रायपुर। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार द्वारा संपत्ति की गाइडलाइन दरों में किया गया संशोधन राज्य की रियल एस्टेट व्यवस्था में वर्षों बाद आया सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण परिवर्तन है। 2017-18 के बाद पहली बार दरों की व्यापक समीक्षा कर उन्हें वर्तमान बाजार वास्तविकता के करीब लाया गया, जिससे जमीन-मकान की कीमतों में स्थिरता, पारदर्शिता और निवेश माहौल में सुधार देखने को मिल रहा है। नई नीति ने भूमि मूल्यांकन को वैज्ञानिक और आधुनिक बनाकर खरीदारों से लेकर किसानों और डेवलपर्स तक सभी को सीधा लाभ पहुंचाया है।
पुरानी व्यवस्था की चुनौती: दरें बाजार से बहुत पीछे थीं
पिछले कई वर्षों तक गाइडलाइन दरों के अद्यतन न होने से रजिस्ट्री मूल्य और वास्तविक बाजार मूल्य के बीच भारी अंतर बन गया था। इससे जमीन अधिग्रहण के दौरान किसानों को कम मुआवजा मिलता था और बैंक लोन मूल्यांकन भी जमीन की वास्तविक क्षमता को प्रतिबिंबित नहीं कर पाता था। पुराने ढाँचे के कारण पारदर्शिता की कमी बढ़ी और लेन-देन में अनौपचारिक भुगतान जैसी स्थितियाँ आम हो चुकी थीं। राज्य का रियल एस्टेट बाजार इस असंतुलन की वजह से सही ढंग से विकसित नहीं हो पा रहा था।
साय सरकार का सुधार: वैज्ञानिक सर्वे के आधार पर नई दरें लागू
सरकार ने जिलेवार बिक्री आँकड़ों, राजस्व रिकॉर्ड, मार्केट डेटा और वास्तविक ग्राउंड सर्वे के आधार पर दरों का पुनर्निर्धारण किया। 20 नवंबर 2025 से लागू हुई नई दरों में ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों को बाज़ार के अनुकूल बनाए जाने पर जोर दिया गया। ग्रामीण इलाकों में कई स्थानों पर 100 प्रतिशत से अधिक संशोधन किया गया, जबकि कुछ पिछड़े क्षेत्रों में 300 प्रतिशत तक समायोजन इस वजह से आवश्यक था, क्योंकि वहाँ पुरानी दरें वास्तविक कीमत का एक छोटा अंश भर थीं। शहरी क्षेत्रों में भी दरें अब बाजार मूल्य के करीब लाई गई हैं, जिससे रजिस्ट्री मूल्य और वास्तविक बिक्री मूल्य के बीच का अंतर काफी कम हुआ है।
अत्यधिक बढ़ोतरी पर त्वरित राहत
रायपुर और रायगढ़ जिलों के कुछ हिस्सों में दरों में 400-500 प्रतिशत तक भारी वृद्धि सामने आने पर जनता में चिंता देखी गई। इस पर सरकार ने तत्काल संज्ञान लेते हुए 30 जनवरी 2026 से राहत संशोधन जारी किया। सरकार ने मूल्य संरचना को संतुलित करते हुए वृद्धि को 100 प्रतिशत के औसत दायरे में स्थिर किया, जिससे न केवल खरीदारों का बोझ कम हुआ बल्कि पूरे बाजार में स्थिरता और विश्वास भी लौटा। यह कार्रवाई दर्शाती है कि सरकार सुधार के साथ जनभावनाओं और व्यवहारिक कठिनाइयों को भी बराबर महत्व देती है।
स्थिर हुई संपत्ति कीमतें
नई गाइडलाइन दरों से जमीन और मकान की कीमतों में वह अनियंत्रित बढ़ोतरी थमी है जो पिछले वर्षों में लगातार देखी जा रही थी। रजिस्ट्री मूल्य वास्तविक बाजार मूल्य के करीब आने से खरीदारों के लिए लेन-देन अधिक सहज और स्पष्ट हो गया है। रियल एस्टेट एसोसिएशनों के अनुसार, नई दरों के बाद राज्य में प्लॉट और हाउसिंग यूनिट्स की डिमांड में 12-17 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है, जो बाजार में लौटे विश्वास का संकेत है। रजिस्ट्री के मामले में भी अब कम अंतर और अधिक पारदर्शिता देखी जा रही है।
किसानों को अधिक मुआवजा
पुरानी दरों के कारण अधिग्रहण के दौरान किसानों को जो हानि होती थी, वह नई व्यवस्था में काफी हद तक समाप्त हो गई है। दरें वास्तविक मूल्य के करीब आने से किसानों को परियोजनाओं के लिए ली जाने वाली जमीन पर अधिक और उचित मुआवजा मिलने की संभावना बढ़ी है। राजस्व और अधिग्रहण विभागों के प्रारंभिक आकलन बताते हैं कि संशोधित दरों के बाद मुआवजा औसतन 25-40 प्रतिशत तक अधिक हो सकता है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देगा।
लोन स्वीकृति हुई आसान
नई गाइडलाइन दरों से संपत्ति के सरकारी मूल्यांकन में जो सुधार आया है, उसका सीधा फायदा बैंकिंग सेक्टर को मिल रहा है। बैंक अब गाइडलाइन दरों को जमीन के वास्तविक मूल्य के करीब पाकर ऋण स्वीकृति में सटीकता ला पा रहे हैं। इससे होम लोन की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। संबंधित वित्तीय रिपोर्टों के अनुसार, संशोधन लागू होने के बाद राज्य में होम लोन स्वीकृतियों में लगभग 14 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
नई आवासीय परियोजनाओं को मिली रफ्तार
देवेलपर्स के लिए गाइडलाइन दरों का बाजार के अनुरूप होना बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इन्हीं दरों पर प्रोजेक्ट की DPR, कॉस्टिंग और फाइनेंशियल प्लानिंग आधारित होती है। संतुलित दरें अब प्रोजेक्ट फंडिंग और बैंक गारंटी की प्रक्रिया को सरल बना रही हैं, जिससे नई कॉलोनियों, टाउनशिप योजनाओं और आवासीय परियोजनाओं को गति मिल रही है। 2026 की पहली तिमाही में राज्यभर में नए प्रोजेक्ट रजिस्ट्रेशन में 22 प्रतिशत वृद्धि दर्ज होना इसी परिवर्तन का प्रमाण है।
राजस्व और शहरी विकास पर सकारात्मक असर
नई दरों के संतुलित ढाँचे से राज्य को मिलने वाला राजस्व भी अधिक स्थिर हुआ है। इससे सड़कों, जल आपूर्ति, बिजली और शहरी विस्तार जैसी परियोजनाओं के लिए वित्तीय उपलब्धता बढ़ी है। संतुलित गाइडलाइन संरचना सरकार को बेहतर योजना, मजबूत बजट और अधिक विकास-केंद्रित नीति लागू करने में मदद कर रही है।
निवेश-अनुकूल, पारदर्शी और संतुलित भूमि व्यवस्था की ओर बड़ा कदम
छत्तीसगढ़ सरकार का यह निर्णय सिर्फ रजिस्ट्री प्रक्रियाओं को आसान बनाने भर का कदम नहीं है, बल्कि यह राज्य की भूमि प्रबंधन प्रणाली को आधुनिक और पारदर्शी बनाने का व्यापक प्रयास है। नई गाइडलाइन दरों ने खरीदार, किसान, बैंक, डेवलपर्स और प्रशासन—सभी को समान रूप से लाभान्वित किया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार इसे विकास और सुशासन के बड़े स्तंभ के रूप में देख रही है, जो आने वाले वर्षों में रियल एस्टेट और शहरी विकास को नई दिशा देने वाला साबित होगा।