Delhi High Court: दिल्ली हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, बेटी से दुष्कर्म करने वाले आरोपी पिता की उम्रकैद बरकरार

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दिल्ली हाईकोर्ट ने नाबालिग बेटी से रेप के मामले में सुनाया फैसला। 

दिल्ली हाई कोर्ट ने एक आरोपी पिता की याचिका पर सख्त रुख अपनाते हुए उसे खारिज कर दिया है। आरोपी ने अपनी बेटी के साथ दुष्कर्म कर उसे गर्भवती करने जैसा घृणित कृत्य किया था।

Delhi High Court: दिल्ली हाईकोर्ट ने एक रेप केस के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए एक पिता की अपील को खारिज कर दिया। इस व्यक्ति पर अपनी नाबालिग बेटी के साथ बलात्कार करने और उसे गर्भवती बनाने का आरोप था। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा। अदालत ने कहा कि पिता का मुख्य कर्तव्य अपनी बेटी को सुरक्षा प्रदान करना है, न कि उसका शोषण करना। यह फैसला 15 जनवरी 2026 को सुनाया गया, जो परिवार के रिश्तों पर एक बड़ा झटका है।

14 साल की बेटी का किया रेप

यह दुखद घटना 2021 में सामने आई, जब पीड़िता अपनी मां के साथ पुलिस थाने पहुंची। उस समय लड़की की उम्र मात्र 14 साल थी और वह तीन महीने की गर्भवती थी। पीड़िता ने पुलिस को बताया कि उसके पिता ने जबरन उसके साथ कई बार शारीरिक संबंध बनाए। इस वजह से उसका गर्भ ठहर गया। बाद में, डॉक्टरों की सलाह पर गर्भपात कराया गया और भ्रूण के सैंपल को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया। डीएनए रिपोर्ट से साफ हो गया कि पिता ही इस अपराध का जिम्मेदार है। परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण पीड़िता और उसकी मां ने बाद में अपने बयान बदल दिए, लेकिन वैज्ञानिक सबूतों ने सच्चाई उजागर कर दी।

ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही

ट्रायल कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के बाद जुलाई 2025 में आरोपी पिता को दोषी करार दिया। उसे भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और पॉक्सो एक्ट के तहत बलात्कार, गंभीर यौन शोषण और धमकी देने के आरोप में सजा सुनाई गई। अगस्त 2025 में कोर्ट ने उसे जीवन भर की कैद की सजा दी। अभियोजन पक्ष ने मजबूत सबूत पेश किए, जिसमें डीएनए रिपोर्ट मुख्य थी। पीड़िता के बयान बदलने के बावजूद, कोर्ट ने वैज्ञानिक प्रमाणों को प्राथमिकता दी।

हाईकोर्ट की टिप्पणियां और फैसला

हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह और मधु जैन की बेंच ने अपील पर सुनवाई की। उन्होंने कहा कि यह अपराध रिश्तों की नजर से बेहद घिनौना है। कोर्ट ने पीड़िता के बयान बदलने को परिवार की सामाजिक-आर्थिक मजबूरियों से जोड़ा, लेकिन सबूतों को नजरअंदाज नहीं किया। जजों ने स्पष्ट किया, "पिता को बेटी की रक्षा करनी चाहिए, ऐसे अपराध में कोई रियायत नहीं।" अपील खारिज करते हुए सजा निलंबित करने की मांग को भी ठुकरा दिया। अभियोजन की टीम, जिसमें रितेश कुमार बहरी, विभा, ललित लूथरा और दिव्या यादव शामिल थे, ने मजबूत दलीलें दीं कि पीड़िता ने परिवार की जीविका बचाने के लिए बयान बदला।

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