आकाश पवार- पेंड्रा। मरवाही वन मंडल अंतर्गत पिपरिया क्षेत्र की तिपान नदी इन दिनों अवैध रेत उत्खनन और परिवहन का गढ़ बन गई है। हालात यह हैं कि दिन में मशीनों और मजदूरों की हलचल रहती ही है, वहीं देर रात तक ट्रैक्टरों की आवाज़ से नदी का सीना छलनी किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि दर्जनों ट्रैक्टर और मजदूर खुलेआम नदी से रेत निकाल रहे हैं, लेकिन रोकने-टोकने वाला कोई नहीं दिखता।
ग्रामीणों के मुताबिक, जिम्मेदार वनकर्मियों की कथित लापरवाही और रेत तस्करों से सांठगांठ की चर्चाएँ भी क्षेत्र में तेज हैं। यही कारण है कि रेत माफिया के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि नदी में रेत को लेकर आपसी विवाद की नौबत तक आ रही है। खनिज और वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों के सामने ही धड़ल्ले से अवैध उत्खनन और परिवहन किया जा रहा है।
बेतहाशा खुदाई से गड्ढों में तब्दील हुई नदी
बेतहाशा खुदाई से नदी के बीच कई फीट गहरे गड्ढे बन चुके हैं। कभी सालभर पानी से भरी रहने वाली तिपान नदी अब अपने अस्तित्व के संकट से जूझ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह लगातार रेत निकासी से गर्मी के मौसम में जलस्तर तेजी से नीचे चला जाता है, जिससे वन क्षेत्र के वन्यजीवों के लिए पेयजल संकट खड़ा हो सकता है।
सैकड़ों ट्रैक्टरों के जरिये हो रहा अवैध परिवहन
बताया जा रहा है कि यहां से रोजाना सैकड़ों ट्रिप रेत ट्रैक्टरों के जरिए शहरों तक पहुंचाई जा रही है, जहां इसे ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है। हालांकि वन विभाग द्वारा कभी-कभार औपचारिक कार्रवाई की जाती है, लेकिन वह नाकाफी साबित हो रही है। यदि समय रहते इस पर सख्ती नहीं हुई तो आने वाले दिनों में न केवल तिपान नदी, बल्कि पूरे वन क्षेत्र के जल स्रोतों पर गंभीर खतरा मंडरा सकता है। अब देखना यह है कि प्रशासन अवैध रेत उत्खनन में लगे ट्रैक्टरों और तस्करों पर कब तक ठोस कार्रवाई करता है, या फिर नदी यूं ही लुटती रहेगी।