छत्तीसगढ़ में नई पहल : अफ्रीका से पहुंची प्रवासी पक्षी व्हिंब्रेल ने तीन दिन रुकने के बाद ओडिशा के लिए भरी उड़ान

Migratory bird Whimbrel
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प्रवासी पक्षी व्हिंब्रेल
छत्तीसगढ़ में प्रवासी पक्षियों के अध्ययन में यह एक महत्वपूर्ण कड़ी निभाएगा, क्योंकि पहली बार जीपीएस लगे पक्षी को ट्रैक किया गया है।

विनोद नामदेव - गंडई। छत्तीसगढ़ के जलाशय में पहली बार जीएसएम-जीपीएस लगे प्रवासी पक्षी व्हिंब्रेल को देखा गया है। यह मूलतः उत्तरी अमेरिका और उत्तरी यूरोप का पक्षी है। उसके टैग से पता चलता है कि यह प्रवासी पक्षी पूर्वी अफ्रीका के मेडागास्कर के पास स्थित एक द्वीप से आया है। बेरला के मोहभट्टा जलाशय में तीन दिन रूकने के बाद इस प्रवासी पक्षी ने 487 किलोमीटर की उड़ान भर अब उड़ीसा लैड की है।

इस पक्षी को खैरागढ़- छुईखदान-गंडई जिला के सीमावर्ती क्षेत्र, जिला बेमेतरा के बेरला ब्लाक अंतर्गत, गिधवा परसदा वेटलैंड समीप, मोहभट्टा ग्राम की जलाशय में प्रकृति पर्यावरण प्रेमी, बर्ड वाचर बीएफओ योगेश कोर्राम जो वर्तमान में बीट गार्ड के पद पर पैलीमेटा क्षेत्र में पदस्थ है एवं बीएफओ उर्वशी कोर्राम ने इस पक्षी को रिकॉर्ड किया और उसकी तस्वीरें लीं।

छह हजार किमी उड़ सकती है व्हिंब्रेल

यह पक्षी कई महासागर और महाद्वीप को पार करने में माहिर है। उत्तरी गोलार्ध से 4,000 से 6,000 किलोमीटर तक उड़ना व्हिंबेल के लिए आम बात है। 40-46 से.मी. साइज का यह व्हिंबेल पक्षी घुमावदार चोंच और धारीदार सिर के साथ आसानी से शिकार कर लेता है। पानी के आसपास पाए जाने वाले सभी कीड़े मकोड़े इसका आहार होते हैं।

सुरक्षित प्रजनन के लिए तलाश

छत्तीसगढ़ में प्रवासी पक्षियों के अध्ययन में यह एक महत्वपूर्ण कड़ी निभाएगा, क्योंकि पहली बार जीपीएस लगे पक्षी को ट्रैक किया गया है। प्रवासी पक्षियों के आने जाने के रास्ते में छत्तीसगढ़ महत्वपूर्ण स्थान रखता है। व्हिंबेल का मिलना इस बात को प्रमाणित करता है। सैटेलाइट के माध्यम से इस पक्षी का अध्ययन जारी हैं। यह जानने का प्रयास किया जा रहा है कि यह पक्षी प्रजनन के लिए कहां जाता है। उम्मीद कि यह फिर से छत्तीसगढ़ वापस आएगा। छत्तीसगढ़ को प्रवासी पक्षियों के लिए एक सुरक्षित स्थल बनाया जा सकता है। इसके लिए जल निकायों को संरक्षित रखने की आवश्यकता है।

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