haribhoomi hindi news
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का 21 फरवरी को जन्म दिवस है। जशपुर जिले के गांव बगिया से पहली बार पंच के रूप में निर्वाचित होने वाले श्री साय ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में जो मुकाम हासिल किया है। 

रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का 21 फरवरी को जन्म दिवस है। जशपुर जिले के गांव बगिया से पहली बार पंच के रूप में निर्वाचित होने वाले श्री साय ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में जो मुकाम हासिल किया है वह बेमिसाल है। श्री साय ने तत्कालीन अविभाजित मध्यप्रदेश में सन् 1989 में बगिया ग्राम पंचायत के पंच के रूप में अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। सांसद के रूप में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करने वाले श्री साय केंद्रीय मंत्रिमंडल का हिस्सा भी रहे हैं और अपनी सहज सरल छवि के बूते प्रदेश के पहले निर्वाचित अदिवासी मुख्यमंत्री बने। 

विष्णु देव साय छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री और मध्यभारत के वरिष्ठ आदिवासी नेता हैं। उन्होंने 13 दिसंबर 2023 को छत्तीसगढ़के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण किया। वे छत्तीसगढ़ के पहले आदिवासी मुख्यमंत्री हैं। उनकी छवि सौम्य, सरल, सहृदय तथा जनकल्याण के लिए दृढ़ और त्वरित निर्णय लेने वाले कुशल प्रशासक की है। आदिवासी मुद्दों को लेकर वे छत्तीसगढ़ के साथ-साथ मध्यप्रदेश, ओडिशा, तेलांगाना तथा महाराष्ट्र में भी सक्रिय रहे हैं। विष्णु देव साय का जन्म 21 फरवरी 1964 को छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के फरसाबहार विकासखण्ड के ग्राम बगिया में हुआ। उनके पिता स्वर्गीय रामप्रसाद साय और माता जसमनी देवी साय हैं। विष्णु देव साय का विवाह 27 मई 1991 को कौशल्या देवी साय से हुआ। उनके एक पुत्र और दो पुत्रियां हैं। विष्णु देव साय ने जशपुर जिले के कुनकुरी से अपनी हायर सेकेण्डरी की शिक्षा पूरी की।

राजनीतिक विरासत
विष्णु देव साय आदिवासी कंवर समाज से आते हैं। वे मूलतः किसान परिवार से है उनका परिवार लंबे समय से राजनीति से जुड़ा हुआ है। परिवार के राजनीतिक अनुभवों का लाम श्री साय को मिला है। उनके बड़े पिताजी स्वः नरहरि प्रसाद साय एवं स्व केदारनाथ साथ की पहचान कुशल राजनेताओं के रूप में रही है। स्वर्गीय नरहरि प्रसाद साय सन 1962 से 1967 तक लैलूंगा विधानसभा क्षेत्र एवं सन 1972 से सन 1977 तक बगीचा विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे। इसके बाद 1977 से 1979 तक वे सांसद तथा भारत सरकार में केंद्रीय संचार राज्य मंत्री रहे। विष्णु देव साय के दादा स्वर्गीय बुधनाथ साय भी सन् 1947 से 1952 तक विधायक रहे।

आदिवासी समाज के लिए योगदान
विष्णु देव साथ की सामाजिक कार्यों में गहरी रुचि तथा सक्रियता रही है। उन्होंने आदिवासी समाज की शिक्षा तथा आधिवासी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाजों के विकास की दिशा में अनेक कार्य किए हैं। उन्होंने विशेष पिछड़ी जनजातियों के जीवनस्तर में सुधार के लिए लगातार कार्य किया। श्री साय भगवान श्रीराम के प्रति अगाध श्रद्धा रखते हैं। वे प्रलोभनपूर्वक अथवा बल-छल पूर्वक धर्मान्तरण के विरोधी हैं। श्री साय ने हायर सेकंडरी तक की पढ़ाई की है। चौथी कक्षा की पढ़ाई के दौरान ही उनके पिता का निधन हो गया। मां जसमनी देवी और दो छोटे भाइयों ओम प्रकाश साय तथा विनोद साय के भरण-पोषण की जिम्मेदारी विष्णु देव साय के कंधों पर आ गई। हायर सेकंडरी के बाद वे आगे की पढ़ाई जारी नहीं रख पाए। उन्होंने खेती-किसानी को पारिवार की आजीविका का माध्यम बनाया। इसी दौरान वे भारतीय जनता पार्टी के नेता और तत्कालीन सांसद स्व. दिलीप सिंह जूदेव के संपर्क में आए। श्री साय स्व. दिलीप सिंह जूदेव को अपना राजनीतिक मार्गदर्शक मानते हैं।

बगिया से पंच के रूप में राजनीतिक शुरुआत
श्री साव ने तत्कालीन अविताजित मध्यप्रदेश में सन् 1989 में बगिया ग्राम पंचायत के पंच के रूप में अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। सन 1990 में ग्राम पंचायत बगिया के निर्विरोध उरपंच चुने गए। 1990 में पहली बार तपकरा विधानसमा क्षेत्र से विधायक बने। किष्णु देव साय सन् 1990 से सन 1998 तक तत्कालीन मध्यप्रदेश के तपकरा विधानसभा क्षेत्र से दो बार विधायक रहे। रायमद लोकसमा क्षेत्र से सन् 1999 से लगातार 4 बार सांसद चुने गए। सन 1999 में 13वीं  लोकसभा, 2004 में 14वीं लोकसभा, सन् 2009 में 15वीं लोकसभा और 2014 में 16वीं लोकसभा के सदस्य के रूप में उन्होंने उल्लेखनीय कार्य किए। विष्णु देव साय ने 27 मई 2014 से 2019 तक केन्द्रीय राज्य मंत्री के रूप में इस्पात, खान, श्रम व रोजगार मंत्रालय का प्रभार संभाला। वर्ष 2006 में वे भारतीय जनता पार्टी के छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए। सन् 2020 से 2022 तक उन्होंने पुनः भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के रूप में दायित्वों का निर्वहन किया। 02 दिसंबर 2022 को वे भाजपा राष्ट्रीय कार्यसमिति में विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में सम्मिलित किए गए। 08 जुलाई 2023 को वे भाजपा की राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य बनाए गए।

7