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रायपुर। प्रदेशभर के बिजली उपभोक्ताओं से ज्यादा लोड के लिए छत्तीसगढ़ पॉवर कंपनी भरपूर वसूली कर रही है। पहले उपभोक्ता अपना ज्यादा लोड बताते नहीं थे, लेकिन अब सीधे व्यवस्था यह हो गई है कि उपभोक्ता का लोड अगर तीन माह तक ज्यादा रहा, तो बिजली बिल के साथ ही एक किलोवाट के 944 रुपए के हिसाब से जुड़कर आ जाते हैं। उपभोक्ताओं से तो ज्यादा लोड होने पर पैसे लिए जा रहे हैं, लेकिन ट्रांसफार्मरों का ओवरलोड कभी भी चेक नहीं होता, जिसके कारण गर्मी में पूरे प्रदेश के शहरों से लेकर गांवों तक बिजली की खराबी आम बात है। एक बार बिजली गुल होने पर घंटों लग जाते हैं इसको ठीक करने में क्योंकि पॉवर कंपनी का अमला भी लाठी टेक है। बीते साल गर्मी में बहुत परेशानी हुई थी, इस बार भी गर्मी में ऐसा होना तय है।

पॉवर कंपनी को कुछ साल पहले यह शिकायत रहती थी कि उपभोक्ता बिजली का सही लोड नहीं बताते हैं जिसके कारण ट्रांसफार्मरों में सही लोड का पता नहीं चलता है और गर्मी में ट्रांसफार्मरों में खराबी आ जाती है। लेकिन अब पॉवर कंपनी यह शिकायत नहीं कर सकती है, क्योंकि अब पॉवर कंपनी ने यह नियम बना दिया है कि जिस भी उपभोक्ता का लोड बढ़ जाएगा, उसका लोड बढ़ाने के लिए बिजली बिल के साथ ही शुल्क जुड़ जाएगा।

एक किलोवाट के लिए 944 रुपए
घरेलू उपभोक्ता आमतौर पर एक से दो किलोवाट लोड का कनेक्शन लेते हैं। आज कल सिंगल फेज में ही पांच किलोवाट तक का उपयोग करने की मंजूरी होने के कारण कई उपभोक्ता सिंगल फेज कनेक्शन में दो से तीन एसी तक चला लेते हैं। ऐसे में तीन माह तक पॉवर कंपनी को जब लगता है कि किसी उपभोक्ता का लोड अब दो किलोवाट से बढ़कर तीन या फिर चार किलोवाट हो गया है तो एक किलो वाट के 944 रुपए के हिसाब से बिजली बिल में जुड़कर आ जाते हैं। इसमें 800 रुपए शुल्क और 18 फीसदी जीएसटी है।

ट्रांसफार्मर ओवरलोड देखने वाला कोई नहीं
पॉवर कंपनी उपभोक्ताओं से लोड के पैसे तो ले रही है, लेकिन ट्रांसफार्मरों का लोड कभी देखा ही नहीं जाता है। इसकी वजह से ही समस्या होती है। जानकार बताते हैं कि सौ किलोवाट के ट्रांसफार्मर से अगर दो किलो वाट के 50 कनेक्शन दिए गए हैं और बाद में अगर उपभोक्ताओं का लोड तीन से चार किलो वाट हो जाता है तो ऐसे ट्रांसफार्मर ओवरलोड हो जाते हैं। इनकी जांच करके या तो कनेक्शन कम करने का काम किया जाना चाहिए या फिर ज्यादा लोड वाला ट्रांसफार्मर लगाना चाहिए, लेकिन ये काम होते ही नहीं है। इसका नतीजा यह होता है कि ट्रांसफार्मर का डीओ गिर जाता है, कई बार जंपर कट जाता है। ऐसा होने से बिजली गुल होती है। कई बार बड़ा फाल्ट भी हो जाता और फीडर ही बंद हो जाते हैं।

अमला भी लाठी टेक
ओवरलोड या फिर किसी अन्य कारण कारण से अगर कहीं खराबी होती है तो उस खराबी का पता लगाने में ही पॉवर कंपनी के अधिकारियों का पसीना छूट जाता है, क्योंकि खराबी का पता लगाने के लिए पेट्रोलिंग करनी पड़ती है। इसमें खराबी को खोजने में कई बार घंटों लग जाते हैं। अगर किसी ने खराबी के बारे में जानकारी दे दी कि अमुक स्थान पर स्पार्किंग हुई है तो खराबी जल्द ठीक हो जाती है, नहीं तो फिर घंटों भुगतना ही पड़ता है। राजधानी रायपुर में ही खराबी के कारण बिजली का घंटों गुल होना आम बात है। कई फीडर भी कमजोर हैं।