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बसंत राघव- बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के मानिकपुरी समाज के वरिष्ठ जनों एवं सद्गुरु कबीर गुरुद्वारा समिति के लोगों ने शीतलदास महंत पर अशांति फैलाने का आरोप लगाया है। समाज के लोगों ने बताया कि, लगभग पचास साल पहले रेलवे कर्मचारी रहे संनिष्ठ कबीरपंथी बाबूदास ने जन सहयोग से 5 जनवरी 1955 को बिलासपुर नगर निगम क्षेत्र सिरगिट्टी से जुड़े झोपडापारा कीर्तिनगर में सद्गुरु कबीर गुरुद्वारा की स्थापना की थी। चूंकि, गुरुद्वारा की भूमि रेल विभाग की थी। इसलिए इस निर्माण को अतिक्रमण मानते हुए बाबूदास के ऊपर विभागीय कार्यवाही की गई और उन्हें जेल भेजा गया।

लेकिन वे अपने संकल्प में बाबूदास अडिग रहे और अंततः सद्गुरु कबीर गुरुद्वारा के निर्माण को अंजाम तक पहुंचा ही दिया। 5 जनवरी को गुरुद्वारा स्थापना की अर्द्धशती वर्ष के उपलक्ष्य में भव्य आयोजन किया जाना प्रस्तावित है। उल्लेखनीय है कि, स्थापना के समय से समस्त बिलासपुर एवं दूरदराज के स्वजातीय कबीरपंथी दर्शन और पूजापाठ के लिए यहां आते रहे हैं। तब से समय- समय पर यहां चौंका आरती और सामाजिक बैठकें भी होती रही हैं। उदाहरणार्थ पुराने बैठकों की परंपरा के साथ- साथ 1977 में अंतरराष्ट्रीय कबीर धर्म नगर दामाखेडा में तात्कालीन पंथश्री गृंधमुनि नाम साहेब की प्रेरणा और आशीर्वाद तथा मार्गदर्शन में स्थापित भारतीय मानिकपुरी पनिका समाज के सप्तम घरघोडा अधिवेशन (23 से 25 फरवरी 1991) में निर्विरोध निर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. देवधर महंत के नेतृत्व में 23 फरवरी 1992 को  वृहद ऐतिहासिक सामाजिक सम्मेलन इसी गुरुद्वारा में आयोजित हुआ। 

राष्ट्रीय कार्यकारिणी का किया गया मनोनयन 

जहां सामाजिक उत्थान हेतु गहन विचार विमर्श के उपरांत राष्ट्रीय कार्यकारिणी का मनोनयन भी किया गया। इसी तारतम्य में समाज के गौरव डॉ. चरणदास महंत के तात्कालीन मध्यप्रदेश सरकार में मंत्री बनने पर उनके सम्मान में इसी गुरुद्वारा में भव्य सामाजिक सम्मेलन आयोजित किया गया। जिसमें उनका सम्मान एवं अभिनंदन भी किया गया। इसी तरह सामाजिक संविधान संशोधन बाबत विशाल बैठक भी कालांतर में इसी गुरुद्वारा में ही आयोजित हुई। अन्य सामाजिक कार्यक्रमों और बैठकों का सिलसिला यहां निरंतर चलता रहा है। प्रतिवर्ष कबीर जयंती समारोह भी यहां धूमधाम से मनाया जाता रहा है।

समिति में डाली फूट 

नगर विधायक और तात्कालीन नगरीय प्रशासन मंत्री अमर अग्रवाल द्वारा गुरुद्वारा के पुनर्निर्माण एवं विस्तार हेतु लगभग 12 लाख की राशि स्वीकृत की गई।उसी राशि से गुरुद्वारा का पुनर्निर्माण एवं विस्तार भी किया गया। लेकिन सामाजिक पदाधिकारी होने का धौंस दिखाकर शीतलदास महंत द्वारा भारी कमीशनखोरी की बातें भी छन- छनकर द्वारा सामने आयीं। मिली जानकारी के अनुसार, उसी राशि से शीतलदास महंत द्वारा भारतीय नगर में जमीन खरीदकर मकान बनवाया गया था। लेकिन दैवयोग से उसके भी बिक जाने की भी जानकारी मिली है। गुरुद्वारा को दुधारू गाय समझकर उक्त शीतलदास महंत द्वारा गुरुद्वारा प्रबंधक समिति में धीरे- धीरे कब्जा करने एवं गुटबंदी कराने का कुत्सित प्रयास किया गया। अंततः एक समिति को फूट कराकर बांटने में वह सफल भी हो गया।

नारायणदास को चुना गया नया अध्यक्ष 

अभी हाल ही में नारायणदास को सद्गुरु कबीर गुरुद्वारा समिति का अध्यक्ष चुना गया। जिस पर शीतलदास गुट द्वारा आपत्ति एवं विवाद की स्थिति निर्मित की गई। इसलिए कबीरपंथ की विचारधारा के अनुरूप सामाजिक एकता और सौहार्द्र स्थापित करने का प्रयास वरिष्ठ सामाजिक जनों, स्थानीय पार्षद तथा रेलवे के चीफ मटेरियल मैनेजर नवीनसिंह द्वारा किया गया। इसलिए सर्वसम्मत निर्वाचन हेतु गुरूद्वारा परिसर में विगत 22 दिसंबर को नवीन सिंह सी.एम. एम. रेलवे, अजय यादव पार्षद, डॉ. देवधर महंत, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष, डॉ. फूलदास महंत, राष्ट्रीय महासचिव पनिका महासमिति, समाजसेवी डॉ. मानिक दास मानिकपुरी गुरुद्वारा लिंगियाडीह तथा युवा कार्यकर्ता दिनेश दीवान की पहल एवं सहभागिता में दोनों पक्षों से राय मशविरा कर उनकी सहमति से सर्व सम्मत कार्यकारिणी निर्वाचन हेतु पांच -पांच प्रतिनिधि चयनित किए गए। गंभीर विचार मंथन उपरांत दोनों पक्षों के समन्वय से गुरुद्वारा के उत्थान हेतु उत्तमदास को अध्यक्ष, सरस्वती देवी, मुकेशदास, परमेश्वरदास को उपाध्यक्ष, बबलू दास को सचिव, असीमदास को कोषाध्यक्ष तथा शंकरदास को सहसचिव निर्वाचित किया गया।

समाज के नाम पर लोगों से फ्रॉड करने का आरोप 

समन्वय समिति द्वारा सर्वसम्मति से निर्वाचित पदाधिकारियों की घोषणा के उपरांत बेलतरा निवासी शीतलदास, उसके पुत्र और उसके गुट के लोगों द्वारा  उक्त सर्वसम्मत निर्वाचन को ठेंगा बताते हुए उद्दंडतापूर्वक शांतिभंग कर अप्रिय स्थिति निर्मित करने का प्रयास किया गया। उक्त शीतलदास महंत द्वारा मनमाने ढंग से समानांतर समिति घोषित करते हुए कतिपय समाचार पत्रों में तदाशय का भ्रामक प्रकाशन करवाते हुए तरह- तरह से विवाद उत्पन्न करने का षड्यंत्र किया जा रहा है। ताकि, गुरुद्वारा प्रबंधक समिति में एकता न बन पाए और उसकी रोजी- रोटी पर आंच न आए। बताया जाता है कि, बेलतरा निवासी उक्त शीतलदास के पास पारिवारिक रोजी रोटी का कोई ठोस जरिया नहीं है। यह भी बताया जाता है कि विगत वर्षों सामाजिक पदाधिकारी न होते हुए भी एक परिवार से अंतर्जातीय विवाह प्रकरण में समाज में मिलाने के नाम पर अवैध रूप से 60 हजार की राशि ले ली गई। उसके द्वारा नौकरी लगाने के नाम पर अनेक बेरोजगारों से राशि वसूलने की शिकायतें भी सामने आयीं हैं।

दस प्रतिनिधियों ने विरोध में किया हस्ताक्षर 

उल्लेखनीय है कि दोनों पक्षों के दस प्रतिनिधियों में बबलू दास, नारायणदास, श्यामदास, उत्तमदास, गुड्डू, संतोषदास, शेखरदास, श्यामदास महानदिया, दर्शन- दास, बी डी मानिकपुरी शामिल रहे। कार्यवाही पंजी में सहमति सूचक उक्त सभी दस प्रतिनिधियों के हस्ताक्षर भी हैं। किंतु उक्त बेलतरा निवासी शीतलदास महंत के भड़काने एवं बरगलाने पर आम स्वीकृति एवं सहमति के बावजूद सर्व सम्मत निर्वाचन को नहीं मानने तथा विवाद करने का राग शीतलदास महंत एवं उसके गुट के विघ्न संतोषी तत्वों द्वारा अलापा जा रहा है।

कई थानों में दर्ज है केस 

शीतलदास महंत वर्तमान में समाज का कोई निर्वाचित पदाधिकारी नहीं है। वह स्वयं को स्वयंभू राष्ट्रीय संयोजक और प्रदेश अध्यक्ष बताता फिरता है। ताकि उसकी दुकानदारी चलती रहे। पूर्व गुरुद्वारा समिति द्वारा आय व्यय का हिसाब भी आज पर्यंत नहीं दिया गया है। जाहिर है कि, मामला संदिग्ध है। शीतलदास महंत के विरुद्ध थानों में विभिन्न आपराधिक प्रकरण दर्ज हुए हैं। पूर्व में उसे गिरफ्तार कर हथकड़ी  लगाकर न्यायालय में  पेश किया गया जहां उसे जेल भेज दिया गया था। शासन प्रशासन से सद्गुरु कबीर गुरुद्वारा झोपडापारा कीर्तिनगर में अशांति एवं विवाद फैलाने की कोशिशों एवं षड्यंत्र के लिए शीतल दास महंत के विरुद्ध कठोर कानून कार्यवाही की मांग नव निर्वाचित सद्गुरु कबीर गुरुद्वारा समिति द्वारा की गई है।