रायपुर। न्यायालय स्वयं को समाज से पृथक नहीं कर सकते। जो न्यायालय स्वयं को सीमित कर लेता है वह अप्रासंगिक होने का जोखिम उठाता है। प्रत्येक न्यायाधीश को अपने दायित्व में एक संरक्षक के रूप में दृढ़ रहना चाहिए। प्रत्येक न्यायाधीश को सिद्धांतों में अडिग, आचरण में संतुलित और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा में तत्पर होना चाहिए। रायपुर पहुंचे चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया व्यायमूर्ति सूर्यकांत ने ये बातें रविवार को कही। वे यहां हिदायतुल्ला विधि विवि के दीक्षांत समारोह में शामिल होने के लिए पहुंचे थे।
इस दौरान उनके लिए छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय द्वारा अभिनंदन समारोह का आयोजन किया गया था। न्यायाधीश के दायित्वों पर चर्चा करने के साथ उन्होंने कहा छग उच्च न्यायालय को दंतेवाड़ा, बस्तर, सरगुजा और राज्य के प्रत्येक जिले तक अपनी दृष्टि और संवेदनशीलता का विस्तार करना चाहिए, जहां न्याय की अपेक्षा है।
सम्मान आत्मचिंतन का अवसर
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, सम्मान के अवसर सामूहिक गौरव के क्षण होते हैं। ये संस्थाओं को एक-दूसरे को गहराई से समझने का अवसर प्रदान करते हैं। ये केवल कृतज्ञता ही नहीं, बल्कि आत्मचिंतन के भी अवसर होते हैं। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश नरसिम्हा तथा प्रशांत मिश्रा एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में एन्यायमूर्ति रमेश सिन्हा उपस्थित रहे। छग राज्य न्यायिक अकादमी की ई-स्मारिका का डिजिटल विमोचन भी इस दौरान किया गया। 'नर्चरिंग द फ्यूचर ऑफ द ज्यूडिशियरी शीर्षक वाले इस डिजिटल प्रकाशन में 2003 में अपनी स्थापना के बाद से अब तक अकादमी उत्कृष्टता को स्थान दिया गया है। न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने कहा, ई-स्मारिका छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी की परिवर्तनकारी यात्रा को सुंदर रूप में प्रस्तुत करती है।
न्यायालय रक्षा करने वाले आधुनिक किले
चीफ जस्टीस ऑफ इंडिया ने छत्तीसगढ़ के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि यह राज्य भारत की विविधता का लघु रूप है। "छत्तीसगढ़" नाम का पारंपरिक अर्थ "36 किले की भूमि" माना जाता है। ये किले केवल रक्षा संरचनाएं नहीं थे, बल्कि शासन प्रशासन और सामुदायिक जीवन के केंद्र थे। वे केवल सैन्य शक्ति से नहीं बल्कि जिन मूल्यों की रक्षा करते थे उनसे सुदृढ़ बने रहे। संवैधानिक न्यायालयों को लोकतंत्र के आधुनिक किलों के रूप में देखा जा सकता है। वे भूभाग की नहीं, अधिकारों की रक्षा करते हैं, वे सीमाओं की नहीं, बल्कि सत्ता की संवैधानिक मर्यादाओं की रक्षा करते हैं। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के समस्त न्यायमूर्तिगण, तेलंगाना उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति पी. सैम कोशी, विधि विभाग के प्रमुख सचिव, रजिस्ट्रार जनरल, रजिस्ट्री के अधिकारीगण, रायपुर जिला के न्यायाधीशगण एवं उच्च न्यायालय के कर्मचारीगण की उपस्थिति रही।
अधिवक्ता समुदाय के लिए प्रेरणा
छग उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने न्यायमूर्ति का स्वागत करते हुए कहा, सीजेआई की संवैधानिक मूल्यों तथा न्यायिक निष्पक्षता के प्रति गहन प्रतिबद्धता संपूर्ण न्यायिक समुदाय को प्रेरित करती है। उनकी उपस्थिति छत्तीसगढ़ की न्यायपालिका के लिए गौरव और प्रेरणा के स्रोत हैं। वहीं, न्यायमूर्ति प्रशांत मिश्रा का व्यक्तित्व विधि के शासन के प्रति समर्पण का प्रतीक है। उनका उच्च न्यायालय से जुड़ाव स्थानीय न्यायाधीशगण और अधिवक्ता समुदाय को निरंतर प्रेरित करता है।