उद्यानिकी विवि : कुलपति के बाद सहायक प्राध्यापकों पर गिर सकती है गाज

Mahatma Gandhi Horticulture University
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उद्यानिकी विवि के कुलपति को उनके पद से हटाए जाने के बाद फर्जी तरीके से नियुक्त हुए सहायक प्राध्यापकों पर भी गाज गिर सकती है। 

रायपुर। महात्मा गांधी उद्यानिकी विवि के कुलपति को उनके पद से हटाए जाने के बाद फर्जी तरीके से नियुक्त हुए सहायक प्राध्यापकों पर भी गाज गिर सकती है। जिन सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति फर्जी तरीके से किए जाने के आरोपों के आधार पर कुलपति को पद से हटाया गया है, अब उन सहायक प्राध्यापकों पर भी कार्रवाई की तैयारी है। कुलपति को राजभवन द्वारा पिछले शुक्रवार आदेश जारी कर पद से हटाया गया था। विवि द्वारा बीते वर्ष दो चरणों में सहायक प्राध्यापकों के 36 पदों के लिए आवेदन मांगे गर थे। यूजीसी नियमों के अनुसार, सहायक प्राध्यापक पद पर नियुक्ति के लिए अभ्यर्थी का नेट क्वालिफाई होना और पीएचडी डिग्रधारी होना आवश्यक है।

सूत्रों के अनुसार प्राध्यापकों की योग्यता की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। कुलपति प्रो कुरील ने ऐसे अभ्यर्थियों को भी नियुक्ति प्रदान कर दी, जिनके पास पीएचडी डिगी नहीं थी। इनकी नियुक्ति इस वर्ष जनवरी माह में की गई थी। तब से ये प्राध्यापक के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। छात्र संगठनों द्वारा मर्ती घोटाले की शिकायत किए जाने के साथ ही भतीं प्रक्रिया पुनः प्रारंभ करने की भी मांग की गई थी। छात्र संगठनों के अलावा इन पदों के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों ने भी जांच की मांग की थी। कुलपति का पद रिक्त : डॉ कुरील को हटाए जाने के बाद संभागायुक्त डॉ. संजय अलंग को यहां का प्रभार दिया गया है। उद्यानिकी विवि के वर्तमान कुलपति की नियुक्ति 2022 में की गाई थी। बतौर कुलपति उनका तीन वर्ष से अधिक का कार्यकाल शेष था। अब विवि में कुलपति का पद रिक्त हो गया है।

पीएचडी धारियों ने भी किए थे आवेदन

एक वर्ष पूर्व अप्रैल माह में उद्यानिकी विवि द्वारा पहला आवेदन निकाला गया था। उस वक्त 3 पदों के लिए आवेदन मांगे गए। दूसरा विज्ञापन जुलाई में निकालते हुए 36 पदों के लिए आवेदन मांगे गए। इस तरह से कुल 39 पदों पर भर्ती होनी थी, लेकिन नियुक्ति सिर्फ 36 पदों पर हुई। ऐसा नहीं है कि इन पदों के लिए विवि को योग्य अभ्यर्थियों के आवेदन नहीं मिले। नेट उत्तीर्ण होने के साथ ही पीरचडी डिग्री धारियों ने भी इसके लिए आवेदन किया था, लेकिन उन्हें नजर अंदाज करते हुए गैर पीएचडी डिग्रीधारियों को नियुक्ति दे दी गई। मामला सामने आने के बाद अन्य आवेदनकर्ताओं ने भी विरोध किया था।

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