है। लेकिन कोर्ट ने इस बहाने को सिरे से खारिज कर दिया।
20 सालों में क्या किया- दिल्ली हाईकोर्ट
चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने कहा कि आरटीआई एक्ट की धारा 4 के तहत सार्वजनिक प्राधिकरणों को खुद से जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए, ताकि लोगों को आरटीआई दाखिल करने की जरूरत ही न पड़े। MCD को इस मामले में कोई छूट नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने सवाल किया कि 20 सालों में MCD ने क्या किया? यह पारदर्शिता की कमी को दर्शाता है।
'MCD को RTI का पालन करना होगा'
MCD के वकील ने सफाई दी कि दिल्ली नगर निगम एक्ट की धारा 86 के तहत कुछ जानकारी सार्वजनिक करने की जरूरत नहीं है, लेकिन कोर्ट ने इसे RTI एक्ट से जुड़ा न मानते हुए खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि MCD को RTI एक्ट का पालन करना ही होगा। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने MCD से पूछा कि अगर आगामी बजट तैयार है, तो इसे वेबसाइट पर क्यों नहीं अपलोड किया जा रहा? MCD ने कहा कि बजट सदन से पास होने के बाद ही अपलोड होगा। कोर्ट ने सहमति जताते हुए कहा कि कानूनी रूप से संभव और अनुमति योग्य चीजें ही हासिल की जानी चाहिएं। लेकिन साथ ही MCD को चेतावनी दी कि सुधार के लिए कदम उठाने होंगे।
हाईकोर्ट ने दिया ये निर्देश
कोर्ट ने MCD को निर्देश दिया कि वे अपनी वेबसाइट पर सभी जरूरी जानकारी अपलोड करने के लिए समयबद्ध योजना बनाएं। MCD ने आश्वासन दिया कि सुधार के काम चल रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि इस लापरवाही के लिए जवाबदेही तय होगी, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति न बने।
