यशवंत गंजीर- कुरुद। जहां पूरा देश रंगोत्सव की तैयारियों में जुटा है, वहीं छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले का एक छोटा सा गांव ‘सेमरा (सी)’ समय की परिधि को लांघकर इतिहास रचने जा रहा है। यहाँ की परंपरा के अनुसार, आज गांव में विधि-विधान से होलिका दहन किया जाएगा और कल यानी बुधवार को ग्रामीण एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर फाग गीतों की धुन पर थिरकेंगे।
रहस्यमयी परंपरा और आस्था
सेमरा गांव में होली का त्यौहार मुख्य तिथि से ठीक एक सप्ताह पहले मनाने की यह परंपरा सदियों पुरानी है। ग्रामीणों के अनुसार, गांव के आराध्य 'सिरदार देव' ने पूर्वजों को स्वप्न में आदेश दिया था कि गांव को प्राकृतिक आपदाओं, महामारियों और अनहोनी से बचाने के लिए सभी त्यौहार निर्धारित समय से सात दिन पूर्व मनाए जाएं। तब से लेकर आज तक, आधुनिक पीढ़ी भी इस अलिखित नियम का पूरी श्रद्धा से पालन कर रही है।
यह अटूट विश्वास का है प्रतीक
गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि एक बार कुछ लोगों ने मुख्य तिथि पर त्यौहार मनाने का प्रयास किया था, जिसके परिणाम स्वरूप गांव में बीमारियां और अकाल जैसी स्थितियां उत्पन्न हो गई थीं। इसी भय और अटूट आस्था के कारण, आज भी यहाँ होलिका दहन के साथ ही रंगोत्सव की शुरुआत हो जाती है। इस दौरान गांव की विवाहित बेटियां विशेष रूप से अपने मायके आती हैं और पूरा क्षेत्र उत्सव के रंग में डूब जाता है। सेमरा की यह अनोखी रीत न केवल छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि कैसे आस्था के धागे आज भी समाज को एकजुट रखे हुए हैं।