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रायपुर। छत्तीसगढ़ में विष्णुदेव सरकार ने बलौदाबाजार हिंसा के बाद बड़ी कार्रवाई करते हुए कलेक्टर केएल चौहान और एसएसपी सदानंद को सस्पेंड कर दिया। साय सरकार की इस बड़ी बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई से पूरी ब्यूरोक्रेसी हिल गई है। गुरुवार रात 11.30 बजे दोनों अफसरों के निलंबन का आदेश जारी हुआ।
एंसा नहीं है कि, छत्तीसगढ़ में यह अपने तरह की पहली कार्यवाही हो, इससे पहले भी एक बार एसपी सस्पेंड हो चुके हैं। लेकिन ऐसा पहली बार हो रहा है कि, कलेक्टर- एसपी एक साथ एक ही मामले में सस्पेंड हुए हों। हालांकि, उन्हें एक दिन पहले ही जिले से हटाया गया था। इसलिए कलेक्टर और एसपी के तौर पर हुई चूक के लिए ही वे सस्पेंड हुए हैं। इससे पहले डॉ. रमन सिंह के दूसरे कार्यकाल के दौरान धमतरी के एसपी मोहंती हटा दिए गए थे। मुख्यमंत्री की सभा में हंगामा और पथराव की घटना के कारण एसपी को सस्पेंड क्या गया था।
राज्य बनने के बाद से 6 आईएएस सस्पेंड
छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद 24 साल में छह आईएएस सस्पेंड हो चुके हैं। मगर इनमें से लॉ एंड ऑडर के मामले में एक भी नहीं। क्योंकि ये सभी छह आईएएस तब फील्ड पोस्टिंग में नहीं थे। पांच आईएएस करप्शन के मामले में और एक सरकार के खिलाफ बयान देने के मामले में सस्पेंड हुए थे। 1987 बैच के आईएएस अजयपाल सिंह ने पयर्टन विभाग के सचिव रहते अपने ही विभागीय मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के खिलाफ पुराने मंत्रालय में प्रेंस कांफ्रेंस लिया था। इसके बाद रमन सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया। बाद में उन्हें फोर्सली रिटायर कर दिया गया। इनके अलावा राधाकृष्णन, पी. राघवन, बीएल अग्रवाल, समीर विश्नोई और रानू साहू निलंबित हैं। इन पांचों के खिलाफ करप्शन के मामले में कार्रवाई हुई।
4 आईपीएस निलंबित
छत्तीसगढ़ में अब तक जो 4 आईपीएस अधिकारी निलंबित हुए हैं, इनमें अविनाश मोहंती, मुकेश गुप्ता, रजनेश सिंह और जीपी सिंह शामिल हैं। अविनाश मोहंती और सदानंद के खिलाफ लॉ एंड ऑर्डर के केस में एक्शन लिया गया था, जबकि, मुकेश गुप्ता, रजनेश सिंह और जीपी सिंह सियासी कारणों से सस्पेंड किए गए।
तीन आईएएस, आईपीएस पर हुई बड़ी कार्रवाई
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा सस्पेंड करने के बाद अविनाश मोहंती ने प्रदेश ही छोड़ दिया। उन्होंने अपना कैडर चेंज करवा लिया। आईएएस अजय पाल सिंह और बीएल अग्रवाल को स्टेट रिव्यू कमेटी की सिफारिश पर डीओपीटी ने फोर्सली वीआरएस दे दिया। आईपीएस जीपी सिंह को रिव्यू कमेटी की अनुशंसा पर भारत सरकार ने रिटायर किया था। पर उन्हें कैट से स्टे मिल चुका है और उनकी फाइल राज्य सरकार की अनुशंसा के साथ भारत सरकार को भेजी जा चुकी है। किसी भी दिन उनकी पोस्टिंग का आदेश आ सकता है।
सस्पेंशन का नुकसान
आईएएस, आईपीएस के सस्पेंशन के बाद उनके खिलाफ चार्ज शीट फ्रेम किया जाता है। विभागीय कार्रवाई की जाती है। जांच में दोषी पाए जाने पर मेजर पनिशमेंट भी दिया जाता है। आईपीएस तो कई बार दोषी पाए गए हैं जबकि आईएएस के मामले कम ही हैं। दोषी पाए जाने पर सर्विस बुक में भी उनके नाम दर्ज होते हैं। सस्पेंशन का सबसे बड़ा नुकसान सामाजिक प्रतिष्ठा का होता है। अफसर की गलती हो या न हो सालों तक चर्चा होती रहती है।
