महादेव ऐप घोटाला : जांच पहुंची पान दुकान तक, पुलिस अफसर वहीं पहुंचकर करता था वसूली

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ईओडब्ल्यू  की नोटिस पर रायपुर साइबर में निरीक्षक के पद पर तैनात रह चुके पुलिस अधिकारी गिरीश तिवारी से लगातार दो दिन तक पूछताछ चली है।

रायपुर। ऑनलाइन बेटिंग एप महादेव सट्टा को संरक्षण देने वाले पुलिस अधिकारियों की परेड अब ईओडब्ल्यू ऑफिस में शुरू हो गई है। ईओडब्ल्यू की नोटिस पर रायपुर साइबर में निरीक्षक के पद पर तैनात रह चुके पुलिस अधिकारी गिरीश तिवारी से लगातार दो दिन तक पूछताछ चली है। गिरीश तिवारी का नाम निलंबित एएसआई चंद्रभूषण वर्मा और सटोरिए सतीश चंद्राकर ने अपने बयान में उगला है। इसके गिरीश तिवारी को ईओडब्ल्यू में तलब किया गया। वर्तमान में गिरीश तिवारी बीजापुर जिले में पदस्थ है। वहीं ईओडब्ल्यू की पूछताछ में पता चला है कि रायपुर के नगर घड़ी चौक में शहीद वीर नारायण सिंह कांप्लेक्स में स्थित एक पान दुकान में हर महीने महादेव सट्टा की रकम लेने गिरीश तिवारी जाया करता था। यहां पर चंद्रभूषण वर्मा और सतीश चंद्राकर उसे रकम दिया करते थे।

अभी यह स्पष्ट नहीं है कि पूरे लेनदेन में पान दुकान संचालक की भूमिका थी या नहीं। लेकिन ई ओडब्ल्यू पान दुकान संचालक को भी तलब करने की तैयारी में है। ईओडब्ल्यू सूत्रों के अनुसार, निरीक्षक गिरीश तिवारी का नाम ईडी की जांच में भी आया था। इसके अलावा विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने एक वीडियो जारी किया था। इस वीडियो में शुभम सोनी नामक सटोरिया जो की स्वयं को महादेव एप का प्रमोटर बता रहा था। उसने भी गिरीश तिवारी के नाम का जिक्र वीडियो में किया था। अब ईओडब्ल्यू की जांच में भी गिरीश तिवारी की भूमिका स्पष्ट नजर आने लगी है। गिरीश तिवारी से शनिवार और रविवार दो दिन तक दस दस घण्टे लगातार पूछताछ हुई है। एएसपी स्तर के अधिकारी ने गिरीश तिवारी से पूछताछ किया है। इसमें चंद्रभूषण वर्मा और सतीश चंद्राकर से हर महीने की जाने वाली वसूली की राशि और उसके बंटवारे के ब्यौरे मांगे गए है।

आमने सामने बिठाकर हुई पूछताछ

अभी ईओडब्ल्यू ऑफिस में महादेव सट्टा से जुड़े आरोपी चंद्रभूषण वर्मा, सतीश चंद्राकर, सुनील दम्मानी भीम सिंह यादव और अमित अग्रवाल रिमांड पर है। इसमें से चंद्रभूषण, सतीश और सुनील दम्मानी ने गिरीश तिवारी से सीधे संबंध होने की बात कबूली है। इसके बाद तीनों आरोपियों को बारी बारी से गिरीश तिवारी के साथ बिठाकर आमने सामने पूछताछ हुई है। इसमें भी तीनों आरोपियों ने कब कब गिरीश तिवारी को रकम दिया उसका ब्यौरा प्रस्तुत किया। लेकिन गिरीश तिवारी ने आरोपियों को पहचानने और रकम लेने से इंकार किया है।

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