Delhi High Court: दिल्ली HC ने राबड़ी देवी की अर्जी पर CBI को थमाया नोटिस, 19 जनवरी को होगी सुनवाई

राबड़ी देवी की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने सीबीआई को थमाया नोटिस
Delhi High Court: दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच ने राबड़ी देवी की उस याचिका पर सीबीआई से जवाब मांगा है, जिसमें उन्होंने ट्रायल कोर्ट के आरोप तय करने के आदेश को चुनौती दी है। यह आदेश 13 अक्टूबर 2025 को राउज एवेन्यू कोर्ट ने दिया था। कोर्ट ने पहले ही लालू प्रसाद यादव और उनके बेटे तेजस्वी यादव की अलग-अलग याचिकाओं पर भी सीबीआई को नोटिस जारी किया था। अब तीनों याचिकाओं की सुनवाई 19 जनवरी 2026 को होगी।
ट्रायल कोर्ट में क्या हुआ?
राउज एवेन्यू कोर्ट ने इस मामले में लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के खिलाफ आरोप तय कर दिए थे। आरोप भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420 (धोखाधड़ी), धारा 120बी (आपराधिक साजिश) और भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा 13(2) के तहत लगाए गए हैं। कोर्ट ने इन तीनों के अलावा कई अन्य लोगों और कंपनियों के खिलाफ भी आरोप तय किए, जैसे सुजाता होटल्स के मालिक विजय कोचर और विनय कोचर, सरला गुप्ता, प्रेमचंद गुप्ता आदि। कुल 14 आरोपी इस मामले में शामिल
आरोपों का आधार क्या है?
यह मामला 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे। आरोप है कि उन्होंने रेलवे के दो होटलों (रांची और पुरी के बीएनआर होटल) को IRCTC से ट्रांसफर करवाया और इनकी देखभाल-परिचालन का टेंडर सुजाता होटल्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को अनुचित तरीके से दिया गया। सीबीआई का दावा है कि टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर किया गया, जिसके बदले लालू यादव के परिवार को पटना में महंगे जमीन के प्लॉट बहुत कम कीमत पर मिले। यह एक तरह की रिश्वत माना जा रहा है। जांच एजेंसी कहती है कि इससे सरकारी खजाने को नुकसान हुआ।
परिवार की दलीलें
लालू यादव के वकील ने ट्रायल कोर्ट में कहा था कि उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं हैं। पहले सीबीआई ने कहा था कि अभियोजन के लिए अनुमति की जरूरत नहीं, फिर बाद में अनुमति मिलने का दावा किया। यह कानूनी रूप से सही नहीं है। राबड़ी देवी ने हाईकोर्ट में कहा है कि ट्रायल कोर्ट ने बिना पर्याप्त सबूत के सिर्फ अनुमान पर आरोप तय किए। उनका कहना है कि वे या उनका परिवार टेंडर प्रक्रिया में कभी शामिल नहीं थे।
