रायपुर में यातायात महासंघ ने ई-चालान व्यवस्था को अन्यायपूर्ण बताते हुए इसे निरस्त करने और बिना सुनवाई चालान पर रोक लगाने की मांग उठाई।

रायपुर। छत्तीसगढ़ यातायात महासंघ, रायपुर ने ई-चालान और ऑनलाइन चालान व्यवस्था को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष अनवर अली ने रायपुर पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखकर इस व्यवस्था को तत्काल निरस्त करने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस द्वारा मनमाने तरीके से चालान किए जा रहे हैं, जिससे आम लोगों और वाहन संचालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

मनमाने ऑनलाइन चालान का आरोप
महासंघ ने अपने पत्र में कहा है कि वर्तमान में पुलिस द्वारा बिना पर्याप्त आधार और सुनवाई के ऑनलाइन चालान जारी किए जा रहे हैं, जो आम नागरिकों के साथ अन्याय है। उनका कहना है कि यह प्रक्रिया विधिसम्मत नहीं है और नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया जा रहा।

अंतर्राज्यीय बस संचालकों पर आर्थिक बोझ
महासंघ के अनुसार, अंतर्राज्यीय बसों पर रोजाना 5 से 7 हजार रुपये तक के चालान लगाए जा रहे हैं। इससे बस संचालकों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है और परिवहन व्यवसाय प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि इस तरह के लगातार चालान से परिवहन क्षेत्र में असंतोष बढ़ता जा रहा है।

बिना सुनवाई चालान निरस्त करने की मांग
महासंघ ने स्पष्ट मांग रखी है कि बिना सुनवाई के जारी किए गए सभी ई-चालानों को तत्काल निरस्त किया जाए। साथ ही ऐसी स्पष्ट और विधिसम्मत नियमावली बनाई जाए, जिसमें यह सुनिश्चित हो कि किसी भी वाहन स्वामी पर जुर्माना लगाने से पहले उसे अपनी बात रखने का अवसर मिले।

नए नियम पर आपत्ति
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि 1 अप्रैल 2026 से लागू नियम के अनुसार, पहले ई-चालान की राशि जमा करने के बाद ही वाहन से जुड़े कार्य—जैसे परमिट, फिटनेस, बीमा, प्रदूषण प्रमाण पत्र और कर जमा किए जा सकते हैं। महासंघ ने इस नियम को अव्यवहारिक बताते हुए इसे तत्काल प्रभाव से रोकने की मांग की है।

फर्जी वेबसाइट और ऑनलाइन ठगी का मुद्दा
महासंघ ने ई-चालान के नाम पर बढ़ रही फर्जी वेबसाइटों और ऑनलाइन ठगी पर भी चिंता जताई है। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया है कि ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि आम जनता ठगी का शिकार न हो।

न्यायसंगत व्यवस्था लागू करने की मांग
महासंघ ने अंत में कहा कि आम जनता की मेहनत की कमाई को अवैध रूप से वसूलने की प्रक्रिया पर रोक लगाई जानी चाहिए। उन्होंने प्रशासन से न्यायसंगत और पारदर्शी व्यवस्था लागू करने की मांग की है, जिससे लोगों का भरोसा बना रहे।

(छत्तीसगढ़ के जिले, कस्बे और गांवों की खबरों के लिए हरिभूमि का "ई-पेपर" पढ़ें। यहां क्लिक करें "epaper haribhoomi" या प्लेस्टोर से "हरिभूमि हिंदी न्यूज़" App डाउनलोड करें।)