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यशवंत गंजीर/कुरुद - छत्तीसगढ़ के कुरुद में कमला देवी श्रीधर परिवार ने गौरीशंकर शिवमहापुराण के अंतिम दिन कथा वाचक कर पंडित प्रदीप मिश्रा ने शिव महिमा सुनाते हुए कहा कि, आपको कर्ज और मर्ज में कोई साथ दे या न दे पर आपने शिव जी को एक लोटा जल चढ़ाया है तो वह आपका साथ कभी नही छोड़ते। क्योंकि यह शिव ही है, जो आपके साथ जीवित अवस्था में भी रहते हैं और मरने के बाद श्मशान में भी। इसलिए कहता हूं एक लोटा जल सब समस्या का हल। 

श्रद्धालुओं का उमड़ा जनसैलाब 

कुरुद में अब तक के इतिहास में पहली बार बुधवार को श्रद्धालुओं का इतना जनसैलाब उमड़ा कि, कथा समापन के बाद कथा स्थल से निकलने में ही घन्टो लग गये। जिससे भीड़ को काबू करने और ट्रैफिक व्यवस्था बहाल करने में पुलिस प्रशासन को भारी मशक्कत करनी पड़ी। अंतिम दिवस की कथा सुबह 8 बजे से होने के कारण भक्तगण सुबह 4 बजे से ही पंडाल पहुंच गए थे। जिसके कारण VIP परिवार के लोगों को भी आरक्षित जगह पर बैठने को नही मिली। लाखो लोगों ने कड़ी धूप में पंडाल के बाहर बैठकर कथा सुनी। आयोजन को सफल बनाने में नगर और  क्षेत्र के कार्यकर्ताओं, सेवादारों, शिवभक्तों और कार्यकर्ताओं का सहयोग रहा। वहीं ट्रैफिक, पार्किंग से लेकर बैठक और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन के अधिकारियों ने योगदान दिया है। 

अनाथों के नाथ है भगवान विश्वनाथ 

पंडित मिश्रा ने माता पार्वती के बारे में बताते हुए कहा कि, भगवान शिव के संवाद के जरिये जिनका कोई नही उनके लिए भगवान विश्वनाथ है। उन्होंने कहा कि, काशी विश्वनाथ में शिव जी के साथ मां पार्वती की जगह मां अन्नपूर्णा विराजित है। ताकि कोई भी भक्त भूखा न रहे। उन्होंने अनाथालय का नाम बदलकर विश्वनाथालय कर देने पर भी बल दिया। उन्होंने ने शिव कथा पंडाल में बैठकर कथा सुनने वालों की असत्य, नशा, अहंकार और अन्य शीतलता आने की बात कही। 

सुख हो या दुःख मदिरालय की जगह शिवालय जाये

व्यासपीठ से प्रदीप मिश्रा ने मानव की इच्छाओं की प्रवृत्ति पर बात करते हुए कहा कि, लोगों की दो इच्छाएं होती हैं एक अच्छा और एक बुरा उनमें से हमे अच्छी वाली का ही चयन करना चाहिए। उन्होंने बहुमूल्य मानव देह को नशे जैसे दुर्व्यसन से दूर रखने का संदेश देते हुए कहा कि आपके पास चाहे कोई सुख हो या दुःख को मदिरालय की जगह आपको शिवालय जाना चाहिए। क्योंकि मेरे शिव ही एक मात्र है जो सुख व दुःख दोनों की अवस्था मे अपने भक्तों का साथ नही छोड़ता। 

लाखों भक्तों ने किया रोजाना दान 

कथा श्रवण करने रोज लाखों भक्त पहुंचते थे। जिसमें से रोजाना लाखों भक्त एक रुपये से लेकर हजारों दान कर रहे थे। कोई विट्ठलेश सेवा समिति के नाम से ऑनलाइन, नगद रसीदे कटवा रहा था तो अनेकों ऐसे शिवभक्त मिले जो पंडित मिश्रा के साथ आये हुए सहयोगी के लाल थैले में एक रुपये से लेकर हजारों दान कर रहे थे। कथा समाप्ति के बाद महराज को कूरुद से खुश होकर जाने की चर्चा सुनने पर आयोजन से जुड़े हुए कुछ लोगो से कहते सुना कि  रोजाना महराज को 10 से 15 लाख का शिवभक्तों से ही दान मिला तो खुश कैसे नही होगा। तभी दूसरे ने कहा कि सात दिन महाराज को करीब एक करोड़ का दान मिला होगा। 

शिव कृपा से आयोजन हुआ सफल : चंद्राकर

कथा विराम के बाद आभार प्रदर्शन करते हुए विधायक अजय चंद्राकर ने  कहा कि शिव की कृपा होती है इसकी अनुभूति मुझे भी इस आयोजन में देखने को मिली। अनुमान से ज्यादा श्रोताओं की भीड़ उमड़ी, हजारों ने भोजन प्रसाद ग्रहण किया। इस अप्रत्याशित भीड़ को नियंत्रित करना हमारी बस की बात नही थी यह सब शिव कृपा से ही संभव हुआ। उन्होंने आयोजन को सफल बनाने प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रुप में सेवा देने वाले सभी वर्गों का आभार प्रकट कर इस सात दिनों में किसी को किसी प्रकार की कष्ट हुई हो उसके लिए खेद प्रकट किया।