A PHP Error was encountered
Severity: Warning
Message: Undefined variable $summary
Filename: widgets/story.php
Line Number: 3
Backtrace:
File: /content/websites/front-hbm/application/views/themes/mobile/widgets/story.php
Line: 3
Function: _error_handler
File: /content/websites/front-hbm/application/views/themes/amp/story.php
Line: 39
Function: view
File: /content/websites/front-hbm/application/libraries/Sukant.php
Line: 507
Function: view
File: /content/websites/front-hbm/application/libraries/Sukant.php
Line: 341
Function: loadAmpTheme
File: /content/websites/front-hbm/application/controllers/Content.php
Line: 303
Function: contentStorypageAmp
File: /content/websites/front-hbm/index.php
Line: 319
Function: require_once
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने तलाक के एक मामले की सुनवाई के दौरान पत्नी का गैर मर्द से संबंध बनाने को मानसिक क्रूरता बताया है। हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि, पत्नी का गैर मर्द से संबंध बनाना पति के लिए मानसिक क्रूरता है। विवाह में मानवीय भावनाएं शामिल होती हैं। यदि भावनाएं सूख जाएं तो उसके जीवन में वापस आने की संभावना नहीं होती है।
मिली जानकारी के अनुसार, अपीलकर्ता की शादी 1 मई 2003 को हिंदू रीति रीवाज से शादी हुई थी। शादी के बाद उनको तीन संतान हुई और पति काम को लेकर बाहर चले गया था। वापस लौटने के बाद उसने पत्नी को गैर मर्द के साथ असहज स्थिति में देखा। जिसके बाद पति के शोर मचाने पर परिवार के अन्य सदस्य भी आ गए और उस व्यक्ति को पुलिस को सौंप दिया गया। जहां पुलिस ने सॉफ्ट कॉर्नर अपनाते हुए कार्रवाई करने की बजाय पति को भविष्य में शांति से रहने की समझाइश देकर भेज दिया।
फैमिली कोर्ट से ख़ारिज होने के बाद खटखटाया हाईकोर्ट का दरवाजा
वर्ष 2017 में उसकी पत्नी अपने बच्चों को लेकर अपने पुरुष मित्र के साथ रहने चली गई। पति उसे लेने गया लेकिन उसने आने से इंकार कर दिया। इस पर पति ने परिवार न्यायालय में तलाक के लिए आवेदन दिया। परिवार न्यायालय से आवेदन खारिज होने पर पति ने हाईकोर्ट में अपील दायर की। जहां जस्टिस गौतम भादुड़ी और जस्टिस राधाकिशन अग्रवाल की डबल बेंच ने सुनवाई की। डबल बेंच ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अपने आदेश में कहा कि पत्नी ने व्यभिचारी कृत्य की है, जो कि क्रूरता के समान है। वैवाहिक बंधन में गंभीरता की आवश्यकता होती है। विवाह में मानवीय भावनाएं शामिल होती है और भावनाएं यदि सूख जाएं तो शायद ही जीवन में आने की कोई संभावना नहीं बचती है।
वर्ष 2017 से रह रहे हैं अलग
पत्नी ने पुलिस के सामने यह स्वीकार किया कि, वह व्यक्ति उसका स्कूल और कॉलेज के समय से बॉयफ्रेंड है। दोनों विवाह करना चाहते थे लेकिन दोनों की जाति अलग होने की वजह से विवाह नहीं हो सका। उसने उक्त व्यक्ति से संबंध होने की बात भी स्वीकार की है। दोनों वर्ष 2017 से अलग-अलग रह रहें हैं और यह विवाह विघटित हो चूका है। इसे किसी भी परिस्थिति में पुनर्जीवित नहीं किया जा सकता है। जिसके बाद हाईकोर्ट ने पति की अपील को स्वीकार कर लिया है।
