यशवंत गंजीर- कुरुद। छत्तीसगढ़ के कुरुद में केंद्र सरकार द्वारा पारित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को लेकर कुरुद क्षेत्र में सकारात्मक माहौल देखने को मिल रहा है। स्थानीय महिला जनप्रतिनिधियों का मानना है कि, यह अधिनियम देश की राजनीति में एक ऐतिहासिक और संरचनात्मक बदलाव की शुरुआत साबित हो सकता है, जो महिलाओं को केवल भागीदारी ही नहीं, बल्कि नेतृत्व की मुख्यधारा में स्थापित करेगा।
लोकतंत्र को संतुलित बनाने की दिशा में ठोस कदम
नगर पालिका अध्यक्ष ज्योति भानू चंद्राकर और जनपद पंचायत अध्यक्ष गीतेश्वरी हेमंत साहू ने इस कानून का स्वागत करते हुए कहा कि, 33 प्रतिशत आरक्षण महिलाओं को योजनाओं के लाभार्थी तक सीमित नहीं रखेगा, बल्कि उन्हें नीति निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाने का अवसर देगा। उनका कहना है कि, वर्षों से लंबित यह पहल अब लोकतंत्र को अधिक समावेशी और संतुलित बनाने की दिशा में ठोस कदम है।
महिलाओं की भागीदारी में उल्लेखनीय हुई वृद्धि
उन्होंने छत्तीसगढ़ में पहले से लागू 50 प्रतिशत महिला आरक्षण का उदाहरण देते हुए बताया कि इससे ग्रामीण और शहरी स्तर पर महिलाओं की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसी अनुभव के आधार पर यह उम्मीद जताई जा रही है कि, राष्ट्रीय स्तर पर भी यह कानून प्रभावी परिणाम देगा। यदि यह व्यवस्था 2029 के चुनावों तक लागू होती है, तो संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की संख्या में बड़ा इजाफा देखने को मिल सकता है।
महिलाओं के आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता को नई दिशा
महिला जनप्रतिनिधियों ने यह भी कहा कि, महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, सुरक्षा और स्वच्छता जैसे मुद्दों को नीति निर्धारण में अधिक प्राथमिकता मिलेगी। साथ ही, यह अधिनियम महिलाओं के आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता को नई दिशा देगा। स्थानीय स्तर पर इस पहल को ‘सशक्त नारी-सशक्त भारत’ की दिशा में एक मजबूत और दूरगामी कदम माना जा रहा है, जो आने वाले समय में देश की राजनीति की तस्वीर बदल सकता है।
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