राजनांदगांव। मैरिज ब्यूरो के नाम पर देशभर में ठगी करने वाले गिरोह के फर्दाफाश होने के बाद उनसे जुड़ी जानकारी लगातार सामने आ रही है। बताया गया कि ठगी के लिए संचालित इस मैरिज ब्यूरो संचालकों द्वारा कॉल सेंटर के नाम पर ठगी के लिए लड़कियों को काम पर रखा जाता था। इन लड़कियों से हिंदी भाषा राज्यों के लोगों को फोन के माध्यम से शादी का झूठा प्रपोजल देकर जाल में फंसाया जाता था। ऐसे राज्यों को टारगेट किया जाता था, जहां हिंदी भाषा का उपयोग अधिक होता है।
बताया गया कि, ठगी के शिकार होने वाले लोगों में 22 साल से लेकर 60 साल तक की उम्र के लोग शामिल थे। पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार टीम अब इस मामले में और अधिक जानकारी जुटाने की कोशिश में लगी हुई है। बताया गया कि आरोपियों के बैंक स्टेटमेंट निकाली जा रही है। जिससे यह पता लगाया जा सके कि इन लोगों ने कितने लोगों से कितने रुपए की ठगी की है। मिली जानकारी के अनुसार गिरोह पिछले दो सालों से मैरिज ब्यूरो के नाम पर यह फ्रॉड कर रहा था। इस दौरान दर्जनों लोगों से ठगी की गई। ठगी के लिए पूरी प्रक्रिया तय की गई थी। जिसमें पहले लोगों को मैरिज ब्यूरो की वेबसाइट पर आईडी बनाने के बाद उन्हें लड़कियों की फोटो भेजी जाती थी, जिन लोगों द्वारा दिलचस्पी दिखाई जाती थी, उनको ठगी के जाल में फंसाने का काम किया जाता था।
पैकेज के अनुसार सुविधाएं
बताया गया कि मैरिज ब्यूरो में बकायदा पैकेज तय किए गए थे। जिसमें गोल्डन पैकेज के लिए 50 हजार और प्लेटिनम पैकेज के लिए 75 हजार रुपए की रकम तय थी। इसके अलावा रजिस्ट्रेशन, प्रोफाइल वेरिफिकेशन, ई-केवाईसी के नाम पर भी चार्ज लिए जाते थे। इसके अलावा लड़कियों की तस्वीरे पसंद आने के बाद उनसे मीटिंग फिक्स कराने और मुलाकात के लिए रेस्टोरेंट में बुकिंग के नाम पर भी पैसे लिए जाते थे।
बनाए थे फर्जी रिश्तेदार
मैरिज ब्यूरों में पहले लड़कियों की तस्वीरें भेजने के लिए, लड़कों से पैसे ऐंठने के लिए, लड़कियों के फर्जी रिश्तेदार बनाकर भी बात कराया करते थे। हालांकि कभी भी लड़कियों से लड़कों को मिलाया नहीं जाता था। लड़कों को लड़कियों की लोकेशन भी उनके आसपास के शहरों की ही बताई जाती थी। जिससे वह दिलचस्पी लेकर रिश्ते के लिए आगे बढ़े।
पंद्रह लड़कियों का था स्टॉफ
मैरिज ब्यूरो में कॉल कर लोगों से बात करने के लिए लगभग 15 लड़किया रखी गई थी। इन लड़कियों को रखने से पहले बकायदा उनका इंटरव्यू लिया जाता था। बताया गया कि महीने के पांच हजार रुपए वेतन और बाकी उन्हें कस्टमर के अनुसार हिस्सा दिया जाता था। ऐसी लड़कियों को काम पर रखा जाता था, जो आर्थिक रूप से कमजोर हो। जिससे उन्हें पैसे का लालच देकर यह ठगी का काम कराया जा सके।
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