एक शिक्षण संस्थान का बिल पास करने के एवज में रिश्वत लेने के दोषी पाए गए श्रम निरीक्षक को राज्य सरकार ने सेवा से बर्खास्त करने का आदेश जारी किया है।

रायपुर। एक शिक्षण संस्थान का बिल पास करने के एवज में रिश्वत लेने के दोषी पाए गए श्रम निरीक्षक को राज्य सरकार ने सेवा से बर्खास्त करने का आदेश जारी किया है। आदेश में सरकार ने कहा है कि समस्त तथ्यों की परिस्थितियों का अध्ययन करने से स्पष्ट होता है कि  सुरेश कुर्रे का कृत्य जिसके लिये उन्हें दोषसिद्ध माना है, उन्हें शासकीय सेवा में रहना अशोभनीय बना देता है। रिश्वत लेने के दोषी सुरेश कुर्रे, श्रम आयुक्त संगठन के अंतर्गत कार्यालय श्रम पदाधिकारी जिला कोण्डागांव में श्रम निरीक्षक के पद पर पदस्थ थे, इसी दौरान का यह मामला वर्ष 2019 का है। 

सुरेश कुर्रे पर एक एनजीओ द्वारा संचालित प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के 6.30 लाख रुपये के लंबित बिल को पास करने के बदले 1.90 लाख रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप था। एन्टी करप्शन ब्यूरो ने 14 अक्टूबर 2019 को जाल बिछाकर उन्हें 40,000 रुपये की पहली किस्त लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा था। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) के तहत विशेष प्रकरण क्रमांक 01/2021 में यह दोषसिद्धि हुई है। मामले में विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) जशपुर (छ०म०) द्वारा पारित निर्णय दिनांक 26 नवंबर 2025 के अंतर्गत दोषसिद्ध कर 03 वर्ष के कठोर कारावास एवं 50 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया गया है।

सेवा में बना रहना अशोभनीय
श्रम पदाधिकारी की बर्खास्तगी के आदेश में लिखा गया है कि समस्त तथ्यों की परिस्थितियों का अध्यन करने से स्पष्ट होता है कि सुरेश कुर्रे का कृत्य जिसके लिये उन्हें दोषसिद्ध माना है. उन्हें शासकीय सेवा में रहना अशोभनीय बना देता है, न्यायालय द्वारा दिया गया महादेश गंभीर आरोप भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 एवं संशोधन अधिनियम 2018 के धारा 7 के सबंध में है, जो तुच्छ प्रकृति का नहीं है, जिसके लिये अभियुक्त पर लघु शास्ति अधिरोपित की जा सके

इसलिए कर रहे हैं बर्खास्त
आपराधिक प्रकरण के निर्णय जिसमे अभियुक्त कर्मचारी को 3 वर्ष के कठोर कारावास एवं 50 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया गया है, जो गंभीर कदाचरण का कृत्य है, को देखते हुए अभियुक्त कर्मचारी सुरेश कुर्रे, श्रम निरीक्षक, कार्यालय श्रम पदाधिकारी जिला कोण्डागांव को उनकी सेवा से पदच्युत (डिसमिस) किया जाता हैं। 

विभागीय जांच की जरूरत भी नहीं
आदेश में कहा गया है कि आरोप का कृत्य छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण नियंत्रण तथा अपील) नियम 1965 वो नियम 3(9) एवं (3) के अंतर्गत कदाचरण का कृत्य है। न्यायालय के निर्णय के प्रकाश में भ्रष्टाचार के कदाचरण के कृत्य के लिये अभियुक्त कर्मचारी सुरेश कुर्रे पर छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के नियम 10 में प्रावधानिक दीर्घ शास्ति अधिरोपित किया जाना उचित है। छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण नियंत्रण तथा अपील) 1906 के नियम 19 सहपठित नियम 14 एवं भारत के संविधान के अनुच्छेद 311(2) के अंतर्गत अभिमुक्त कर्मचारी के विरुद्ध विस्तृत विभागीय जाँच आवश्यक नहीं है।