बिजली व्यवस्था में बदलाव : मीटर का मैटर हो या बत्ती गुल, समय पर नहीं सुधरा तो हर दिन मिलेगा 500 रुपए हर्जाना

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मीटर जलने पर शहरों में 24 घंटे और गांवों में 72 घंटे में बदलकर नया लगाना होगा। साथ ही मीटर की रीडिंग हर माह करनी होगी। 

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग ने विद्युत वितरण में निष्पादन संबंधी मानक विनियम-2020 में बदलाव किया है। अब मीटर संबंधी शिकायत आने पर जैसे की मीटर जलने पर शहरों में 24 घंटे और गांवों में 72 घंटे में बदलकर नया लगाना होगा। साथ ही मीटर की रीडिंग हर माह करनी होगी। अगर इस काम में देर हुई तो पहले महीने के लिए उपभोक्ता को 500 रुपए और उसके बाद के माह के लिए 1000 रुपए प्रतिकर देना होगा। शहर में अगर फ्यूज ऑफ कॉल (बिजली गुल) चार घंटे हुआ और ग्रामीण क्षेत्र में 24 घंटे तक गई तो भी हर दिन के लिए उपभोक्ता को 500 रुपए प्रतिकर (हर्जाना) देना होगा।

छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग ने इस संबंध में एक अधिसूचना का प्रकाशन अपनी वेबसाइट पर किया है। यह विनियम छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (विद्युत वितरण निष्पादन हेतु मानक) प्रथम संशोधन विनियम- 2024 कहलाएगा। यह विनियम 1 अप्रैल से पूरे छत्तीसगढ़ के लिए प्रभावशील हो चुका है। आयोग के सचिव एसपी शुक्ला ने कहा है कि इस संबंध में अधिसूचना के प्रकाशन के लिए भेजा गया है, साथ ही आयोग की वेबसाइट पर डाला गया है, ताकि वह उपभोक्ताओं की जानकारी के लिए उपलब्ध हो।

24 से 72 घंटे में मीटर बदलना होगा

जले हुए मीटर के मामले में वितरण लायसेंसी द्वारा मीटर को एक समयावधि के भीतर बदला जाएगा। यह काम ए श्रेणी के शहरों और शहरी क्षेत्रों में 24 घंटे में और ग्रामीण क्षेत्रों में 72 घंटे में करना होगा। इसी तरह फ्यूज ऑफ कॉल (बिजली गुल) के मामले में कहा गया है कि एक संवर्ग के शहर एवं नगरीय क्षेत्रों में चार घंटे तथा ग्रामीण क्षेत्र में 24 घंटे बिजली गुल रही तो प्रभावित उपभोक्ता को हर दिन के लिए 500 रुपए प्रतिकर देना होगा। इसी तरह लाइन ब्रेक डाउन, माईनर ब्रेक डाउन 6 घंटे से मेजर ब्रेक डाउन 24 घंटे ए संवर्ग के शहरों एवं नगरीय क्षेत्रों में होता है तथा माइनर ब्रेकडाउन 12 घंटे या मेजर ब्रेकडाउन ग्रामीण क्षेत्र में दो दिन तक होता तो भी उपभोक्ता को हर दिन के 500 रुपए देने होंगे।

मीटर खराब हो तो

आयोग की अधिसूचना के मुताबिक मीटर संबंधी शिकायत होने के बाद वितरण लायसेंसी त्रुटिपूर्ण, बिना कार्यरत (बंद धीमे एवं तेजी से चलने) मीटर की पहचान के लिए निरीक्षण किया जाएगा। यह निरीक्षण ए संवर्ग के शहरों क्षेत्रों में चार दिन, नगरीय क्षेत्र में सात दिन, ग्रामीण क्षेत्र में 12 दिन की समयसीमा में किया जाएगा। खराबी का पता लगने पर वितरण लायसेंसी द्वारा मीटर को बदला जाएगा। शहरों और नगरीय क्षेत्रों में यह काम 24 घंटे तथा ग्रामीण क्षेत्रों में 72 घंटे से अधिक नहीं होगा। यदि मीटर प्रथम दृष्टया दोषपूर्ण या जला या चोरी पाया जाता है, जिसका कारण उपभोक्ता नहीं तो लायसेंसी को आयोग द्वारा दी गई समयसीमा के भीतर अपनी लागत पर नए मीटर के माध्यम से आपूर्ति बहाल करनी होगी। यदि जांच के बाद पाया जाता है कि उपभोक्ता के जिम्मेदार कारणों से मीटर खराब हो गया है, जल गया या चोरी हो गया है तो उसका शुल्क उपभोक्ता से वसूला जाएगा।

लो-वोल्टेज आने पर ये प्रावधान

भार में कमी (लो वोलटेज) होने पर आगामी बिलिंग माह के पहले दिन से प्रभावशील होगा। ऐसे में उपभोक्ता को हर दिन के लिए 500 रुपए हर्जाना देने का प्रावधान किया गया है। अगर उपभोक्ता को बिजली बिल नहीं मिला हो तो उसकी शिकायत के तीन दिन के अंदर उसे बिल देना होगा। अगर ऐसा नहीं किया तो भी उपभोक्ता के 500 रुपए हर दिन के लिए देने होंगे। नए कनेक्शन या अतिरिक्त प्रभार का आवेदन के मामले में सामान्य कनेक्शन (सभी श्रेणी) एस. संवर्ग के शहर सहित सभी नगरीय क्षेत्रों में 7 दिन में तथा ग्रामीण क्षेत्र में 15 दिन में सेवा देनी होगी, वरना हर एक दिन की देरी के लिए उपभोक्ता को 500 रुपए हर्जाना देना होगा। निम्नदाब कृषि कनेक्शन के लिए संपूर्ण व्यय का भुगतान करने के बाद 90 दिन में देना होगा, ऐसे मौसम में जहां खेत में पहुंच उपलब्ध हो। ऐसे मौसम में जहां खेत में पहुंच उपलब्ध न हो, के समय कृषि कनेक्शन विस्तार के लिए संपूर्ण व्यय का भुगतान करने के बाद 180 दिनों में देना होगा। उल्लंघन की स्थिति में उपभोक्ता के प्रतिदिन के लिए 500 रुपए हर्जाना देना होगा।

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