श्यामकिशोर शर्मा। नवापारा-राजिम। रायपुर-गरियाबंद मार्ग पर नवापारा शहर के बस स्टेण्ड से 200 मीटर दूर रेल्वे क्रासिंग पर प्रस्तावित फ्लाईओवर को लेकर यहां का बस स्टैंड का सत्यानाश होने से इंकार नही किया जा सकता। इस बस स्टेण्ड से रायपुर के लिए 70 मिनी बसें, दो चक्कर लगाती हैं। वहीं आरंग रूट की गाड़ियां भी यही से संचालित होती हैं। लंबी रूट देवभोग, गरियाबंद के लिए भी इसी बस स्टेण्ड के सड़क से सारी गाड़ियां रूकती हैं, सवारी उतारती है और सवारी चढ़ाकर रवाना होती है। इसके अलावा दर्जनो ऑटो, रिक्शॉ का स्टेण्ड भी यही बस स्टेण्ड है।
अब कल्पना कर लीजिए कि यदि फ्लाईओवर मात्र 200 मीटर की दूरी पर बनाया जाता है तो ये सारी गाड़ियां कै से बस स्टेण्ड आएगी और जाएगी? बस स्टेण्ड वैसे भी बहुत छोटा है। चार गाड़ियां एक साथ खड़ी नही हो पाती कि बस स्टेण्ड में जगह नही बचता। फ्लाईओवर बनने के बाद सर्विस मार्ग के लिए भी जगह नही बचेगा। यदि सर्विस मार्ग बनाया भी जाएगा तो कम से कम सड़क के दोनो ओर के 200 बिल्डिंग को तोड़ना पड़ेगा। इससे ऐसा लगता है कि एक मात्र बस स्टेण्ड का भी सत्यानाश हो जाएगा। वैसे भी इस शहर में बढ़ते ट्रैफिक के कारण पहले से ही सदर बाजार और गंज मार्ग की स्थिति विकराल हो चुकी है। गाड़ियो की आमदरफ्त ऐसे बढ़ गई है कि हर पल जाम की स्थिति बनती है। फ्लाईओवर के बनने से स्थिति और विस्फोटक हो जाएगी। चूंकि यह नगर रायपुर-देवभोग हाइवे पर स्थित होने के कारण प्रतिदिन सैकड़ों बसों और दर्जनों ऑटो रिक्शाओं का आवागमन होता है।
बसों के ठहराव में होगी समस्या
वर्तमान में बस स्टैंड परिसर और उससे लगा क्षेत्र ही बसों के ठहराव, यात्रियों के चढ़ने-उतरने और ऑटो रिक्शा संचालन का मुख्य स्थान है। ऐसे में प्रस्तावित फ्लाईओवर यदि इसी मार्ग से होकर गुजरता है, तो नगर की संपूर्ण यातायात व्यवस्था चरमरा जाने की आशंका व्यक्त की जा रही है। बस स्टैंड क्षेत्र पहले से सीमित स्थान में संचालित हो रहा है। पीक अवर्स में यहाँ पैदल यात्रियों, बसों और ऑटो की भारी भीड़ रहती है। यही कारण है कि वर्तमान ढांचे में थोड़ी सी भी संरचनात्मक बाधा पूरे सिस्टम को प्रभावित कर सकती है। फ्लाईओवर बनने की स्थिति में बसों के ठहराव की समस्या खड़ी हो जाएगी। बसों के रुकने के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध नहीं होगी। यात्रियों को सड़क के बीच उतरने की मजबूरी हो जाएगी इससे दुर्घटना की आशंका बढ़ेगी। ऑटो रिक्शा के लिए निर्धारित खड़े होने की जगह समाप्त हो सकती है।
सैकड़ों बसों और दर्जनों ऑटो रिक्शाओं की होती है आवाजाही
नगरवासियों और वाहन चालकों का कहना है कि बिना विस्तृत ट्रैफिक प्लान के यह परियोजना लागू की जा रही है। पहले से सीमित जगह में भारी ढांचा खड़ा करना अव्यावहारिक है। वैकल्पिक मार्ग या बस स्टैंड पुनर्स्थापन की कोई स्पष्ट योजना सामने नहीं आई है। फ्लाईओवर के डिजाइन में स्थानीय यातायात घनत्व को ध्यान में रखा जाए। बता दें कि नवापारा का बस स्टैंड नगर की जीवनरेखा है। यहाँ प्रतिदिन सैकड़ों बसों और दर्जनों ऑटो रिक्शाओं का संचालन होता है। यदि बिना समुचित योजना और स्थान प्रबंधन के फ्लाईओवर निर्माण किया गया, तो बसों के रुकने, ऑटो संचालन और पैदल यातायात की व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो सकती है। विकास की योजनाएं तभी सफल मानी जाएंगी जब वे स्थानीय आवश्यकताओं और व्यवहारिक परिस्थितियों के अनुरूप हों। अन्यथा यह परियोजना सुविधा से अधिक समस्या का कारण बन सकती है।
फ्लाईओवर की जांच करवाने की मांग
स्थानीय नागरिकों, व्यापारियो और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि फ्लाईओवर योजना की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए। जब तक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट सार्वजनिक न हो, निर्माण कार्य रोका जाए। बाइपास और फ्लाईओवर दोनों के लिए समग्र मास्टर प्लान सार्वजनिक किया जाए। जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। नगर में इस मुद्दे को लेकर बैठकों और चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। लोगों का कहना है कि विकास के नाम पर यदि अव्यवहारिक निर्णय लिए गए, तो इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ेगा। नवापारा जैसे छोटे शहर में रेल्वे क्रॉसिंग पर फ्लाईओवर निर्माण का निर्णय केवल तकनीकी नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक प्रभावों से भी जुड़ा है। बिना दीर्घकालिक शहरी योजना और जनसहमति के ऐसे निर्णय स्थानीय असंतोष को जन्म देते हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन जनभावनाओं को समझते हुए पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ आगे बढ़ता है या नहीं।
शहर में रहती है भारी भीड़
मालूम हो कि बस स्टैंड के आसपास दर्जनों दुकानें, छोटा-बड़ा व्यवसाय, ऑटो पार्टस, किराना ,शो रूम, मोटर-बाइक रिपेयर, होटल-ढाबे सहित सैकड़ो दुकाने हैं जो इन व्यवसायों का दैनिक आय बस स्टॉप की यात्री भीड़ पर आधारित है। इसी रेल्वे क्रॉसिंग पर प्रस्तावित फ्लाईओवर निर्माण कार्य को लेकर नगर में जबरदस्त असंतोष और आक्रोश का माहौल बन गया है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि बिना किसी सार्वजनिक सूचना, बिना विस्तृत डिजाइन प्रस्तुत किए और बिना जनसहमति के इस योजना की शुरूआत चुपचाप कर दी गई। न ही फ्लाईओवर का अधिकृत नक्शा या डिजाइन सार्वजनिक किया गया। बस स्टैंड और व्यापारियों के हितों की रक्षा सुनिश्चित की जाए।