रायपुर। राज्य के चर्चित तीन हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के शराब घोटाले में सीबीआई ने पहली बार आबकारी विभाग के तत्कालीन विशेष सचिव तथा छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कार्पोरेशन लिमिटेड (सीएसएमसीएस) के पूर्व प्रबंध संचालक अरुणपति त्रिपाठी तथा उनकी पत्नी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का अपराध दर्ज किया है। सीबीआई ने एफआईआर में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत केस दर्ज किया है।
सीबीआई जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, उसके अनुसार वर्ष 2013 में एपी त्रिपाठी की कुल संपत्ति 38.08 लाख रुपए थी, जो वर्ष 2023 में बढ़कर 3.32 करोड़ रुपए हो गई। सीबीआई जांच में सामने आया है कि एपी त्रिपाठी ने इन 10 वर्षों में अपनी पत्नी मंजुला त्रिपाठी के साथ मिलकर वैध आय से करीब 4.91 करोड़ रुपए से अधिक संपत्ति अर्जित की, जो उनकी ज्ञात आय से लगभग 54.53 प्रतिशत ज्यादा है ।
सीबीआई जांच में हुआ खुलासा
सीबीआई जांच में खुलासा हुआ है कि जांच अवधि (1 फरवरी 2013 से 22 दिसंबर 2023) के दौरान दंपत्ति की कुल आय करीब नौ करोड़ रुपए रही, जबकि उनका खर्च 10.97 करोड़ रुपए से अधिक पाया गया। इस खर्च में विदेशी लेन-देन, म्यूचुअल फंड निवेश, कार्पोरेट निवेश और अन्य निजी व्यय शामिल हैं, जो घोषित आय से मेल नहीं खाते। पूछताछ में त्रिपाठी इन विसंगतियों का संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए।
दो साल बाद अपराध दर्ज
शराब घोटाले की जांच ईडी के बाद सीबीआई को 21 दिसंबर 2024 को ट्रांसफर की गयी। केस ट्रांसफर होने के दो साल बाद सीबीआई ने एपी त्रिपाठी तथा उनकी पत्नी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का अपराध दर्ज किया है। शराब घोटाला प्रकरण में सीबीआई के अफसर आबकारी विभाग के अफसरों से पूछताछ कर सकते हैं।
तीन दर्जन से अधिक अधिकारी जांच के दायरे में
इस कार्रवाई के बाद तीन दर्जन से अधिक अधिकारी जांच के दायरे में हैं। इससे पहले ईओडब्ल्यू-एसीबी की जांच में पूर्व मुख्य सचिव विवेक ढांड, पूर्व आईएएस अनिल टूटेजा, निरंजन दास समेत करीब 70 लोगों को आरोपी बनाया जा चुका है। इनमें से कई अधिकारियों पर छापेमारी, पूछताछ और गिरफ्तारी की कार्रवाई भी हो चुकी है।
कई शहरों में चल-अचल संपत्ति
जांच एजेंसियों के दावों के मुताबिक एपी त्रिपाठी का रायपुर के लाभांडी क्षेत्र में फ्लैट, नया रायपुर के प्रीमियम गोल्फ कोर्स इलाके में संपत्ति, दुर्ग जिले में जमीन, भिलाई में मकान, आभूषण और बैंक बैलेंस समेत कई चल अचल संपत्तियां हैं।
सिंडिकेट के मास्टरमाइंड
इंडियन टेलिकॉम सर्विस से प्रतिनियुक्ति पर छत्तीसगढ़ आए अरुणपति त्रिपाठी पर आरोप है कि उन्होंने वर्ष 2019 से 2023 के बीच सरकारी शराब दुकानों के माध्यम से अवैध शराब बिक्री को बढ़ावा दिया और पूरे सिंडिकेट के संचालन में अहम भूमिका निभाई। शराब खरीदी करने से लेकर शराब आपूर्ति करने तथा बिक्री करने में एपी त्रिपाठी की प्रमुख भूमिका रही है।
तीन दर्जन से अधिक अधिकारी जांच के दायरे में
इस कार्रवाई के बाद तीन दर्जन से अधिक अधिकारी जांच के दायरे में हैं। इससे पहले ईओडब्ल्यू-एसीबी की जांच में पूर्व मुख्य सचिव विवेक ढांड, पूर्व आईएएस अनिल टूटेजा, निरंजन दास समेत करीब 70 लोगों को आरोपी बनाया जा चुका है। इनमें से कई अधिकारियों पर छापेमारी, पूछताछ और गिरफ्तारी की कार्रवाई भी हो चुकी है।
(छत्तीसगढ़ के जिले, कस्बे और गांवों की खबरों के लिए हरिभूमि का "ई-पेपर" पढ़ें। यहां क्लिक करें "epaper haribhoomi" या प्लेस्टोर से "हरिभूमि हिंदी न्यूज़" App डाउनलोड करें।)