शासकीय दूधाधारी बजरंग महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय में सात दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम प्रारंभ हुआ। यह कार्यक्रम जेंडर सेंसिटाइजेशन विषय पर आयोजित किया गया।

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के शासकीय दूधाधारी बजरंग महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय में सात दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम प्रारंभ हुआ। यह कार्यक्रम जेंडर सेंसिटाइजेशन विषय पर आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य लैंगिक समानता, रूढ़ियों को तोड़ना, परस्पर सम्मान और सामाजिक जागरूकता की भावना को विकसित करना था। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। संयोजक डॉ. रश्मि दुबे ने सभी का स्वागत किया। स्वागत उद्बोधन डॉ गौतमी भतपहरी ने दिया।

इसके पश्चात कॉलेज की प्राचार्य डॉ. जया तिवारी ने अपने उद्बोधन में कहा कि, आज के समय में लैंगिक संवेदनशीलता की समझ अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने आगे कहा कि शिक्षा के माध्यम से ही समाज में व्याप्त भेदभाव, असमानता और रूढ़ियों को दूर किया जा सकता है। समाज में समानता को स्वीकार करना चाहिए। 

छात्रों को संबोधित करते हुए अतिथि  

विद्यार्थियों को लिंग भेदभाव के प्रति जागरूक की दी प्रेरणा 
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. वर्णिका शर्मा, राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग, अध्यक्ष ने कहा कि समाज के समग्र विकास के लिए महिलाओं और पुरुषों को समान अधिकार एवं अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को लिंग भेदभाव के प्रति जागरूक रहने तथा समानता और सम्मान की भावना को अपनाने की प्रेरणा दी। गार्गी जैसी विदुषी महिला का जिक्र करते हुए कहा कि पुरातन काल में सलाह लेकर ही परिवार और समाज में उच्च दर्जा प्राप्त था। इन सात दिनों  कल्याण के लिए आवाज उठनी चाहिए। बौद्धिक ज्ञान पहले भी था आज भी है ,संवेदना के लिए अपने बच्चों को संस्कारित करें। 

डॉ. मनीष श्रीवास्तव ने अपने विचार किए व्यक्त 
डॉ मनीष श्रीवास्तव, प्राध्यापक, अंग्रेजी, गुरु घासीदास विवि ने लिंग संवेदनशीलता, महिलाओं के अधिकार, सामाजिक समानता और शिक्षा के महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए। लिंग संवेदनशीलता केवल एक सामाजिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह मानवीय मूल्यों और समाज के संतुलित विकास से जुड़ा हुआ विषय है।   लैंगिक समानता के उदाहरण पहले भी थे। उपनयन संस्कार का अधिकार, शिक्षा का अधिकार प्राचीन काल से समान था। आधुनिक समय में बदलाव क्यूं हुआ यह विचार आवश्यक है। 

विशिष्ट अतिथि विद्या राजपूत ने बताई आपबीती 
विशिष्ट अतिथि विद्या राजपूत ने अपने जीवन के संघर्ष को बताते हुए कहा कि, हर स्थान पर थर्ड जेंडर का हर्जाना चुकाना पड़ा। हमारा मन अलग है, तन अलग है, इस वजह से समस्या का सामना करना पड़ता है। घर परिवार समाज और शिक्षा जगत,खेल के मैदान हर जगह परेशानी झेलना पड़ता है। मैं महिला बनना चाहती थीं लेकिन समाज ने मुझे पुरूष और स्त्री के बीच खड़ा किया। अंत में कहां कि मैं थर्ड जेंडर हूं इसका मुझे गर्व है। 

कार्यक्रम में आये हुए अतिथि  

FDP कार्यक्रम में प्रश्न-उत्तर सत्र किया गया आयोजित 
FDP कार्यक्रम के दौरान प्रश्न-उत्तर सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और विषय से संबंधित अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने यह संकल्प लिया कि वे अपने जीवन में समानता, सम्मान और सहयोग की भावना को अपनाएंगे। एफडीपी कार्यक्रम में आनलाइन 160 लोग जुड़े। डॉ. मुक्ता मल्होत्रा ने धन्यवाद ज्ञापन किया। 

ये वरिष्ठ रहीं उपस्थित 
रुसा प्रभारी डॉ के के हैरिस, सदस्य डॉ. रागिनी पांडे, डॉ. रितु मारवाह तथा आयोजक सदस्य डॉ. प्रमिला नागवंशी, डॉ. प्रतिभा साहू के साथ सभी प्राध्यापक उपस्थित रहे।