रायपुर। राज्य सरकार के वित्त विभाग ने राज्य योजनाओं के लिए स्टेट सिंगल नोडल एजेंसी (एस-एसएनए) मॉडल का क्रियान्वयन करने का आदेश जारी किया है। खास बात ये है कि एस-एसएनए द्वारा यह सुनिश्चित किया जाएगा कि ई कोष से जारी राशि आवश्यकता आधारित हो, वास्तविक उपयोग से जुड़ी हो, किस्तों में जारी की जाए और एडवांस में राशि जमा न की जाए। राशि को सावधि जमा यानी फिक्स डिपाजिट, फ्लैक्सी, टर्म डिपाडिट या किसी अन्य खाता या ब्याज अर्जित करने वाले साधनों में जमा नहीं किया जाएगा। एस-एसएनए का बचत खाता एक स्वी या फ्लेक्सी होगा।
वित्त ने जारी किया आदेश
राज्य योजनाओं के संबंध में वित्त विभाग ने शासन के समस्त विभाग, राजस्व मंडल बिलासपुर, सभी संभागीय आयुक्त, सभी कलेक्टरों, सभी विभागाध्यक्ष और सभी कलेक्टरों को इस निर्देश से अवगत कराया है। राज्य के 12 विभागों से कहा गया है कि वे 30 अप्रैल 2026 तक एस-एसएनए मॉडल क्रियान्वित किये जाने के लिए संबंधितों को निर्देशित करें।
बिना जरूरत नहीं निकाल सकते राशि
वित्त के निर्देश में विशेष रूप से कहा गया है कि छत्तीसगढ़ कोषालय संहिता भाग-एक के सहायक नियम 284 के अनुसार "कोई भी राशि कोषालय से तब तक आहरित नहीं की जाएगी जब तक कि तत्काल संवितरण किया जाना आवश्यक न हो। मांग की प्रत्याशा में या बजट अनुदानों को व्यपगत होने से बचाने के लिए कोषालय से अग्रिम निकालना एक गंभीर अनियमितता है।
बैंकों में राशि बेकार पड़ी रहती है
इसी निर्देश में यह भी कहा गया है कि भारत सरकार द्वारा केन्द्र प्रवर्तित योजनाओं के लिये जस्ट इन टाइम प्रणाली पर आधारित एसएनए-स्पर्श मॉडल लागू किया गया है, जिससे इन योजनाओं में अग्रिम आहरण पर नियंत्रण संभव हो सका है। वर्तमान में विभिन्न राज्य पोषित योजनाओं के क्रियान्वयन के लिये राशि कोषालय से आहरित कर बैंक खातों में रखी जाती है। अग्रिम आहरण के कारण अप्रयुक्त राशि बैंक खातों में बेकार पड़ी रहती है।
सीएस ने दिए हैं ये निर्देश
वित्त विभाग ने कहा है कि मुख्य सचिव द्वारा निर्देश दिये गये हैं कि केन्द्र प्रवर्तित योजनाओं की भांति राज्य पोषित योजनाओं के लिए भी जस्ट इन टाइम प्रणाली पर आधारित मदर चाइल्ड अकाउंट व्यवस्था लागू की जाए। राज्य शासन द्वारा समय-समय पर वित्तीय प्रक्रियाओं में सुधार हेतु निर्देश किये जाते हैं। इसी परिप्रेक्ष्य में राज्य शासन के ध्यान में आया है कि सरकारी निधियों, जब लंबे समय तक बैंक खातों में अप्रयुक्त रहती हैं, तो वे भारतीय रिजर्व बैंक के डीइएफ में स्थानांतरित हो जाती हैं अथवा निष्क्रय (दो वर्ष तक संचालन न होने पर) हो जाती है। राज्य के वित्तीय अनुशासन को सुदृढ़ करने तथा राज्य योजनाओं के लिए पारदर्शी, कुशल एवं प्रभावी निधि-प्रवाह सुनिश्चित करने के लिए सिंगल नोडल एजेंसी (एस-एसएनए) मॉडल लागू किया जा रहा है।
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