जशपुर जिले में फेयरवेल पार्टी के बाद छात्रों ने चलती कार में दरवाजे पर लटककर शराब के साथ खतरनाक स्टंट किए। स्टंटबाजी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल।

अजय सूर्यवंशी- जशपुर। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में छात्रों का स्टंटबाजी करते हुए वीडियो सामने आया है। फेयरवेल पार्टी की मस्ती कब मौत के बुलावे में बदल सकती है, इसका अंदाज़ा शायद इन छात्रों को भी नहीं था। लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हुआ यह वीडियो प्रशासन और अभिभावकों, दोनों के लिए गंभीर समस्या बन गया है।

चलती कार में स्टंटबाज़ी करते छात्रों का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि, कुछ युवक कार के दरवाज़े पर लटककर जानलेवा स्टंट कर रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि, स्टंट के दौरान एक युवक हाथ में शराब की बोतल लहराते हुए दिखाई दे रहा है।

फेयरवेल पार्टी के बहाने स्टंटबाजी 
बताया जा रहा है कि, यह घटना स्कूल में आयोजित फेयरवेल पार्टी के बाद की है, जहां से निकलते वक्त छात्रों ने सड़क पर यह खतरनाक हरकत की। वायरल वीडियो जशपुर जिला के किनकेल गांव का बताया जा रहा है। 

फेयरवेल पार्टी के नाम पर हुड़दंग
विद्यालयों में होने वाले विदाई समारोह सहित अन्य आयोजनों में अब छात्र स्टंटबाजी करते हुए रील नहीं बना सकेंगे। उन्हें अपने शिक्षकों की निगरानी में ही विदाई समारोह जैसे आयोजन करने होंगे। छत्तीसगढ़ राज्य बालक अधिकार संरक्षण आयोग ने लोक शिक्षण छत्तीसगढ़ राज्य संचालनालय, समस्त जिला कलेक्टरों और जिला शिक्षा अधिकारियों को इस संबंध में कड़े निर्देश जारी करने खत लिखा है। यह व्यवस्था बीते दिनों छात्रों के वायरल हुए वीडियो के बाद की गई है। कवर्धा के एक विद्यालय में फेयरवेल पार्टी के दौरान छात्रों का एक वीडियो फरवरी माह में वायरल हुआ। जिसमें छात्र-छात्राएं गाड़ियों पर स्टंट करते नजर आए। 

ऐसे आयोजनों के लिए स्पष्ट प्रोटोकॉल तय किया जाए
बालक अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम 2005 की धारा 13 एवं 15 के तहत आयोग ने अनुशंसा करते हुए लिखा है, यदि विदाई समारोह या अन्य आयोजन बच्चों की ओर से किए जा रहे हो, तो इसकी पूर्व सूचना शाला प्रबंधन को देना अनिवार्य हो। ऐसे आयोजनों के लिए स्पष्ट प्रोटोकॉल तय किया जाएं और समारोह शिक्षकों की निगरानी में गरिमामय तरीके से आयोजित हों। शाला प्रबंधन यह सुनिश्चित करे कि किसी भी प्रकार के जोखिम भरे करतब न हों। 

स्वाभाविक है झुकाव आयोग ने अपने खत में किशोरावस्था के दौरान
आने वाले स्वभावगत परिवर्तन के विषय में भी अवगत कराया है। आयोग के मुताबिक, किशोरावस्था में रोमांच और साहसिक कार्यों के प्रति झुकाव स्वाभाविक है, लेकिन इससे बच्चों के अनमोल जीवन को खतरा नहीं पहुंचना चाहिए। यदि समय रहते रोक नहीं लगाई गई, तो ऐसे कृत्य भविष्य में एक गलत परंपरा का रूप ले सकते हैं। आयोग ने इस तरह की घटनाएं सामने आने पर संबंधित शाला प्रमुख को नोटिस जारी कर कारण पूछे जाने और भविष्य के लिए व्यवस्था करने कहा है।

20 फरवरी तक उपलब्ध करानी होगी जानकारी
दूसरी ओर, पुलिस पदाधिकारियों से स्कूलों में जाकर बच्चों को गंभीरता और स्नेह के साथ समझाइश देने की भी अनुशंसा की गई है। आयोग ने सभी संबंधित अधिकारियों से कहा है कि इन अनुशंसाओं पर की गई कार्यवाही की लिखित जानकारी 20 फरवरी तक आयोग को उपलब्ध कराई जाए। छात्रों में रील्स के प्रति बढ़ते झुकाव और गैंग कल्चर को देखते हुए मंगलवार को ही  रायपुर में शाला प्राचार्यों की बैठक पुलिस द्वारा ली गई थी। इसमें उन्हें बच्चों की सुरक्षा संबंधित विस्तृत दिशा-निर्देश दिए गए थे।