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श्यामकिशोर शर्मा- नवापारा-राजिम। छत्तीसगढ़ का प्रयागराज कहलाने वाले नवापारा-राजिम क्षेत्र में शुक्रवार को तापमान 46 डिग्री के करीब रहा। मानो पूरा शहर अंगारे की भांति झुलसता रहा। दोपहर ढाई बजे नाक, कान और मुंह में गमछा बांधकर जब शहर भ्रमण के लिए निकले तो पंडित दीनदयाल उपाध्याय चौक से नगर पालिका चौक तक एक परिंदा तक नजर नहीं आया।
शहरवासियों की मानें तो दशकों बाद महसूस किया कि, तापमान अब सहन से बाहर हो गया। कुछ बड़े बुजुर्गो से दिन ढलने के बाद बस स्टेण्ड के पास मुलाकात हुई। उनसे पूछा गया कि गर्मी का क्या हाल है? तड़ाक से जवाब मिला बहुत बुरा हाल है। शायद अब इतना अधिक गर्मी को सहन करने की क्षमता शरीर में नहीं रह गई है। कमोवेश बस स्टेण्ड में लगी यात्री गाड़ियों के सवारी, आटो वाले, फल दुकान लगाने वालों ने चर्चा करते हुए बताया कि, वे दोपहर 1 बजे से साढ़े तीन बजे तक बस स्टेण्ड की केवल रखवाली करते रह हैं। एक आदमी सड़क में देखने को आज नहीं मिला। दोपहर में भ्रमण के दौरान बस स्टेण्ड और अन्य मार्गो पर जो तस्वीर हमने देखा उसे तुरंत कैच किया। जितने भी लोग मिले सारे के सारे अपने नाक, कान, मुंह को बांधकर चल रहे थे। पैदल चलने वाली लड़कियां भी पता नहीं इतनी तेज धूप और विकराल गर्मी के बीच कहां जा रही थीं।
शनिवार को नौतपा का आखिरी दिन
बहरहाल कल 2 जून को नौतपा जा रहा है और अब पंचक का खेला शुरू होगा जो पूरा पांच दिन ये भी जमकर कहर बरपाएगा। वाकई में इस साल के गर्मी ने लोगों को बुरी तरह से झुलसा कर घायल कर दिया है। मार्च से शुरू हुए गर्मी का कहर मई के आखिरी तक चला है। एक तरफ मानसून के केरल पहुंचने की खबर है तो दूसरी ओर प्रदेश में अभी भी विकराल तेज गर्मी है। जिससे लोग झुलस रहे हैं। मई जब खतम होता है तो लोगों की उम्मीदें बढ़ जाती है कि अब गर्मी गई और बरसात बिल्कुल करीब है परंतु इस साल की गर्मी लोगों के समझ से बाहर हो गया है। दिन तो दिन रात 10-11 बजे तक गरम हवाओं के थपेड़े लोगो को झेलना पड़ रहा है। शुक्रवार को टीवी चैनलो में लोगो ने देखा कि मानसून का केरल प्रवेश हो गया है तो किंचित राहत की सांस लिया गया है।
रोज 300 लीटर पानी राहगीरों के लिए करा रहे उपलब्ध
हरिभूमि के ब्यूरोचीफ श्यामकिशोर शर्मा परिवार ने तेज धूप और उबलती गर्मी को देखते हुए जार में 90 लीटर ठंडे पानी का इंतजाम राहगीरों के लिए मेन रोड में किया है। 1 अप्रेल से शुरू किया गया पानी का यह इंतजाम राहगीरों के लिए 30 जून तक जारी रहेगा जब तक कि बरसात नहीं लग जाएगी। अप्रेल में 90 लीटर की खपत सुबह साढ़े नौ बजे से शाम 7 बजे तक होती रही है। मई के लगते ही ये खपत 180 लीटर से 300 लीटर तक बन गई है। मेन रोड में किया गया पानी का यह इंतजाम रास्ते में चलने वाले राहगीरो,बस यात्रियों और आटो, रिक्शा तथा आस-पास के दुकानदारों, ठेले वालों, मोटर मैकेनिकों के लिए राहत का काम कर रहा है।
चिड़ियों का रखा जा रहा है ध्यान
श्रीमती कुमुदनी-सेजल शर्मा चिड़ियों के लिए प्रतिदिन मिट्टी के सकोरा में सुबह पानी भरते हैं, धान की बालियां और चांवल के दाने रखते हैं। शाम को गौ माता को धमेला में खाना परोस कर खिलाते है। शर्मा परिवार ने हर एक लोगो से आग्रह करते हुए कहा है कि बेजुबान पशु-पक्षियों के चारा-पानी के लिए जितना हो सके प्रयास जरूर करे और आने वाले बारिशकाल में पौधारोपण अधिक से अधिक करें।
