Delhi Cyber Fraud: 7721 सिम से साइबर फ्रॉड...राउज एवेन्यू कोर्ट ने 3 आरोपियों की जमानत अर्जी की खारिज
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने ऑनलाइन ठगी मामले में 3 आरोपियों की जमानत याचिका को खारिज किया।
Delhi Cyber Fraud: दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने एक बड़े ऑनलाइन ठगी के मामले में 3 आरोपियों की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने तीनों आरोपियों को राहत देने से मना करते हुए कहा है कि साइबर अपराध समाज के लिए अब एक गंभीर खतरा बन गया है। साइबर अपराध लोगों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति को बहुत ज्यादा प्रभावित कर रहा है। कोर्ट ने जिन आरोपियों की जमानत याचिका को खारिज किया है, उनके नाम अनिक जैन, अमरदीप शर्मा और अरिहंत जैन है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस मामले को CBI द्वारा दर्ज किया गया है, जिसमें तीनों पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और ऑनलाइन ठगी जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। इसके अलावा आरोपियों के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की कई धाराएं भी लगाई गई हैं। मामले की सुनवाई स्पेशल जज राजेश मलिक की कोर्ट में की गई है।
कोर्ट का कहना है कि जब आप सीधे तौर पर साइबर अपराध से कनेक्ट होते हैं, तो ऐसे में उन्हें अग्रिम जमानत देना ठीक नहीं होता। जज का कहना है कि मामले की जांच अभी की जा रही है, अब तक यह पता नहीं लग पाया है कि कितने लोग ठगी का शिकार हुए हैं। कोर्ट ने कहा है कि आरोपियों से हिरासत में पूछताछ की जरूरत पड़ सकती है, ऐसे में इस समय उन्हें राहत देना सही नहीं है।
7,721 सिम कार्ड से की धोखाधड़ी
राउज एवेन्यू कोर्ट में दाखिल अर्जी के माध्यम से पता लगा है कि प्राइवेट कंपनी M/s Lord Mahavir Services India Private Limited ने इस साल वोडाफोन आइडिया से 7,721 सिम कार्ड लिए थे। इन सभी सिम कार्ड का इस्तेमाल लोगों को ठगने के लिए किया जाता है। आरोप लगाया गया है कि कॉल करने वाले खुद को TRAI, पुलिस और दूसरी सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को चूना लगाते थे।
CBI ने कोर्ट को बताया कि कार्ड लेने के लिए कंपनी ने फेक डॉक्यूमेंट्स और आखिरी उपयोगकर्ताओं की झूठी लिस्ट दी थी। सिम में ऐसे लोगों के नाम सामने आए थे, जो कंपनी के कर्मचारी नहीं थे। इस पूरे मामले से यह स्पष्ट होता है कि पूरा नेटवर्क सुनियोजित तरीके से ठगी करने के लिए बनाया गया था। सबूतों और मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए अदालत ने आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट के इस फैसले को साइबर अपराध के खिलाफ बड़ा कदम माना जा रहा है।
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